💽SSD क्या होता है? इसके प्रकार, फीचर्स, डाटा स्पीड (सबकुछ जानें)

इस आर्टिकल में आप जानेगे की SSD क्या होता है? इसका परिभाषा, SSD कैसे काम करता है? तथा SSD कितने प्रकार के होते है। SSD के प्रकार में आप SATA SSD, M.2 SSD और NVME SSD इत्यादि के बारे में जानेंगे। इसके साथ-साथ यदि आप भी अपने लैपटॉप का स्पीड बढ़ाने के लिए SSD लगाना चाहते है। तो उसके लिए पहले यह सुनिश्चित कर लेना बहुत जरूरी है की आपके लैपटॉप में कौन सा SSD लगेगा, SSD Interface यानी Slot कौन सा है। मैं आपको इन सभी टॉपिक्स के बारे में आसान भाषा में बताऊंगा की कैसे आप इसे खुद से चेक कर सकते है। इसलिए आपसे अनुरोध है की इस आर्टिकल को अंत तक पढ़िए, ताकि SSD खरीदने के बाद, पछताना न पड़े। 

SSD kya hota hai

SSD का नाम तो आपने जरूर सुना होगा यदि नहीं तो निश्चित रहें, आप जल्द ही इसके बारे में सबकुछ जानेंगे। SSD का पूरा नाम Solid State Drive होता है। जिसका इश्तेमाल डाटा स्टोरेज के लिए किया जाता है। चूँकि HDD की तुलना में SSD की Data Read और Write Speed काफी अधिक होती है, इसलिये इसे लगभग हर कोई अपने लैपटॉप में लगाना चाहते है ताकि उनका लैपटॉप काफी तेज गति से ऑपरेट हो सके। आखिर क्यों नहीं स्लो लैपटॉप या फिर हैंग लैपटॉप भला कौन चलाना पसंद करता है। 

इसलिए तेजी से बढ़ती टेक्नोलॉजी की दुनिया में सभी को अधिक तेज गति से, चलने वाला लैपटॉप या फिर कंप्यूटर चाहिए। क्यूंकि टेक्नोलॉजी की दुनिया में लगभग हर कोई तेज कंप्यूटर पर गति से काम करने, या होने का आनंद लेना चाहते है। इसके अलावा, बिजी लाइफ में एक अच्छा स्पीड हमारे समय की अधीक मात्रा में बचत करता है। SSD को 1980 के दशक के अंत में ज़िटेल द्वारा DRAM-आधारित उत्पादों के एक परिवार के रूप में, “RAM Disk” नाम के तहत, UNIVAC और Perkin-Elmer जैसे सिस्टम पर इश्तेमाल के लिए पेश किया गया था। 

फिर 1999 में, BiTMICRO द्वारा फ्लैश-आधारित SSDs के बारे में कई परिचय और घोषणाएँ की गईं, जिनमें 3.5-इंच, 18GB SSD शामिल था। उसके बाद 2007 में, Fusion-io द्वारा PCIe-आधारित SSD की घोषणा की गई थी। इसके पास 100,000 (एक लाख) इनपुट-आउटपुट ऑपरेशन्स एक सेकंड में पूरा करने का सामर्थ्य था। जिसका स्टोरेज कैपेसिटी 320Gb तक था। तो आइये अब हम सबसे पहले SSD क्या है इसके बारे में जानते है उसके बाद SSD काम कैसे करता है इसके बारे में जानेंगे। 


SSD क्या होता है? (परिभाषा)

SSD का पूरा नाम Solid State Drive है। SSD एक ऐसा स्टोरेज डिवाइस है, जो Non-volatile flash Memory से मिलकर बना होता है। जिसे HDD यानि Hard Disk Drive के जगह पर इश्तेमाल किया जाता है। क्यूंकि यह HDD के मुकाबले Data Transfer में काफी तेज होता है। SSD में अधिक तेज डाटा ट्रांसफर स्पीड का सबसे बड़ा कारण है की इसमें Magnetic Disk नहीं लगा होता है अर्थात मैग्नेटिक डिस्क के जगह पर non-volatile flash memory का इश्तेमाल किया जाता है, जो की एक प्रकार का चिप होता है। 

SSD एक सॉलिड स्टेट स्टोरेज डिवाइस होता है, जो डाटा को परसिस्टेंट यानी परमानेंट रूप से स्टोर करने के लिए बहुत सारे Integrated (समावेशित) चिपों के समायोजन से बना होता है। इंटीग्रेटेड चिपों में मुख्य रूप से Non-volatile flash Memory (NVFM) का इश्तेमाल किया जाता है, जो किसी RAM के तरह दिखने में लगता है। NVM/ NVFM वह मेमोरी होती है जो इलेक्ट्रिक पावर हटा दिए जाने पर भी स्टोर्ड (दर्ज) इनफार्मेशन को बरकरार रखती है। SSD का जयादातर इश्तेमाल सेकेंडरी स्टोरेज के लिए किया जाता है, क्यूंकि इसका स्टोरेज कैपेसिटी प्राइमरी स्टोरेज के मुकाबले अधिक होता है और यह गति में लगभग बराबर होता है। 

चूँकि कन्वेंशनल स्टोरेज डिवाइस जैसे: Magnetic Tape, HDD, Floppy Drive, CD (Compact Disk) इत्यादि के तुलना में इसमें किसी भी प्रकार के रोटेटिंग (घूर्णन करने वाले) पार्ट्स नहीं लगे होते है। और रोटेटिंग पार्ट्स के जगह पर इनफार्मेशन को दर्ज और याद (रिट्रीव) करने के लिए अधिक मात्रा में फ़्लैश मेमोरी का इश्तेमाल किया जाता है, और ये सभी सेमी-कंडक्टर मटेरियल यानी अर्धचालक से बने होते है है, इसलिए SSD को Semiconductor Storage Device भी कहा जाता है। इसके अलावा भी इसके कई नाम है जैसे: 1. Solid State Drive, 2. Solid State Disk इत्यादि। आइये अब हम समझते है, की SSD काम कैसे करता है। 


SSD कैसे काम करता है? 

