प्रोसेसर क्या है, कैसे काम करता है; Processor के प्रकार (सम्पूर्ण जानकारी)

आजकल के समय में लगभग सभी के पास एक अच्छा स्मार्टफोन या एक Normal लैपटॉप तो जरूर ही होता है कंप्यूटर या फिर स्मार्टफोन को और बेहतर से बेहतर बनाने के लिए processor बहुत बड़ा रोल प्ले करता है इसीलिए अक्सर स्मार्टफोन और कंप्यूटर के यूजर processor के बारे में जानने के लिए बहुत उत्सुक रहते हैं क्योंकि यह स्मार्टफोन या फिर कंप्यूटर की सबसे महत्वपूर्ण भाग (अंग) होता है। वे लोग भी जो नया स्मार्टफोन, टैबलेट या फिर लैपटॉप लेना चाहते हैं तो उन्हें भी प्रोसेसर की जानकारी होना बहुत आवश्यक है। 

प्रोसेसर क्या है, कैसे काम करता है

सरल भाषा में कहूं तो मेरे अनुसार यदि आप एक अच्छा processor का चुनाव करते है तो आप एक अच्छा स्मार्टफोन या फिर लैपटॉप का भी चुनाव करते है। इसीलिए कम बजट में ही एक अच्छा processor का चुनाव, आप प्रोसेसर की जानकारी लेकर कर सकते है। 

तो इस आर्टिकल में मैंने processor क्या है? processor कैसे काम करता है? processor कितने प्रकार के होते हैं? processor के टेक्निकल शब्द जैसे: क्लॉक स्पीड क्या होती है? processor में कोर का मतलब क्या है? सीपीयू में 36-bit ओर 64-bit आर्किटेक्चर क्या होती है? इन सभी टॉपिकस के बारे में बहुत ही आसान भाषा में समझाने की कोशिश कीया है। मैं आशा करता हूं कि आपका सारा डाउट्स क्लियर हो जाएगा और प्रोसेसर की बारे में जानने की उत्सुकता और बढ़ जाएगी। 

प्रोसेसर क्या है?

processor, माइक्रोप्रोसेसर या कंट्रोलर, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की सेंट्रल कंट्रोल-प्रोसेसिंग यूनिट होती है, जिसे टेक्निकल भाषा में आईसी इंटीग्रेटेड चिप या सिर्फ चिप बोलते हैं। कंप्यूटर में प्रोसेसर का मेन रोले इनपुट और आउटपुट इंफॉर्मेशन को कंट्रोल करना और पेरीफेरल डिवाइसेज जिसको आप इनपुट और आउटपुट डिवाइसेज भी बोल सकते हो जैसे कि कीबोर्ड, रैम, हार्ड डिस्क मॉनिटर आदि को कंट्रोल करना भी है। आपके इनपुट और आउटपुट डिवाइसेज को ठीक तरीका से ऑपरेट होने के लिए प्रोसेसर ही इंस्ट्रक्शन भेजता है। 

processor

अगर किसी डिवाइस को बंद करना है तो उसके लिए हम बंद करने के लिए कंप्यूटर को इनपुट देंगे तो इस इनपुट को प्रोसेसर बहुत सारे मैथमेटिकल ऑपरेशन परफॉर्म करके यानी की गणना करके अंत में यह समझता है कि इस पर्टिकुलर डिवाइस को बंद करना है फिर उसके बाद उस पर्टिकुलर डिवाइस को बंद होने के लिए इंस्ट्रक्शन या कमांड देता है फिर वह पार्टिकुलर डिवाइस processor के आदेश अनुसार अपने आप को बंद करता है। इसीलिए जितनी तेज प्रोसेसिंग (गणना) होगी उतना ही तेज कंप्यूटर और स्मार्टफोन काम करेंगे

processor मानव मस्तिष्क के समान है। जैसे- मानव मस्तिष्क हमारे शरीर के सभी भाग को कंट्रोल और संचालित करता अगर हमें किसी भी अंग को ऑपरेट करना है तो हमें मस्तिष्क से उस पार्टिकुलर अंग के को कमांड देना पड़ता है और इस तरह वह अंग ऑपरेट होती है वैसे ही कंप्यूटर के सभी पार्ट्स, प्रोसेसर का इंस्ट्रक्शन या कमांड का इंतजार करते है और फिर प्रोसेसर के कमांड के अनुसार अपने आप को ऑपरेट करते है। 

