इंटरनेट क्या है? इसकी खोज कब हुई और ये कैसे काम करता है?

इंटरनेट इस नाम को तो आजकल बच्चा बच्चा जनता है, इंटरनेट के बिना रहना मानो असंभव सा हो गया है आज बहुत सारे काम इंटरनेट के माध्यम से कुछ ही सेकंड मे हो जाते है वही उन कामों को सन 2000 से पहले करने पर कई कई घंटे और दिन लग जाते थे। हा हो सकता है की हमने कभी इसको महसूस नहीं किया हो क्यू की आज इंटरनेट हमे बड़ी ही आसानी से मिल जाता है। 

इस ब्लॉग पोस्ट मे आप इंटरनेट क्या है, कैसे काम करता है, इसका मालिक कोन है, इसकी परिभाषा क्या है इन सभी चीजों के बारे मे जानोगे। भारत मे इंटरनेट की उम्र केवल 25 साल है लेकिन फिर भी एसा लगता है की हम हमेशा से ही इसका इस्तेमाल करते आ रहे है। 

Internet बहुत बड़ा है और यहा सब कुछ उपलब्ध है, आप चाहो तो इंटरनेट की मदद से अपनी जिंदगी को पूरी तरह से बदल सकते है, क्यू की आप जो सीखना चाहते है वो इंटरनेट पर मिल जाता है। Internet कितना पावरफूल है इसको समझने के लिए मैं एक ही उदाहरण दूँगा जो की है इस दुनिया के सबसे अमीर आदमी जेफ बेजोस का, इनका पूरा बिज़नेस इंटरनेट पर ही निर्भर है। 

इंटरनेट क्या है परिभाषा? 

इंटरनेट एक वैश्विक व्यापक क्षेत्र नेटवर्क है जो दुनिया भर में कंप्यूटर सिस्टम को एक दूसरे से जोड़ता है। इसमें कई उच्च-बैंडविड्थ डेटा लाइनें शामिल हैं, इंटरनेट से जुडने की लिए आपको किसी ISP यानि की Internet Service Provider की जरूरत पड़ती है। 

ISP यानि की इंटरनेट सेवा प्रदाता एक मिडलमेन की तरह काम करता है, ये आपको और दुनिया के किसी सर्वर या वेबसाइट को आपके कंप्यूटर या मोबाईल से जोड़ने का काम करता है। मोबाईल फोन से भी इंटरनेट यूज करने पर आपको किसी ISP से जुड़ना पड़ता है और इस स्थिति मे इस भूमिका को मोबाईल टावर निभाते है। 

दूसरी भाषा मे Internet के अर्थ को समझने की कोशिश करे तो ये दो शब्दों से मिलकर बना है, पहला Inter और दूसरा Net, इसमे Inter का मतलब होता है एक दूसरे से जुड़ा हुआ और Net का मतलब होता है जाल, हिन्दी मे इंटरनेट को अंतरजाल भी कहते है। 

एसा कोई भी डिवाइस जिसके माध्यम से इंटरनेट से जुड़ा जा सकता है उसका एक IP अड्रेस होता है जिसे Internet Protocol कहते है, इस Protocol से ये पहचान की जा सकती है की कोन व्यक्ति इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहा है। 


इंटरनेट की फूल फॉर्म

इंटरनेट की फूल फॉर्म InternetConnected Network होती है जो की करोड़ों वेबसाइट, सर्वर और यूजर को आपस मे जोड़ता है। हम किस स्कूल, संस्था, कॉलेज के सर्वर को भी इंटरनेट बोल सकते है जो की दुनिया के किसी भी कोने से एक्सेस कीये जा सकते हो। 

इंटरनेट बहुत सारे कंप्युटरो के जुड़े होने का रिजल्ट है, इंटरनेट पर जब भी हम कुछ भी देखने है तो वो डाटा या जानकारी दुनिया के किसी कंप्यूटर से ही आ रही होती है, हालांकि बड़े लेवल पर डाटा को इधर से उधर भेजने के लिए सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है।