Solid State Drive (SSD), USB (Universal Serial Bus) फ्लैश ड्राइव Technology के समान है। यह तो अब आप, जान ही चूंकि होंगे की SSD एक सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस है। जो सॉलिड-स्टेट फ्लैश मेमोरी पर लगातार डेटा स्टोर करता है। ध्यान दीजिए, इसे सॉलिड स्टेट बार-बार, इसलिए कहा जा रहा है, क्यूंकि इसमें किसी भी तरह के रोटेटिंग या स्पिनिंग पार्ट तथा मैग्नेटिक हेड नहीं लगे रहते है। इसका बनावट किसी RAM (Random Access Memory) के तरह होता है, लेकिन यह RAM के तुलना में डाटा को टेम्पररी रूप से स्टोर करके नहीं रखता है इसके विपरीत यह डाटा को परमानेंट रुप से दर्ज करके रखता है।

अर्थात SSD में डाटा स्टोर होने के बाद यदि इलेक्ट्रिक पावर सप्लाई कट जाए, फिर भी इसमें उपस्थित डाटा सुरक्षित रहता है। तथा पुनः इलेक्ट्रिक सप्लाई देने के बाद वही डाटा उपलब्ध हो जाता है। SSD डाटा को परमानेंट स्टोर करने के लिए, मुख्य रूप से दो प्रकार के टेक्नोलॉजी का उपयोग करता है। जिन्हें:1. NAND Flash Memory Chip और 2. Flash Controller कहा जाता है। ये टेक्नोलॉजी डाटा को उच्च गति से पढ़ने और लिखने का प्रदर्शन प्रदान करते हैं।  लोकेशन से डाटा को रिट्रीव करने के तुलना में ये टेक्नोलॉजी ब्लॉक के रूप में डाटा को स्टोर करती है। 

NAND Flash Grid में 256KB to 4 MB के बिच में कहीं भी डाटा को स्टोर कर सकता है। डाटा अस्थिरता यानी (Volatility) को बचाने के लिए, स्टोरेज डिवाइस में विद्युत चार्ज रखने के लिए SSD को फ्लोटिंग गेट ट्रांजिस्टर (FGRs) के साथ डिज़ाइन किया जाता है। 

SSD मुख्य तीन प्रकार के मेमोरी का उपयोग करता है जो है, पहला: सिंगल लेवल सेल (SLC), दूसरा: मल्टी लेवल सेल (MLC) और तीसरा: ट्रिपल लेवल सेल (TLC) है। SLC सबसे तेज और सबसे टिकाऊ होने के कारण SSD का सबसे महंगा कॉम्पोनेन्ट है। MLC में लिखने की गति में धीमी होती है और इस कारण से यह SSD का सस्ता कॉम्पोनेन्ट है। जबकि TLC सेल में सिर्फ 3 bit (बिट) डेटा रखा जा सकता है। अभी तक हमने SSD की Working यानी यह काम किस तरह कर रहा है, इसके बारे में जाना, हो सकता है यह आपको स्पष्ट समझ में नहीं आया हो, तो कोई दिकत नहीं आईये अब हम SSD के प्रकार के बारे समझते है। आगे पढ़ने से पहले इसके कंपोनेंट्स के बारे जान लीजिए।


SSD के मुख्य Components

  1. Flash Memory: यह डेटा संग्रहीत करने के लिए जिम्मेदार है
  2. Cache Memory: फ्लैश मेमोरी के साथ काम करते समय डेटा के अस्थायी स्टोरेज के लिए Cache Memory का उपयोग किया जाता है।
  3. Controller: यह एक स्पेशल माइक्रोप्रोसेसर के सामान है, जो लॉजिक गेट्स से मिलकर बना होता है, यह डाटा से सम्बंधित कार्यों को कण्ट्रोल तथा प्रोसेस करता है, जैसे: मुख्य कंप्यूटर बस के साथ फ्लैश मेमोरी को जोड़ना और ऑपरेशन परफॉर्म करना इत्यादि। 
  4. PCB (Printed Circuit Board): यह एक बोर्ड है, जिसपर सभी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स तथा कनेक्शन को अटैच किया जाता है। 
  5. Connection Interface/ Port: यह एक दरवाजा के तरह है, जंहा से डाटा अंदर और बाहर जाता है। 
  6. Other Electronics Components: (Capacitor, Register, Diode etc.)