इसलिए आसान भाषा में processor को कंप्यूटर या फिर स्मार्टफोन का मस्तिष्क भी कहा जाता है। आखिर क्यों नहीं प्रोसेसर को मानव मस्तिष्क की गहराई से अध्ययन करने के बाद ही बनाया गया है। वैज्ञानिक अभी भी मानव मस्तिष्क को गहराई से अध्ययन कर रहे हैं ताकि प्रोसेसर को और बेहतर से बेहतर बनाया जा सके। 

processor अन्य दूसरे चिप की तरह सेमीकंडक्टर मैटेरियल जैसे सिलिकॉन के बने बने होते हैं  प्रोसेसर में मिलियंस ऑफ ट्रांसिस्टर्स लगे होते हैं। ट्रांजिस्टर आमतौर पर स्विचिंग यानी कि ऑन और ऑफ करने का काम करता है मूल रूप से ट्रांज़िटर्स अपने इसी स्विचिंग फीचर के कारण इंफॉर्मेशन (एक प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल) को प्रोसेस और कंट्रोल करने में मदद करते हैं। 

ट्रांजिस्टर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंटस से मिलकर, लॉजिक गेट्स बनाये जाते हैं जैसे AND, OR, NOT, NOR इत्यादि। लॉजिक गेट प्रोसेसर में बाइनरी ऑपरेशन संचालित करने के काम में आते हैं अर्थात (Multiplication, addition, subtraction) अब हम बोल सकते हैं की प्रोसेसर जो कि कंप्यूटर का दिमाग है लॉजिक गेट्स पर आधारित है और लॉजिक गेट्स ट्रांजिस्टर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स (कैपेसिटर रजिस्टर और डायोड) पर आधारित है। 

माइक्रोप्रोसेसर के बिना कंप्यूटर या फिर लैपटॉप को बना पाना मुमकिन ही नहीं है क्योंकि माइक्रोप्रोसेसर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भाग है जो मदरबोर्ड के साथ-साथ इनपुट और आउटपुट डिवाइसेज को भी आपस में कनेक्ट करके रखता है और  और एक डिवाइसेज से दूसरे डिवाइस के बीच में कम्युनिकेशन स्थापित करता है। जिसके फलस्वरूप इनपुट और आउटपुट डिवाइसेज में कनेक्शन संभव हो पाता है। 

CPU (Central Processing Unit) के तीन महत्वपूर्ण Elements

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट यानी कि सीपीयू (CPU) मुख्य रूप से Von Neumann Architecture पर आधारित है इस आर्किटेक्चर के अंतर्गत मेन रूप से तीन अलग-अलग एलिमेंट्स आते है। जिनके नाम ALU (Arithmetic Logical Unit), CU (Control Unit) और MU (Memory Unit) है। आईये अब हम इनको अलग-अलग समझते है। 

  1. ALU (Arithmetic Logical Unit)

यह सभी अंक गणितीय गणना को संचालित करता है। यानि की ए एल यू सीपीयू के सभी भी लॉजिकल कैलकुलेशन परफॉर्म करता है, जैसे कि जोड़ना, घटाना, गुणा करना इत्यादि। मैथमेटिकल कैलकुलेशन परफॉर्म करने के लिए एल यू OR, AND, NOT जैसे लॉजिक गेट्स का उपयोग करता है। 

  1. CU (Control Unit )

इसे कंट्रोल यूनिट बोलते हैं यह कंप्यूटर की सारी गतिविधियों को कंट्रोल करता है सबसे पहले किस task को परफॉर्म करना है उसके बाद फिर दूसरा कौन सा task परफॉर्म किया जाएगा यह कंट्रोल यूनिट डिसाइड करता है