इंटरनेट की खोज इतिहास

कहते है आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है एसा ही कुछ इंटरनेट की खोज मे दिखता है, हालांकि इंटरनेट की खोज का श्रेय किसी एक इंसान को नहीं दिया जा सकता क्यू की इसे सही तरीके से इस्तेमाल मे लाने के लिए की वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने काम किया है। 

शीत युद्ध के दोरान अमेरिकी रक्षा विभाग को तेजी से अपनी आर्मी को सूचना पहुँचाने की जरूरत थी जिसके बाद लियोनार्ड  क्लोरॉक ने एक योजना बनाई, इस योजना के तहत की कंप्यूटर को आपस मे जोड़कर सूचनाओं का आदान प्रदान करने मे आसानी हुई, इस योजना मे केवल कुछ ही कंप्यूटर को जोड़ा गया था। 

इसके बाद इस नेटवर्क को और बड़ा बनाने मे MIT के वैज्ञानिक J.C.R. Licklider और रॉबर्ट टेलर ने उनका साथ दिया और 1962 मे Galactic Computer Network बनाया जिसके बाद कुछ साल इस पर काम चलता रहा। 

1965 मे वैज्ञानिको ने एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक सूचना भेजने का तरीका विकसित किया जिसे Packet Switching नाम दिया गया, ये डाटा को ब्लॉक या पैकेट मे तोड़ कर ट्रांसफर करता था। 

इस तकनीक की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका के रक्षा विभाग Advance Research Projects Agency (ARPA) द्वारा की गई और बाद मे इसे ARPAnet का नाम दिया गया। 

ऑक्टोबर 1969 मे ARPAnet ने इंटरनेट के माध्यम से पहला मैसेज “Login” लिखकर भेजा जो की संपूर्ण रूप से सफल नहीं रहा, इसमे मैसेज के पहले दो अक्षर “Lo” का ही डाटा ट्रांसफर हुआ। 

इसके बाद ये नेटवर्क यू ही बढ़ता गया और 1971 मे इसे University of Hawaii के ALOHnet नेटवर्क से जोड़ा गया, इसके बाद कुछ अन्य यूनिवर्सिटी के साथ भी इसे जोड़ा गया, जैसे जैसे लोगों को इसका लाभ पता चलता गया वैसे वैसे लोग इसे ज्यादा यूज करते गए। 

भारत मे इंटरनेट की शुरुआत 15 अगस्त 1995 मे विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) द्वारा की गई, उस समय का इंटरनेट बहुत ज्यादा धीमा होने के साथ साथ बहुत ज्यादा महगा भी होता था, इसके साथ की इंटरनेट की अधिकतम स्पीड मात्र 8-10 kbps की थी। 

Internet Price in 1995
1995 मे इंटरनेट की कीमत

बताया जाता है की 9.6 kbps की स्पीड प्राप्त करने के लिए एक महीने का 1250 रुपए पे करना पड़ता है, अगर इस रुपए को आप आज के इंटरनेट प्राइस से तुलना करे तो भी ये काफी महगा है, इसके अलावा उस समय के 1250 रुपए और आज के 1250 रुपए मे बहुत ही बड़ा अंतर है, उस समय कुछ सरकारी कर्मचारी की एक महीने की सैलरी कुछ 5000 रुपए के आस पास होती थी। 


इंटरनेट कैसे काम करता है? 