SSD के प्रकार

जब से SSD यानी Solid State Drive का कांसेप्ट आया है, तब से लेकर इसमें निरंतर मॉडिफाई किया जा रहा है। ताकि इसे और बेहत से बेहतर बनाया जा सके। समय के साथ टेक्नोलॉजी में विर्धि होने के साथ-साथ SSD के अनेकों प्रकार बनायें जा चुके है। आज मार्केट में लगभग 7-8 प्रकार के SSD मिलते है। सबके अपने-अपने लाभ और हानियाँ है। लेकिन एक बात यह तय है की जो SSD, Storage Device में सबसे एडवांस यानि लेटेस्ट है, उसका डाटा ट्रांसफर स्पीड सबसे अधिक है। हाँ उसका कीमत भी अधिक है, इसमें कोई शक नहीं है। निचे SSD के प्रकार के बारे में समझाया हूँ, SSD को Connection Port (Slot), वर्शन या कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल इत्यादि के आधार पर अलग-अलग प्रकार में बात सकते है। 

ध्यान दीजिए मार्किट में लैपटॉप और डेस्कटॉप दोनों के लिए SSD के इतने सारे प्रकार है, की आप खरीदने से पहले ही कंफ्यूज हो जाओगे की आखिर आपके लिए किस प्रकार का SSD लेना सही रहेगा। तथा आपके लैपटॉप तथा डेस्कटॉप में किस प्रकार का SSD अच्छे से सपोर्ट करेगा। तो इसके लिए यह जरूरी है, की सबसे पहले आप SSD में इश्तेमाल होने वाले टेक्निकल शब्द के बारे में अच्छे से समझ लीजिये ताकि, बाद में गलत SSD खरीदने पर पछतावा न हो। 

SSD में इश्तेमाल होने वाले टेक्निकल शब्द 

InterFace:

यह एक ऐसा साधन होता है, जो SSD को होस्ट यानि कंप्यूटर या लैपटॉप के दूसरे कंट्रोलर या चिपसेट से जोड़ता है, जिससे की दोनों के बिच कम्युनिकेशन डेवेलोप हो पाता है। निचे मैंने SSD के लिए आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले InterFace के प्रकार के बारे थोड़ा सा समझया हैं। SSD के लिए मुख्य तीन प्रकार के Interface इश्तेमाल किये जाते है। 

1. SATA – इसका पूरा नाम Serial Advanced Technology Attachment है। यह AHCI Protocol का इश्तेमाल करता है तथा यह पुराने स्टोरेज डिवाइस जैसे की: HDD, Floppy Disk इत्यादि के लिए बनाया गया था, लेकिन इस इंटरफ़ेस का इश्तेमाल, SATA SSD के साथ भी किया जाता है। बस आपको इस प्रकार के इंटरफ़ेस में डाटा ट्रांसफर स्पीड कम देखने को मिलता है। इसका अब तक का सबसे लेटेस्ट वर्शन SATA 3.0 है, जिसमे 600 MB/s तक का स्पीड मिल जाता है। 

2. PCIe – इसका पूरा नाम (Peripheral Computer Interface) तथा e का मतलब Express होता है। यह जायदातर बेस्ट परफॉरमेंस के लिए NVMe प्रोटोकॉल का सपोर्ट करता है। प्रोटोकॉल के बारे में निचे जानेंगे। चूँकि PCIe Interface को पहले डेस्कटॉप या कंप्यूटर Motherboard में पेरिफेरल डिवाइस जैसे की: ग्राफ़िक्स कार्ड, साउंड कार्ड और नेटवर्क कार्ड इत्यादि, को जोड़ने के लिया Design किया गया था, लेकिन इसका बढ़िया परफॉर्मन्स , scalability, High Bandwidth को देखते हुए, इस Interface के साथ SSD का भी इश्तेमाल किया जाने लगा। जिससे की डाटा ट्रांसफर स्पीड काफी अधिक तेज गति से संभव हो पाया। 

Technology की दुनिया में बाद में चलकर PCIe Interface को Update कर और ज्यादा बेहतर बनाया गया है, जिससे की अब यह सबसे हाईएस्ट जनरेशन NAND flash यानि NVMe SSD के साथ अच्छे से डाटा ट्रांसफर कर सकता है। इसलिए मार्किट में PCIe Interface के भी अलग-अलग वर्शन तथा LAN यानी Data Bus देखने को मिलते है। जैसे: PCIe Gen2x2, PCIe Gen2x3, PCIe Gen 3×3,इत्यादि। यँहा पहला No. का मतलब इसका वर्शन तथा दूसरा नो. का मतलब यह अधिकतम कितने LAN को सपोर्ट करता है। इसका डाटा ट्रांसफर स्पीड सबसे अधिक लगभग 4GB/s तक हो सकता है, जो की SATA Storage डिवाइस के तुलना में 6 गुना अधिक है। 

उदाहरण के लिए: PCIe Gen2x3 का मतलब है की यह Version 2 है तथा अधिकतम 3 LAN को सपोर्ट करता है। आपको ये सभी शब्द कन्फूशन हो सकते है, लेकिन अब इसे मैं इससे ज्यादा सरल भाषा में नहीं बता सकता। अब एक तीसरे प्रकार का भी Interface पाया जाता है, लेकिन यह ज्यादा पॉपुलर नहीं है। 

3. SAS Interface: इसका पूरा नाम (Serial Attached SCSI) होता है, यँहा SCSI का पूरा नाम Small Computer System Interface होता है जिसे खाशतौर पर “scuzzy” उच्चारण किया जाता है। इसे खाश तौर पर हाई परफॉरमेंस एंटरप्राइज यानि बिज़नेस उद्देश्य के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह डाटा ट्रांसफर करने के लिए SCSI टेक्नोलॉजी का इश्तेमाल करता है। इस टेक्नोलॉजी का इश्तेमाल SATA Device भी करता है। इस वजह से SATA स्टोरेज डिवाइस को इसके साथ उपयोग किया जा सकता है, लेकिन SAS स्टोरेज डिवाइस को SATA इंटरफ़ेस या फिर SATA पोर्ट के साथ कनेक्ट नहीं किया जा सकता है अर्थात उपयोग नहीं किया जा सकता है। इसका स्पीड SATA स्टोरेज डिवाइस के तुलना में दो गुना होता है।  