कंट्रोल यूनिट जब यह सुनिश्चित कर लेता है कि इस task को पहले परफॉर्म करना है तब इलेक्ट्रिकल सिगनल के माध्यम से उस पार्टिकुलर टास्क को ए एल यू यूनिट के पास भेजता है और अंत में ए एल यू यूनिट उस टास्क को अंक गणितीय गणना करके परफॉर्म करता है। 

  1. MU (Memory Unit) 

यह सबसे आखरी यूनिट है यह डाटा और निर्देशों को अस्थाई रूप से संग्रहित करने के काम आता है जब प्रोसेसर को एक बार में बहुत सारे मैथमेटिकल ऑपरेशन संचालित करने होते हैं तब कुछ इंफॉर्मेशन निष्कर्ष के लिए मेमोरी यूनिट में रजिस्टर कर दिया जाता है जिसे बाद में कंट्रोल यूनिट और एल यू यूनिट की बची हुई टास्क को संचालित  करने के काम में लिया जाता है। उम्मीद है कि आपको प्रोसेसर क्या है और इसके तीन एलिमेंट्स के बारे में समझ आ गई होगी अब समझते हैं कि प्रोसेसर काम कैसे करता है?


प्रोसेसर काम कैसे करता है?

processor मुख्य रूप से अपने कार्य को 4 स्टेप में पूरा करता है इन स्टेप्स को हम 1. Fetch, 2.Decode, 3. Execute और 4. Writeback कहते हैं। आइए अब हम इन स्टेप्स के बारे में डिटेल में समझते हैं। 

  1. Fetch

इसका सरल से मतलब है स्पेशल इंफॉर्मेशन या फिर इंस्ट्रक्शन को ढूंढना और फिर उसे वापस लाना।  fetching के समय प्रोसेसर cache मेमोरी से इंफॉर्मेशन को रिट्रीव करता है यानी कि ढूंढता है और फिर इस इनफार्मेशन को processor अपने समझ के अनुसार अगली प्रोसेस के लिए तैयार करता है। आजकल मॉडर्न कंप्यूटर में प्रोग्राम काउंटर स्पेशल इंस्ट्रक्शन को ढूंढता है। 

  1. Decode

जैसे ही processor किसी पार्टिकुलर इंफॉर्मेशन को Cache मेमोरी में ढूंढ लेती है उसके बाद इसकी अगली स्टेप इस इंफॉर्मेशन को डी-कोड करना होता है यहां पर प्रोसेसर इंस्ट्रक्शन को डी-कोड करके अपने अलग-अलग सेक्टर में भेजता है ताकि वहां पर अंकगणितीय गणना किया जा सके। 

  1. Execute

तिसरा स्टेप टास्क को execute करना होता है। Execute का सिंपल सा मतलब है की इस समय प्रोसेसर को पता होता है कि आखिर उसे इस पर्टिकुलर टास्क या फिर प्रोसेस को कंप्लीट करना है और  इस स्टेप में प्रोसेसर अपने काम को बस जल्दी से कंप्लीट करके जो निष्कर्ष निकला है यानी कि रिजल्ट वह वापस से आखरी स्टेप  में भेजता है। 

  1. Writeback

यह अंतिम स्टेप है इसको आप सरल भाषा में फीडबैक भी बोल सकते है। प्रोसेसर के दुवारा टास्क को Execute करने के बाद में जो निष्कर्ष निकलता है, उसे वापस से मेमोरी में रजिस्टर्ड करना होता है ताकि याद रखा जा सके कि किसी समय अंतराल में पहले किस टास्क को परफॉर्म किया गया था। 

उदाहरण के लिए यह स्टेप इसलिए जरूरी है क्योंकि मान लीजिए अगली बार जैसे ही अगर वही टास्क परफॉर्म करनी हो जो कि किसी समय अंतराल में उसने पहले ही कर लिया था तब प्रोसेसर को अब सभी स्टेप से गुजरने की आवश्यकता नहीं है 

processor अपनी मेमोरी की मदद से सीधा ही उस पर्टिकुलर टास्क को execute यानी कि कंप्लीट करने की कोशिश करता है और ये आपको भी पता है कि जो काम हम एक बार कर लेते हैं उसे दोबारा करने में हमें कम समय लगता है। लेकिन सभी नई टास्क को परफॉर्म करने के लिए प्रोसेसर इन सभी स्टेप्स को फॉलो करता है टेक्निकल भाषा में इन स्टेप्स को प्रोसेसिंग साइकिल कहते हैं। 

CPU काम कैसे करता है विडिओ के माध्यम से समझे

प्रोसेसर कितने प्रकार के होते है?