इंटरनेट क्या है ये तो अब आप समझ ही चुके हो, इंटरनेट बहुत सारे कंप्युटररो का जुड़ाव है लेकिन अब ये जुड़ाव होता कैसे है, कैसे हम यहा बैठे दुनिया के किसी भी कोने से सूचना कैसे प्राप्त कर पाते है। यहा मैं आपके इन्ही सभी सवालों के जवाब आसान भाषा मे दूँगा। 

पूरी दुनिया को इंटरनेट के साथ जोड़ने के लिए समुद्र मे ऑप्टिकले फ़ाइबर केबल बिछा रखी है, समुद्र मे ये केबल बिछाने का काम टियर 1 कंपनी करती है, ये केबल काफी महँगी होती है और आम केबल के मुकाबले बड़ी मात्र मे डाटा को ट्रैन्स्फर करने की क्षमता रखती है। 

Optical Fibre Cable Map
दुनिया मे बिछी ऑप्टिकल फाइबर केबल का नक्सा

समुद्र के रस्ते पूरे संसार को इन केबल के द्वारा जोड़ा गया है, अगर भारत की बात करे तो टियर 1 कंपनी की ऑप्टिकल फाइबर केबल मुंबई, कोची, तिरुवनंतपुरम, चेन्नई आदि शहरों मे है और ये सभी शहर समुद्री तट पर स्थित है। भारत मे सबसे ज्यादा ऑप्टिकल फाइबर केबल मुंबई शहर मे है। 

आप इन ऑप्टिकल फाइबर केबल का मप इस वेबसाइट पर देख सकते है, यहा आपको पूरे विश्व मे कहा कहा इन केबल को लगाया गया है और किस तरह से लगाया गया है इसकी जानकारी मिलती है। 

एक देश को दूसरे देश तक जोड़ने का काम तो टियर 1 कंपनी करती है लेकिन इसके बाद इंटरनेट को आप तक पहुचाने का काम टियर 2 कंपनी जैसे की Jio, Airtel, BSNL आदि करती है, ये टियर 2 कंपनी टियर 1 कंपनी को पैसे देती है। 

समुद्र मे ऑप्टिकल फाइबर केबल को मछलियों द्वारा कोई दूसरा जानवर समझकर नुकसान पहुँचाया जाता है, एक ऑप्टिकल फाइबर केबल की उम्र 25 साल के आस पास मानी जाती है, टियर 1 कंपनी का इन केबल की देख रेख और रख रखाव मे काफी पैसे खर्च होता है। 

टियर 2 कंपनी भी किसी देश या राज्य मे अपनी ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाती है, जिसके बाद वो केबल किसी टावर से जुड़ती है और हम अपने मोबाईल या कंप्यूटर को टावर से जोड़कर इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाते है। 

यदि अभी भी आपको कुछ डाउट है तो आप इस विडिओ को देखे इसमे भी आसान भाषा मे बताया गया है की इंटरनेट कैसे काम करता है। 


 इंटरनेट के प्रकार

इंटरनेट बहुत सारे कंप्युटरो के जुडने से बनता है, अगर आप अपने घर के सभी डिवाइस को एक नेटवर्क से जोड़ देते हो और उन्मे डाटा का ट्रांसफर हो सकता है तो उसे भी आप इंटरनेट कह सकते हो, इसलिए इंटरनेट नेटवर्क कई तरह के होते है और नई टेक्नॉलजी से साथ अलग प्रकार के नेटवर्क विकसित होते है। 

1) Personal Area Network (PAN)

व्ययक्तिगत क्षेत्र नेटवर्क सबसे छोटा और सबसे बुनियादी प्रकार का नेटवर्क, एक पैन एक वायरलेस मॉडेम, एक या दो कंप्यूटर, फोन, प्रिंटर, टैबलेट आदि से बना है, और एक इमारत में एक व्यक्ति के चारों ओर घूमता है। इस प्रकार के नेटवर्क आमतौर पर छोटे कार्यालयों या निवासों में पाए जाते हैं, और एक डिवाइस से एक व्यक्ति या संगठन द्वारा कंट्रोल किए जाते हैं।

2) Local Area Network (LAN)