Protocol

यह एक सेट ऑफ़ रूल्स होता है। इसका मतलब है, कोई भी कम्युनिकेशन यानि डाटा का आदान-प्रदान किस नियम के जरिये किया जाएगा। आपने Network Protocol में Http या Https प्रोटोकॉल के बारे में अवश्य सुना होगा या फिर सबसे कॉमन अभी कोरोना महामारी में आपने Covid- 19 प्रोटोकॉल के बारे में जरूर सुना होगा तो यँहा भी भी प्रोटोकॉल का मतलब सेट ऑफ़ रूल्स होते है। 

Storage Device Technology (SDT) के दुनियाँ में कई प्रकार के प्रोटोकॉल होते है। यंहा सभी के बारे में बताना जरूरी नहीं है, इसलिए अभी केवल दो प्रकार के प्रोटोकॉल के बारे में जानना जरूरी है, और यहींपॉपुलर है।

पहला: NVMe, तथा दूसरा AHCI प्रोटोकॉल है। मार्किट में ये दो प्रोटोकॉल अधिक प्रचलित में है तथा दोनों में से NVMe सबसे ज्यदा फास्ट और लेटेस्ट है। चूँकि नए प्रोटोकॉल काम को नए तरह से करने के लिए जिम्मेदार होते हैं इस वजह से  जितना अधिक लेटेस्ट प्रोटोकॉल होता है उसमें डाटा ट्रांसफर स्पीड अधिक देखने को मिलता है। 

  1. AHCSI Protocol: इसका पूरा नाम Advanced Host Controller Interface है। यह पुराना प्रोटोकॉल वर्शन है। यह SATA स्टोरेज डिवाइस के लिए काम करता है। 
  2. NVMe Protocol: इसका पूरा नाम  Nonvolatile Memory Express होता है। यह लेटेस्ट प्रोटोकॉल है। यह M.2, PCIe फॉर्म फैक्टर वाले डिवाइस में कार्य करता है। 

Form Factor

यह किसी भी स्टोरेज डिवाइस का फिजिकल कॉन्फ़िगरेशन तथा उसका साइज के बारे में जानकारी देता है। उदहारण के लिए: पहले के ज़माने में SATA फॉर्म फैक्टर के HDD उपलब्ध होते थे जिसका साइज क्रमशः: 3.5 Inch, 2.5 इंच तथा 1.8 इंच इत्यादि होते थे। लेकिन अभी मार्किट में 2.5 इंच Form Factor में SATA HDD तथा SSD दोनों मिल जाते है। Form Factor में भी आगे चलकर बहुत बदलाव हुए है, खाश तौर पर साइज में मामले में तो इस आधार पर Form Factor भी कई प्रकार होते है जैसे: M.2 SATA, M.2 NVMe, U.2, m, eUSB इत्यादि। 

ध्यान दीजिए M.2 फॉर्म फैक्टर एक RAM की तरह दिखते हैं और यह SATA फॉर्म फैक्टर से बिल्कुल अलग होते हैं। जबकि PCIe Interface के ज्यादातर SSD जो डेस्कटॉप के लिए होते है,  किसी ग्राफ़िक्स कार्ड या साउंड कार्ड के तरह दीखते है, सभी का वास्तविक फोटो निचे दिया गया है। 

LAN & Data BUS

यह दो प्रकार का है: 1. SATA LAN तथा 2. PCIe LAN. यदि आसान भाषा मे समझाने की कोशिश करू तो LAN एक रोड के तरह कार्य करता है। तथा Data BUS, रोड पर चल रहे गाड़ियों के तरह कार्य करता है। अब आप यह खुद से भी सोच सकते है, की जितना अधिक रोड होता है, उतना अधिक गाड़िया जा सकते है। जिसके फलसवरूप अधिक डाटा पैकेट यानि पैसेंजर जा सकते है। इसलिए यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, की LAN यानी रोड किस प्रकार का है तथा कितना LAN दिया गया है। उदहारण के लिए PCIe Gen2x3 में तीन LAN दिए रहते है। 

Version

इसका सरल सा मतलब है, की कोई भी डिवाइस या प्रोडक्ट कितना एडवांस तथा अपडेटेड है। आपने एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम या सॉफ्टवेयर के वर्शन के बारे में अवश्य सुना होगा। वर्शन जितना अधिक होता है, वह डिवाइस उतना ही लेटेस्ट तथा बेहतर ऑप्टिमाइज़ किया होता है। 

Interface Switch

इसके भी अनेकों प्रकार है जैसे: Switch B, Switch M, Switch B&M इत्यादि। यह समझने में Interface के तरह है, लेकिन थोड़ा सा अंतर है। Interface Switch में स्लॉट दिया रहता है। ये स्लॉट अलग-अलग मदर बोर्ड के अनुसार अलग-अलग बनाये जाते है। यदि आप किसी M.2 SSD को खरीदते है, जिसमे Interface Switch का प्रकार “Switch M” है, तो यह सिर्फ उसी मदर बोर्ड में अच्छे से फिट होगा जिसमे Switch M फिट होने का ऑप्शन दिया होगा, अन्यथा फिट नहीं होगा। 