वैसे मार्केट में तो प्रोसेसर के बहुत प्रकार हैं हम कोई एक प्रकार के बारे में बात नहीं कर सकते हैं इसलिए प्रोसेसर को अलग-अलग आधार के अनुसार बांटा गया है जैसे कि-

A. कोर के आधार पर 

  1. सिंगल कोर 
  2. डुएल कोर 
  3. Quad कोर 
  4. ऑक्टा कोर और 
  5. मल्टी कोर 

इनमें से जिसकी कोर ज्यादा है उसकी प्रोसेसिंग  स्पीड ज्यादा होगी। 

B. सामान्य एप्लीकेशन के आधार पर

  1. माइक्रोप्रोसेसर 
  2. माइक्रोकंट्रोलर 
  3. एंबेडेड प्रोसेसर  और 
  4. डिजिटल सिगनल प्रोसेसिंग

C. आर्किटेक्चर के आधार पर

  1. 16 bit
  2. 32 bit 
  3. 64 bit

D. कंपनी के आधार पर

कंप्यूटर और लैपटॉप के लिए-

  1. Intel
  2. AMD

स्मार्टफोन के लिए

  1. Qualcomm Snapdragon
  2. Helio

इसके अलावा और भी कई सारी कंपनियां है जो अलग-अलग प्रकार की प्रोसेसर बनाती है


प्रोसेसर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

अब मै आपको processor से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दूंगा, जिसको अकसर आप इंटरनेट पर या अपने दोस्तों से सुनते होंगे। जैसे की- क्लॉक स्पीड क्या होती है? प्रोसेसर में कोर (dual core, quad core, octa core) का मतलब क्या है? Intel प्रोसेसर में जनरेशन (6th, 7th, 8th) का मतलब क्या है? आईये अब हम सबको एक-एक करके समझते है। 

प्रोसेसर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

प्रोसेसर में क्लॉक स्पीड क्या है?

क्लॉक स्पीड processor की स्पीड मापने की एक राशि (Quantity) है जिसका मात्रक Hz (हर्ज़) में यानी कि per सेकंड में होता है ठीक जैसे समय मापने की यूनिट सेकंड है।  ध्यान दीजिए यँहा पर सेकंड यानी कि हर्ज फ्रीक्वेंसी का भी मात्रक है। फ्रीक्वेंसी का सरल मतलब है की एक सेकंड में कितना साइकल कंप्लीट हो रहा है जब कोई प्रोसेस या टास्क दिए गए स्टेप्स में पूरी होती है,  तो उसे हम एक साइकिल मान लेते हैं। 

आसान भाषा में एक सेकंड में जितनी अधिक काम होगी तो हम इसकी फ्रीक्वेंसी अधिक मान लेते हैं। यानी कि काम करने की स्पीड अधिक मान लेंगे क्योंकि कम समय में ज्यादा साइकल पूरा हो रहा है। अब प्रोसेसर की क्लॉक स्पीड को समझते हैं उदाहरण के लिए माना कि किसी प्रोसेसर की क्लॉक स्पीड 100hz है तो इसका मतलब है, की प्रोसेसर एक सेकंड में 100 साइकिल यानी कि 100 बार काम करेगा। 

दूसरा उदाहरण के लिए माना कि किसी प्रोसेसर की क्लॉक स्पीड 500 हर्ज है तो इसका मतलब यह है कि वह प्रोसेसर एक सेकंड में 500 साइकिल पूरा करेगा यानी कि 500 बार काम करेगा तो इस प्रोसेसर की स्पीड पहले प्रोसेसर की तुलना में 5 गुना अधिक है। 