मुझे विश्वास है कि आपने पहले भी इस प्रकार के नेटवर्क के बारे में सुना होगा LAN सबसे अधिक बार चर्चा किए जाने वाला और सबसे आम नेटवर्क में से एक है। LAN जानकारी और संसाधनों को साझा करने के लिए कम दूरी के भीतर (एक इमारत के भीतर या दो या तीन इमारतों के समूह के बीच) कंप्यूटर और कम-वोल्टेज उपकरणों के समूहों को एक साथ जोड़ते हैं। इसके ईथरनेट केबल से जोड़ा जाता है। 

3) Wireless Local Area Network (WLAN)

WLAN वायरलेस नेटवर्क तकनीक का उपयोग करते हैं, जैसे कि वाई-फाई। आमतौर पर एक ही प्रकार के अनुप्रयोगों में LAN के रूप में देखा जाता है, इन प्रकार के नेटवर्क मे किसी डिवाइस को केबल से कनेक्ट करने की जरूरत नहीं पड़ती, यह बिना वायर जो जोड़े तेज गति से डाटा ट्रांसफर करने मे सक्षम होता है, JioFi इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।

4) Metropolitan Area Network (MAN)

इस प्रकार के नेटवर्क LAN से बड़े होते हैं लेकिन WAN से छोटे होते हैं  और दोनों प्रकार के नेटवर्क से तत्वों को शामिल करते हैं। MAN पूरे भौगोलिक क्षेत्र (आमतौर पर एक शहर या शहर, लेकिन कभी-कभी एक परिसर) मे फैलाया जाता है। स्वामित्व और रखरखाव किसी एक व्यक्ति या कंपनी (एक स्थानीय परिषद, एक बड़ी कंपनी, आदि) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

5) Wide Area Network (WAN)

ये LAN की तुलना में थोड़ा अधिक जटिल होता है और एक WAN कंप्यूटर को लंबी दूरी तक एक साथ जोड़ता है। यह कंप्यूटर और कम वोल्टेज वाले उपकरणों को एक-दूसरे से बड़े नेटवर्क से कनेक्ट होने की अनुमति देता है, भले ही वे मीलों दूर हो। 

हम जो इंटरनेट इस्तेमाल करते है WAN का एक सबसे बड़ा उदाहरण है, जो दुनिया भर के सभी कंप्यूटरों को एक साथ जोड़ता है। WAN की हर जगह पहुंच के कारण यह आमतौर पर कई बड़ी कंपनी द्वारा मैनेज किया जाता है। 


इंटरनेट के फायदे

दुनिया मे हर चीज के लाभ और हानी होते है क्यू के लाभ और हानी हमेशा इंसान पर निर्भर करता है वो जिस नजर से उस चीज को देखते है वो उन्हे वैसी ही लगने लगती है, इंटरनेट भी कुछ इसी तरह से है जहा इसके अनंत फायदे है वही नुकसान भी है। 

  1. इंटरनेट सबसे लिए खुला है यहा कोई भी अपना काम शुरू कर सकता है या अपनी बात रख सकता है। 
  2. इंटरनेट से फ्री मे बहुत कुछ सीखा जा सकता है, इसकी मदद से दूसरों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती। 
  3. इंटरनेट पर सूचनाओं का भंडार है, एक क्लिक मे आप किसी भी सूचना को प्राप्त कर सकते हो। 
  4. इंटरनेट के आ जाने से पैसे की बचत होती है, बिना इंटरनेट के हमे कुछ भी जानने या पढ़ने के लिए किताबों और अखबार की जरूरत पड़ती है, वही ट्रेन टिकट बुक करने जैसे काम भी घर से ही हो जाते है। 
  5. इंटरनेट से अलग अलग प्रकार की नौकरी उत्पन्न हुई हुई है। 
  6. इंटरनेट पर लोगों को अपनी बात रखने का मोका मिलता है, उनकी आवाज़ को आसानी से नहीं दबाया जा सकता। 
  7. महामारी या किसी युद्ध काल मे इंटरनेट सबसे बड़ा साथी होता है, इसका एक उदाहरण हम कोरोना काल मे भी देख सकते है जहा सब काम Online होने लगे थे। 
  8. इंटरनेट से समय की बहुत बचत होती है।
  9. इंटरनेट की वजह से लाइफ काफी आसान और तेज हो जाती है। 
  10. इंटरनेट के माध्यम से बैंकिंग का काम काफी आसान हो गया अब केवल मोबाईल से आप बैंकिंग से सभी काम कर सकते है। 