BIOS 

इसका पूरा नाम Basic Input Output System होता है। चूँकि कोई भी कंप्यूटर या लैपटॉप पावर ऑन होने के बाद डायरेक्ट Hard Disk यानी सेकंडरी स्टोरेज से डाटा को रिट्रीव नहीं करता है। बल्कि इसके पहले कंप्यूटर को कुछ जरूरी डिसिशन लेने के लिए EPROM में उपस्थित प्रोग्राम का मदद लेना पड़ता है। जैसे: किस Storage Device, नेटवर्क कार्ड, RAM इत्यादि को ऑपरेट करना है? तो EPROM में पहले से उपस्थित प्रोग्राम को ही BIOS कहते है, इन प्रोग्रामस में उपस्थित ऑप्शंस को आसानी से Write (एडिट) नहीं किया जा सकता है, केवल Read (पढ़ा और सेलेक्ट) किया जा सकता है। 

BIOS, किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम को बूट होने से पहले सबकुछ अच्छे से चेक करता है, की क्या मदर बोर्ड में Attached Devices सही तरह से काम कर रहें है या नहीं? यदि सब कुछ सही है तो फिर ऑपरेटिंग सिस्टम आसानी से बूट हो जाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम को ये सभी चीजे चेक करने की जरूरत नहीं पड़ती है। लेकिन 

यँहा पर एक दिक्कत यह है, की BIOS सभी Storage Devices को सपोर्ट नहीं कर सकता है, यह सिर्फ उन्ही को सपोर्ट करता है, जिसके लिए इसे पहले से तय करके बनाया गया है। तो इसलिए यँहा पर किसी भी प्रकार का SSD खरीदने से पहले यह सुनिचित करन बहुत जरूरी है, की क्या आपके BIOS में उस Particular SSD का सपोर्ट दिया गया है या नहीं। यदि सपोर्ट दिया गया है तो फिर ठीक है अन्यथा नहीं। 

अपने सिस्टम के BIOS में जाकर पता लगा सकते है या फिर एक दूसरा ऑप्शन है की आप अपने System Information चेक कर पता कर सकते है। 

Slot or Connection Port or Connector:  M.2 Slot SSD में सबसे ज्यादा कॉमन है। यह सीधे मदर बोर्ड के ऊपर अटैच हो जाता है। हालाँकि Slot or Connection Port भी कई प्रकार हो सकते है। इनके नाम में Confusion हो सकता है, क्यूंकि कुछ-कुछ ऐसे भी नाम है जो एक Connector भी है, तथा LAN भी है। जैसे: SATA Port: यह एक कनेक्शन पोर्ट भी है तथा LAN भी है। इसी प्रकार PCIe यह एक Interface है तथा यह एक कनेक्शन पोर्ट भी है। इसके अलावा NVMe एक कनेक्शन पोर्ट भी हो सकता है और यह एक प्रोटोकॉल भी है, जो की PCIe LAN का इश्तेमाल करता है। तो कुल मिलकर बात यह है, इन सभी टेक्निकल शब्दों को हमें अच्छे से गहराई में समझने की जरूरत है। आइये अब SSD के प्रकार समझते है।


1. SATA SSD 

SATA का पूरा नाम Serial Advanced Technology Attachment है। यह AHCI प्रोटोकॉल का इश्तेमाल करता है तथा यह SATA LAN का इश्तेमाल करता है। इसका इंटरफ़ेस भी SATA होता है। ध्यान दीजिए यँहा नाम में आपको Confusion हो सकता है। लेकिन क्या करें नाम ही ऐसा है। 

samsung sata ssd photo

इस प्रकार का SSD आपके Laptop या Computer में HDD के जगह लगता है। क्यूंकि पुराना HDD, SATA कम्युनिकेशन पोर्ट के साथ कनेक्ट किया रहता है, तो आप सिम्पली HDD को हटाकर SSD लगा सकते है। ऊपर से देखने में इस प्रकार का SSD एक HDD के तरह लगता है। लेकिन अंदर से यह किसी RAM या चिप के तरह होता है। 

एक बात ध्यान दीजिए यदि आप डेस्कटॉप का इश्तेमाल करते है, तो आप एक साथ HDD तथा SSD दोनों का इश्तेमाल कर सकते है। क्यूंकि उसमे एक से ज्यादा SATA Port में SSD लगाने के लिए जगह मिल जाता है। लेकिन यहीं ऑप्शन लगभग सभी लैपटॉप में नहीं मिलते है। यदि आप फिर भी एक साथ दोनों का इश्तेमाल करना चाहते है, तो आपको HDD को USB पोर्ट के साथ कनेक्ट करना होता है। हालाँकि नए जनरेशन के लैपटॉप मदर बोर्ड में एक साथ HDD तथा SSD दोनों का इश्तेमाल करना चाहते है, तो उसके लिए लैपटॉप में एक दूसरा कनेक्शन पोर्ट दिया जाता है, वह या तो M.2 SATA, M.2 PCIe या M.2 NVMe में से कोई एक हो सकता है। 

SSD’s के दुनिया में यह सबसे पहला मॉडल है। तथा यह अधिक लोक्रपिय भी है। इसका साइज 2.5 inches है, जो की बिलकुल पुराने HDD के साइज के बराबर है। SATA SSD का स्पीड सामन्य 150 MB/s से लेकर 600 MB/s तक होता है। SATA SSD बाकी दूसरे SSD के मुकाबले डाटा ट्रांसफर Slow (धीमा) करता है। चूँकि यह सबसे पहला वर्शन है, इसलिए इसे भी समय के साथ अपग्रेड किया गया है। अभी मार्किट में इसके तीन नए वर्शन अपने अलग-अलग फीचर के साथ मिल जाते है। जिनके नाम निचे दिए गए है। 