आमतौर पर आजकल के समय में एक जनरल purpose लैपटॉप या स्मार्टफोन के सीपीयू का क्लॉक स्पीड Ghz में होता है। तो यह निष्कर्ष निकला की प्रोसेसर की क्लॉक स्पीड जितनी अधिक होगी उसकी कार्य करने की गति भी ज्यादा होगी। 

प्रोसेसर में (Dual Core, Quad Core, Octa Core) का मतलब क्या है?

processor में कोर का सरल सा मतलब है, एक पूरे सीपीयू के अंदर में एक छोटा अलग सीपीयू लगा हो। ऐसा मान लीजिए की एक छोटा सीपीयू कोई एक सॉफ्टवेयर के सारे टास्क को परफॉर्म कर रहा है ठीक उसी समय दूसरा छोटा सीपीयू दूसरे सॉफ्टवेयर के सारे टास्क को परफॉर्म कर रहा है। 

तो इससे निष्कर्ष निकला की, यह छोटा सा सीपीयू एक संपूर्ण सीपीयू की तरह किसी भी टास्क को अकेला परफॉर्म कर सकता है जिससे कि मल्टीटास्किंग संभव हो पाता है मल्टीटास्किंग का मतलब होता है कि आप एक ही समय पर एक से ज्यादा टास्क परफॉर्म करते हो।  उदाहरण के लिए आप एक समय में एमएस वर्ड में कुछ टाइपिंग कर रहे हो और ठीक उसी समय में गाना सुन रहे हो या फिर क्रोम ब्राउजर का इस्तेमाल कर रहे हो। 

प्रोसेसर में मल्टीटास्किंग, समय बचाने का एक अनोखा फीचर है। आधुनिक समय के साथ-साथ प्रोसेसर में कोर की वृद्धि बढ़ती जा रही है जैसे कि पहले Single Core प्रोसेसर होती थी जो कि एक समय में एक ही टास्क पूरा कर पाती थी उसके बाद फिर dual-core का विकास हुआ इससे मल्टीटास्किंग संभव हो पाया लेकिन उतना एफ्फिसिएंट तरीका से काम नहीं करता था इसीलिए Quad कोर विकसित किया गया Quad कोर में मल्टी टास्किंग आसान हो जाती है। 

लेकिन जब बात आती है आपको एक से ज्यादा हेवी सॉफ्टवेयर एक ही समय में यूज करने का जैसे कि आप एक समय में वीडियो मिक्सिंग कर रहे हो और दूसरे समय में कोई कंप्यूटिंग या फिर एनालिसिस का काम कर रहे हो तो फिर यहां पर क्वॉड कोर से भी एडवांस प्रोसेसर ऑक्टा कोर प्रोसेसर की जरूरत पड़ती है। आजकल तो अब मल्टी कोर प्रोसेसर भी मार्केट में आने लगे हैं जिससे कि यूज़र को एकदम स्मूथ लैग फ्री एक्सपीरियंस मिलता है। 

तो आखिर इतने सारे प्रोसेसर में से आपको किस कोर का प्रोसेसर लेना चाहिए? मेरे अनुसार अगर आप लैपटॉप पर ज्यादा हैवी काम करते हो तो आपको ऑक्टा कोर या फिर उससे अधिक मल्टीकोर का प्रोसेसर लेना चाहिए जिससे आपका पीसी हैंग नहीं हो सकता है। 


प्रोसेसर में 32bit, 64bit आर्किटेक्चर का मतलब क्या है?

64-bit processor 32-bit processor से अधिक फास्ट होता है क्योंकि 64-bit का मतलब हुआ 2^64 bytes डाटा को RAM से एक निश्चित समय में रिट्रीव करके प्रोसेस कर सकता है यहाँ bytes digital information की एक यूनिट। जबकि 32bit प्रोसेसर 2^32 bytes डाटा को उसी निश्चित समय में रैम (RAM ) से रिट्रीव करके प्रोसेस करता है। 

सरल भाषा में 64 बिट प्रोसेसर 32 बिट processor की तुलना में कम समय में अधिक डाटा को प्रोसेस कर सकता है जबकि उतना ही डाटा को प्रोसेस करने में 32 बिट प्रोसेसर अधिक समय लेता है। तो जाहिर सी बात है 64 बिट प्रोसेसर अधिक फास्ट है इसके अलावा 32 बिट प्रोसेसर के मुकाबला,64 बिट processor मे ग्राफिक्स अच्छी होती है। 