इंटरनेट के नुकसान 

एसा नहीं है की इंटरनेट के केवल फायदे ही है इसके बहुत सारे नुकसान भी है, जैसे हर चीज के दो पहलू होते है उसी प्रकार इंटरनेट के भी दो पहलू है। कुछ लोगों के मानसिकता ही एसी हो जाती है जिसके चलते वो हमेशा नेगेटिव और गलत चीजों को पहले अपनाते है। 

  1. समय की बर्बादी, भारत के इंटरनेट को टाइम पास करने के लिए ज्यादा यूज किया जाता है, कुछ लोग इंटरनेट पर यू ही कुछ भी देखते रहते और कुछ सीखने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते। 
  2. सोशल मीडिया को ही इंटरनेट समझना, इंटरनेट बहुत बड़ा है यहा हर तरह के लोग है और हर तरह का कंटेन्ट भी है, कुछ लोग केवल सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके ये समझने लगते है की उन्हे इंटरनेट के बारे मे बहुत कुछ पता है लेकिन सोशल मीडिया तो इंटरनेट का बहुत बहुत छोटा हिस्सा है। 
  3. इंटरनेट पर बुरी और अशलील सामग्री तेजी से वाइरल होती है हालांकि इसे वाइरल करने मे इंटरनेट का दोष नहीं है लोग एसी सामग्री को ज्यादा शेयर करते है। 
  4. कुछ लोग किसी प्लेटफॉर्म या ऑनलाइन गेम के आदि हो जाना जिसके बाद वो खुद पर अपना नियंत्रण खो बेठते है। 
  5. कुछ लोग हैकिंग और धोखा धड़ी के शिकार हो जाते है जिससे कई बार उन्हे भारी नुकसान हो जाता है, हालांकि इंटरनेट के बारे मे सही जानकारी होने पर इन सभी चीजों से बचा जा सकता है। 
  6. इंटरनेट फ्री नहीं होता इसका इस्तेमाल करने के लिए हर महीने आपको कुछ रुपए चुकाने पड़ते है ऐसे मे यदि इंटरनेट से कोई भी वैल्यू नहीं ली जा रही है तो वो पैसा भी यू ही बर्बाद हो रहा है। 
  7. झूठी और भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण कई बार ढंगे हो जाते है जिसमे लोगों की जान भी चली जाती है। 
  8. डाटा की चोरी, कुछ बड़ी कंपनीया यूज़र के डाटा की चोरी करते है और इसका इस्तेमाल किसी देश को आर्थिक या सामाजिक तोर पर कमजोर बनाने के लिए भी किया जा सकता है। 

अंतिम शब्द

उम्मीद है इस ब्लॉग पोस्ट को पूरा पढ़ने के बाद आपको इंटरनेट से संबंधित सभी सवालों के जवाब मिल गए है, फिर भी यदि आप इंटरनेट के बारे मे कुछ भी पूछना चाहे तो कमेन्ट के माध्यम से पूछ से रिप्लाइ आपको ईमेल पर मिल जाएगा। यदि आपको ये पोस्ट अच्छा और मददगार लगे तो अपने दोस्तों और सोशल मीडिया पर शेयर करके हमे सपोर्ट जरूर करे।

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मुझे इंटरनेट टेक्नोलॉजी के बारे में जानने और इसे लोगो के साथ शेयर करना अच्छा लगता है, मैं एक प्रोफेशनल ब्लॉगर हु। इसके अलावा मुझे अच्छी किताबें पढ़ने और लोगों को ऑब्ज़र्व करना भी अच्छा लगता है।

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