  1. SATA I (Write/Read Speed 150 MB/s)
  2. SATA II (Write/Read 300 Mb/s)
  3. SATA III (Write/Read 600 MB/s)

यँहा SATA 2, SATA 1 का सक्सेसर यानी अगला वर्शन है। ठीक इस प्रकार SATA 3, SATA 2 का अगला वर्शन है, तो यह जाहिर सी बात है, की डाटा ट्रांसफर की स्पीड SATA 3 में अधिक देखने को मिलता है। हार्ड डिस्क सामान्य कम कैपेसिटी के मिलते है। यह दूसरे SSD जैसे: NVMe, या PCIe SSD में डाटा ट्रांसफर स्पीड के मुकाबले स्लो डाटा का ट्रांसफर करता है, लेकिन यह कीमत में सबसे सस्ता मिलता है। 

जैसा की मैंने ऊपर बताया की SATA SSD में एक सबसे बड़ी कमी यह है की, इसे हमें अपने लैपटॉप में HDD के जगह लगाना पड़ता है, बसर्ते की कोई अन्य पोर्ट नहीं दिया हो। जिससे हम एक बार में सिर्फ एक ही तरह के स्टोरेज डिवाइस का उपयोग कर सकते है। तो इस कमी को पूरा करने के लिए हमें दूसरे प्रकार के SSD’s का इश्तेमाल करना पड़ता है, जिनके नाम निचे दिए गए है। ये सभी SSD’s SATA कम्युनिकेशन Port को सपोर्ट नहीं करते है। इनमे से कुछ NVMe कम्युनिकेशन पोर्ट, तथा कुछ PCIe कम्युनिकेशन पोर्ट का सपोर्ट करते है। हालाँकि इनके भी अलग-अलग वर्शन है, जिसे हम आगे समझेंगे। 


2. M.2 SATA SSD

यह M.2 फॉर्म फैक्टर या स्लॉट का इश्तेमाल करता है। इस प्रकार का SSD मार्किट में नया है। चूँकि इसका Form Factor M.2 होने से यह साइज में छोटा और हल्का भी है। यह SSD प्रिंटेड सर्किट बोर्ड पर इलेक्ट्रॉनिक्स चिप दुवारा बना होता है। जिसमे मुख्य रूप से डाटा को स्टोर करने के लिए दोनों तरफ NAND Flash Memory (चिप) लगा होता है। 

इसका साइज ज्यादातर केस में 22mm Width (चौड़ा) तथा 80mm (length) लम्बा होता है। इसके अलावा यह अलग-अलग लम्बाई के साइज में भी आता है। निचे कुछ M.2 SATA SSD के साइज के बारे में बताया हूँ। 

  1. M.2 22110 : Length 110 x Width 22 mm
  2. M.2 2280 : 80 x 22 mm 
  3. M.2 2260 : 60 x 22 mm
  4. M.2 2242 : 42 x 22 mm

M.2 SATA SSD भी एक नार्मल SATA SSD की तरह SATA BUS का इश्तेमाल करता है। और यह भी एक नार्मल SATA SSD के तरह AHCI प्रोटोकॉल का इश्तेमाल करता है। यँहा एक बात दिमाग में नोट कर लेना बेहद जरूरी है की M.2 SATA SSD की डाटा ट्रांसफर स्पीड वही है जो एक नियमित SATA SSD में होती है, अर्थात 600 MB/s तक होता है। 

M.2 प्रकार के SSDs की कनेक्टिविटी अधिक जटिल है, लेकिन इसे मदरबोर्ड पर सॉकेट के Keys के आधार पर 3 तरीकों से बांटा जा सकता है। M.2 इंटरफ़ेस में तीन प्रमुख Keys हो सकते हैं:

  1. Switch B
  2. Switch M
  3. Switch B&M

तो कुल मिलकर देखा जाए तो M.2 SATA SSD एक नार्मल SATA SSD से स्पीड के मामले में बरारबर है। सिर्फ साइज, वजन तथा Form Factor में अलग है। मैंने Form Factor, BUS और Port के बारे में ऊपर ही बता दिया है। यदि आपको ये समझ में नहीं आ रहा है, तो ऊपर दिए गए टेक्निकल शब्द कोपहले जान लीजिए। 


3. mSATA SSD

यह SATA SSD का मिनी Model है। इसका फॉर्म फैक्टर काफी छोटा होता है। इस कारण से इसका इश्तेमाल बहोत छोटे लैपटॉप, कॉम्पैक्ट सिस्टम तथा खासतोर कर स्मार्ट फ़ोन इत्यादि में mSATA Slot के साथ इश्तेमाल किया जाता है। लेकिन अभी के मार्किट में ज्यादातर डिवाइस Drive में mSATA Connector को हटाकर M.2 Connector लगा दिया गया है। 

सबसे लेटेस्ट mSATA SSD की स्टोरेज कैपेसिटी 1TB तक है और डाटा ट्रांसफर यानि (पढ़ने/लिखने) की गति 6GBPS तक है। इसके साथ-साथ mSATA में बिजली की खपत कम होता है। इस वजह से यह पावर सेविंग के लिए एक बेस्ट ऑप्शन है। 