1990 से अर्ली 2004 तक के बीच के मोस्टली जो कंप्यूटर थे वे सभी 32-बिट आर्किटेक्चर पर आधारित थी। उसके बाद से अब तक लगभग सभी स्मार्टफोन कंप्यूटर और लैपटॉप 64-bit आर्किटेक्चर पर आधारित है। 


Intel प्रोसेसर में (Core i3, i5, i7, i9) का मतलब क्या है?

यहां i इंटेल की ब्रांडिंग को दर्शाता है, core सीरीज को दर्शाता है और डिजिट्स का मतलब है  version जितना अधिक  होगा वह प्रोसेसर उतना ही पावरफुल होगा उदाहरण के लिए-

  • i3 बेसिक टास्क के लिए अच्छी परफॉर्मेंस देता है तथा यह बेसिक लेवल के यूज़ के लिए है और इसमें दो कोर (dual core) होते हैं
  • i5 यह मल्टीपल टास्क के लिए अच्छी परफॉर्मेंस देता है तथा यह इंटरमीडिएट लेवल के यूज़ के लिए है और इसमें 4 कोर है इसके अलावा इस सीरीज के कुछ प्रोसेसर मल्टीट्रेडिंग और टर्बो बूस्ट भी परफॉर्म करते हैं। 
  • i7 यह भी मल्टीटास्किंग के लिए काफी बेहतर प्रोसेसर है तथा इससे आप एडवांस लेवल की सॉफ्टवेयर्स यूज कर सकते हो और इसमें 6 कोर होते हैं इसके अलावा मल्टी ट्रेडिंग, हाइपरथ्रेडिंग और टर्बो बूस्ट फीचर्स भी होते हैं
  • i9 जिसमें 8 कोर है और इसके अलावा  हाइपरथ्रेडिंग और टर्बो बूस्ट पिक्चर मिल जाता है इससे आप किसी भी तरह के एडवांस लेवल का काम कर सकते है। तो निष्कर्ष यह निकला कि वर्शन (कोर) जितना अधिक होगा वह प्रोसेसर उतना ही पावरफुल और मल्टी टास्किंग के लिए अधिक उपयोगी होगा। इंटेल कंपनी कोर सीरीज के अलावा अन्य सीरीज की भी प्रोसेसर बनाती है जैसे इंटेल पेंटीअम Intel celeron आदि

Intel प्रोसेसर में जनरेशन (6th, 7th, 8th, 9th) का मतलब क्या है?

जनरेशन का सरल भाषा में मतलब है प्रोसेसर में इंप्रूवमेंट।  जितनी अधिक जनरेशन होगी वह प्रोसेसर उतना ही लेटेस्ट और एडवांस वर्जन का होगा यानी कि इंटेल कंपनी हमेशा अपने प्रोसेसर को बेहतर से बेहतर बनाने के लिए एक ही कोर (i3, i5 Or i7) के प्रोसेसर को हर साल ट्रांजिस्टर की साइज छोटी करती रहती है जिससे कि एक्स्ट्रा ट्रांजिस्टर लगाने के लिए स्पेस मिल जाता है। 

फिर उसी एक processor में पहले की तुलना में अधिक ट्रांजिस्टर लग जाते हैं जिससे कि प्रोसेसिंग स्पीड पहले की तुलना काफी अच्छी होती है। जितना लेटेस्ट जेनरेशन होगा उसमें ट्रांजिस्टर की संख्या उतना ही अधिक होगी और प्रोसेसिंग स्पीड भी अधिक होगी। मैंने आपको पहले ही बताया है की processor में मिलियंस ऑफ़ ट्रांजिस्टरस लगे रहते हैं जो कि स्विचिंग का काम करते हैं सारा काम ट्रांजिस्टर के स्विचिंग यानी ऑन और ऑफ के आधार पर ही होता है तो जाहिर सी बात है जितना अधिक ट्रांजिस्टर होगा उतना ही अधिक और तेज गति से प्रोसेसिंग होगी। 

ट्रांजिस्टर की साइज नैनोमीटर में मापते हैं जैसे 12nm, 10nm, जितना लेटेस्ट जेनरेशन होगा उसमें ट्रांजिस्टर के साइज उतना ही छोटी होगी दूसरे शब्दों में हम बोल सकते हैं की ट्रांजिस्टर की साइज जितनी छोटी है उसकी प्रोसेसिंग स्पीड उतनी ज्यादा अच्छी होगी इसके अलावा वह बैटरी पावर की खपत भी बहुत कम करेगी। 


प्रोसेसर में Cache (कैश) का मतलब क्या होता है ?

यह एक प्रकार की मेमोरी है। जोकि processor और राम के बिच उपस्थित रहता है। processor किसी भी डाटा को डायरेक्ट रैम (RAM) से रिट्रीव नहीं करता बल्कि रिट्रीव करने से पहले वह कैश मेमोरी में एक बार जरूर चेक करता है कि उसके पास उस पर्टिकुलर टास्क को परफॉर्म करने के लिए यूज़फुल डाटा है कि नहीं। अगर उसे डाटा मिल जाता है, तो वह डायरेक्ट अपनी टास्क परफॉर्म करता है। लेकिन डाटा केस मेमोरी में नहीं रहने की वजह से उसे रैम में जाना पड़ता है। केस मेमोरी का यूज मूल रूप से प्रोसेसिंग टाइम कम करने के लिए होता है।  

कैश मेमोरी रैम की तुलना में काफी अधिक फास्ट होती है। इसलिए सीपीयू काफी तेज गति से प्रोसेसिंग कर पता है कैश मेमोरी की कैपेसिटी जितना बड़ा होगा उसमे उतना ही ज्यादा इंफॉर्मेशन स्टोर होगी। लेकिन कैसे मेमोरी रैम की तुलना में बहुत ज्यादा एक्सपेंसिव होती है इसीलिए यह आमतोर पर 4 एमबी, 6 एमबी की की कैपेसिटी के साथ आती है। कैश मेमोरी के भी अलग प्रकार है जैसे L1 कैश, L2 कैश, L3 कैश इत्यादि। 


सबसे पहले माइक्रो-प्रोसेसर किस कंपनी ने बनाया था?

सेमीकंडक्टर मैटेरियल की खोज के बाद बेहतर processor को बनाना संभव हुआ। पूरी दुनिया में सबसे पहले इंटेल कंपनी ने 1971 में Single Chip Microprocessor (माइक्रो-प्रोसेसर) बनाया था। इंटेल कंपनी के तीन इंजीनियर Stanley Mazor, Federico Faggin and Marcian Hoff ने मिलकर इस माइक्रो प्रोसेसर का निर्माण किया था। इस चिप का नाम Intel 4004 Microprocessor रखा गया था और यह von neumann architecture  पर आधारित थी। 

यानी कि इसे इस ढंग से बनाया गया था कि इस छोटे से chip के अंदर ही सारे प्रोसेसिंग कंपोनेंट्स जैसे कि अर्थमैटिक लॉजिकल यूनिट, कंट्रोल यूनिट और मेमोरी यूनिट एक साथ संयोजित थे। इंटेल 4004 माइक्रोप्रोसेसर 4 bit architecture पर आधारित थी इसमें 302 ट्रांजिस्टर लगे हुए थे जिसका क्लॉक स्पीड 108 किलो हर्ट्ज़ तक था जो scaled होकर 740 किलो हर्ट्ज़ तक बढ़ता था। इसे 1972 में Intel की 8008 सीरीज से रिप्लेस कर दिया गया 8008 प्रोसेसर के पास 3500 ट्रांजिस्टरस और 0.5-0.8 Mhz तक क्लॉक स्पीड थी। तब से लेकर आज तक इंटेल कंपनी लगातार अपने प्रोसेसर को Improve और एडवांस करती आ रही है। 