4. M.2 PCIe SSD

यह एक दूसरा प्रकार का SSD है। इसमें डाटा ट्रांसफर स्पीड को बढ़ाने के लिए SATA SSD से बिलकुल न्य टेक्नोलॉजी का इश्तेमाल किया गया है। इसके बारे में जानने से पहले इसका टेक्निकल शब्द को समझ लीजिय। 

a) InterFace: यह PCIe Interface को सपोर्ट करता है।  

b) Form Factor: इसका Form Factor M.2 होता है। 

c) LAN: यह PCI Express LAN  का इश्तेमाल करता है। 

d) Version: इसके भी कईं वर्शन है, जिनके नाम निचे दिए गए है:

  1. PCI-E Gen 2X2
  2. PCI-E Gen 2X3
  3. PCI-E Gen 2X4
  4. PCI-E Gen 3X2
  5. PCI-E Gen 3X3 इत्यादि। 

e) Interface Switch: निचे दिए गए स्विच के नाम में से कोई भी हो सकता है। 

  1. Switch B
  2. Switch M
  3. Switch B&M

f) Size: मार्केट में उपलब्ध कुछ M.2 PCIe SSD के साइज निचे दिए गए है। सभी का चौड़ाई बराबर होता है, सिर्फ लम्बाई बदलता है। 8mm x 22mm

g) Connection Port: M.2 PCIe

h) Data Transfer Speed: 2600 mb/s जो SATA 3 SSD के मुकाबले चार गुना अधिक है। 


5. M.2 NVMe SSD

यह एक दूसरा प्रकार का SSD है। इसमें भी डाटा ट्रांसफर स्पीड को बढ़ाने के लिए SATA SSD तथा M.2 PCIe SSD से नया टेक्नोलॉजी का इश्तेमाल किया गया है। इसके बारे में जानने से पहले एक बार इसका टेक्निकल शब्द को समझते है। 

a) Protocol: यह NVMe प्रोटोकॉल का इश्तेमाल करता है। 

b) InterFace: यह PCIe Interface को सपोर्ट करता है।  

c) Form Factor: इसका Form Factor M.2 होता है। 

d) LAN: यह PCI Express LAN  इश्तेमाल करता है। 

e) Model: इसके भी कईं मॉडल है, अलग-अलग कंपनी अलग बनाते है। जिनके नाम निचे दिए गए है:

  • Crucial P2 3D NAND 500Gb
  • Crucial P1 3D NAND 240 Gb
  • WD SN550
  • Seagate BarraCuda Q5 SSD इत्यादि। 

f) Interface Switch: निचे दिए गए स्विच के नाम में से कोई भी हो सकता है। 

  1. Switch B
  2. Switch M
  3. Switch B&M

g) Size: मार्किट में उपलब्ध कुछ M.2 NVMe SSD के साइज निचे दिए गए है। सभी का चौड़ाई बराबर होता है, सिर्फ लम्बाई बदलता है। 22mm length x 8mm width

h) Connection Port: M.2 PCIe

i) Data Transfer Speed: 5GB/s जो SATA 3 SSD के मुकाबले आठ गुना अधिक है। 

j) BIOS Support: NVMe


आपके लैपटॉप में कौन सा SSD लगेगा (चेक करें)

आप लगभग दो तरीके से यह चेक कर सकते है, की आपके लैपटॉप में किस प्रकार का SSD अच्छे से सपोर्ट करेगा। पहला तरीका है की आप खुद से अपने समझदारी का उपयोग करते हुए, पता कर सकते है, जिसमे आपको अपने मदर बोर्ड में दिए गए स्लॉट को समझना होगा तथा BIOS में जाकर यह चेक करना होगा की, वँहा पर NVMe, PCIe Mode इत्यादि के लिए बूट होने का ऑप्शन दिया है या नहीं। 

लेकिन यदि आपको ये सभी चीजें समझ में नहीं आता है तो आप डायरेक्ट किसी थर्ड पार्टी टूल का इश्तेमाल करके चेक कर सकते है और फिर वही प्रोडक्ट को बाजार से या फिर ऑनलाइन खरीद कर लगा सकते है। तो आईये अब हम दोनों तरीकों को आसान भाषा में स्टेप के साथ समझते है। 

1. पहला तरीका (खुद से चेक कीजिए)

स्टेप 1) सबसे पहले अपने सिस्टम के मदर बोर्ड में चेक कीजिए की उसमे किस प्रकार का Slot दिया गया है। यदि M.2 SATA दिया है तो फिर उसके बाद Interface Switch के बारे में पता लगाइये और फिर कितने साइज का SSD इसमें लग सकता है यह भी पता लगाइये। 

स्टेप 2) जब ऊपर बताये गए जानकारी को कन्फर्म कर ले, तो फिर अपने सिस्टम के BIOS में जाकर वँहा Boot Mode चेक कीजिए की कितने प्रकार का बूट मोड को सपोर्ट करता है। जितने प्रकार का बूट मोड होगा आपके पास उतना ऑप्शन है। 

स्टेप 3) यदि आप BIOS में जाकर चेक करने में असमर्थ है, तो अपने लैपटॉप या फिर कंप्यूटर के सर्च बार में जाकर: System Information (सिस्टम इनफार्मेशन) टाइप कीजिए और फिर ओपन कीजिये। 

open system information

स्टेप 4) System Information ओपन होने के बाद Component>Storage>IDE पर क्लिक कीजिए। तो आपके सामने Storage Controller किस प्रकार का ये सभी चेक कर सकते है। 

storage IDE

स्टेप 5) यदि आपका लैपटॉप 2018 के पहले का है, तो यह ज्यादा चान्सेस है की उसमे AHCI प्रोटोकॉल का सपोर्ट दिया होगा। यदि आपका Laptop लेटेस्ट है, यानी उसमे 9th, 10th, 11th जनरेशन का प्रोसेसर लगा है, तो यह ज्यादा चान्सेस है की उसमे NVMe का सपोर्ट मिल सकता है। 