दूसरी कंपनी AMD है जिसने 1975 में am2900 सीरीज प्रोसेसर को पब्लिकली मार्किट में अवेलेबल कराया। कंप्यूटर और लैपटॉप के माइक्रोप्रोसेसर मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए दो कंपनियां इंटेल और एमडी मार्किट में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। 


सारांश

इस आर्टिकल में आपने समझा की processor किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे- स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टैबलेट और स्मार्टवॉच की एक महत्वपूर्ण अंग होती है जिसे हम सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट भी बोलते हैं। यह यूनिट सभी इनपुट-और आउटपुट डिवाइस को कंट्रोल करती है। इसीलिए सरल भाषा में प्रोसेसर को कंप्यूटर का भी दिमाग कहा जाता है। प्रोसेसर यूजर से पहले इनपुट लेता फिर उसे अपनी समझ के अनुसार यानी की अंकगणितीय गणना करके यूजर को आउटपुट प्रदान करते है।

ALU (Arithmetic Logical Unit), CU (Control Unit) और MU  (Memory Unit) प्रोसेसर के तीन Elements है। और आपने यह भी समझा की प्रोसेसर मुख्य रूप से अपने कार्य को 4 स्टेप में पूरा करता है 1.Fetch, 2. Decode, 3. Execute और 4. Writeback टेक्निकल भाषा में इन स्टेप्स को प्रोसेसिंग साइकिल कहते हैं। 

इसके बाद आपने यह भी समझा की प्रोसेसर के अनेकों प्रकार है जिसको अलग-अलग आधार पर बांटा गया है जैसे- कोर के आधार पर, सिंगल कोर Dual कोर, Quad कोर कोर Octa कोर और Multi कोर आदि। सामान्य एप्लीकेशन के आधार पर: माइक्रोप्रोसेसर, माइक्रोकंट्रोलर, एंबेडेड प्रोसेसर, आर्किटेक्चर के आधार पर: 32bit, 64 बिट इत्यादि। 

फिर आपने processor से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ हासिल की जैसे- प्रोसेसर में क्लॉक स्पीड क्या है: क्लॉक स्पीड प्रोसेसर की स्पीड मापने की एक राशि (quantity) है। प्रोसेसर में कोर (dual core, quad core, octa core) का मतलब क्या है: प्रोसेसर में कोर का सरल सा मतलब होता है एक पूरे सीपीयू के अंदर में एक छोटा अलग सीपीयू यह छोटा सा सीपीयू एक संपूर्ण सीपीयू की तरह किसी भी टास्क को अकेला परफॉर्म कर सकता है जिससे कि मल्टीटास्किंग संभव हो पाता है

Processor में 32bit, 64bit आर्किटेक्चर का मतलब क्या है: 64-bit प्रोसेसर 32-bit processor से अधिक फास्ट होता है। Intel प्रोसेसर में जनरेशन (6th, 7th, 8th gen ) का मतलब क्या है:  जनरेशन का सरल भाषा में मतलब है प्रोसेसर में इंप्रूवमेंट, जितना लेटेस्ट जेनरेशन होगा उसमें ट्रांजिस्टर के साइज उतना ही छोटी होगी दूसरे शब्दों में हम बोल सकते हैं की ट्रांजिस्टर की साइज जितनी छोटी है उसकी प्रोसेसिंग स्पीड उतनी ज्यादा अच्छी होगी और अंत में आपने जाना की पूरी दुनिया में Intel ही वह कंपनी थी जिसने सबसे पहली बार सन 1971 में Single Chip Microprocessor का निर्माण किया था। उम्मीद है की आपको इस आर्टिकल से बहुत मदद मिली होगी।

आपके काम की अन्य पोस्ट:-

मुझे टेक्नोलॉजी के बारे में पढ़ना और लिखना बहुत अच्छा लगता है। इंटरनेट टेक्नोलॉजी के बारे में लोगों के साथ जानकारी शेयर करके मुझे खुशी महसूस होती है। इसके अलावा फोटोग्राफी करना मेरी हॉबी है। मैंने एक इंजीनियर के रूप में शिक्षा ली है और पेशे से अब मैं एक पार्ट-टाइम Professional Blogger हूँ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here