2. दूसरा तरीका (SAMSUNG SSD Checker)

स्टेप 1) सबसे पहले इस लिंक को क्लिक कीजिए। 

स्टेप 2)  फिर आप अपना सिस्टम का प्रकार को सेलेक्ट कीजिए। 

SSD checker Tool

स्टेप 3) फिर आप अपने सिस्टम के मैन्युफैक्चरर का नाम सेलेक्ट कीजिए। 

स्टेप 3) फिर आप अपने मॉडल को सेलेक्ट करके सर्च पर क्लिक कीजिए। तो आपके सामने निचे SSD का प्रकार और उसका फीचर भी दिख जाता है। आप अपने लैपटॉप का मॉडल नो. को दर्ज करके भी सर्च कर सकते है। 

स्टेप 4) यदि आपके सामने यही SSD का नाम नहीं दिखाया जा रहा है, या फर SAMSUNG का SSD नहीं चाहिए तो एक और ऑप्शन है। Crucial के वेबसाइट पर जाकर ऊपर बताये गए Same स्टेप्स को फोलोव करके के पता सकते है। 


Advantages of SSD (कंप्यूटर में SSD के फायदे)

  1. Gaming: यह गेमिंग के लिए सबसे अच्छा ऑप्शन है।  
  2. No Noise: इसमें कोई भी मूविंग पार्ट नहीं रहने से आवाज नहीं आता है। 
  3. Best Performance: इसका परफॉरमेंस HDD तथा अन्य Floppy Drive के तुलना में काफी अच्छा है। 
  4. High Speed: यह बहुत तेज  गति से डाटा का ट्रांसफर करता है। इसका Read/Write Speed लगभग 600Mb/s से लेकर 4GB/s तक हो सकता है। 
  5. Resistant to Shock: अपने सिस्टम पर किसी वजह से झटका यानि शॉक लगने से अपने आप को प्रोटेक करता है। क्यूंकि इसका बनावट ही इस प्रकार है। 
  6. Power Consumption: यह HDD के तुलना में काम पावर का खपत करता है। 
  7. Lifespan: इसका लाइफ टाइम ज्यादा है। 

Disadvantages of SSD (SSD के हानियाँ)

  1. Cost: SSDs की कीमत बहुत अधिक होते है। एक 240Gb का नार्मल SATA SSD कम से कम 2000 INR के पड़ता है। 
  2. Storage Capacity: SSD’s का भंडारण क्षमता लागत की तुलना में कम है, क्यूंकि यह बहुत महंगा होता है। 
  3. Compatibility: एक ही SSD लगभग सभी प्रकार  सिस्टम में इश्तेमाल नहीं किया जा सकता है, इसलिए अलग-अलग सिस्टम के लिए अलग-अलग प्रकार का SSD खरीदना पड़ता है।  यह इसका सबसे बड़ा कमी है। 

SSD vs HDD (SSD और HDD में अंतर)

SSDHDD
1.इसका पूरा नाम Solid State Drive होता है। इसका पूरा नाम Hard Disk Drive होता है। 
2.इसमें डाटा स्टोर करने के लिए DRAM Flash Memory का इश्तेमाल किया जाता है। इसमें डाटा स्टोर करने के लिए Magnetic Disk/  Plat का इश्तेमाल किया जाता है, जो रोटेट करता रहता है। 
3.  यह HDD के तुलना में अधिक तेज गति से डाटा ट्रांसफर करता है। यह SSD के तुलना में अधिक धीमा गति से डाटा ट्रांसफर करता है। 
4.इसका कीमत बहुत ज्यादा होता है। इसका कीमत कम होता है। 
5.इसमें अलग-अलग कनेक्शन पोर्ट तथा Interface दिया रहता है। इसमें सिर्फ एक ही Connection Port तथा Interface दिया रहता है। 
6.इसमें मुख्य रूप से दो प्रोटोकॉल का इश्तेमाल किया जाता है। पहला: AHCSI, तथा दूसरा NVMe प्रोटोकॉल। इसमें मुख्य रूप से एक प्रोटोकॉल का इश्तेमाल किया जाता है। सिर्फ AHCSI प्रोटोकॉल। 
7.इस प्रकार के SSD को इंसटाल करना एक नार्मल लोगो के लिए डिफिकल्ट है। इस प्रकार के SSD को इंसटाल करना एक नार्मल लोगो के लिए आसान है। 
8.इसका वजन हल्का और साइज छोटा होता है।  इसका वजन भारी और साइज बड़ा होता है।

SSD से संबधित आपके कॉमन प्रश्नों के उत्तर 

1. NAND Flash Memory क्या है?

NAND Flash Memory (चिप्स) में Data को लगातार संग्रहीत और पुनर्प्राप्त किया जाता है। इलेक्ट्रिक पावर सप्लाई नहीं देने पर भी डेटा बनाए रखते हैं।

2. Flash Controller क्या होता है?

Flash Controller, SSD का दिल और दिमाग के तरह है। यह होस्ट कंप्यूटर और SSD के अन्य Components के साथ इंटरफेस करने के लिए जिम्मेदार है

3. Volatile और Non Volatile का मतलब क्या है?

Volatile का मतलब है, किसी मेमोरी में दर्ज किया हुवा डाटा रेटरीव नहीं हो सकता है। जब इलेक्ट्रिक पावर सप्लाई को बंद कर दिया जाये। जबकि NonVolatile का मतलब है नहीं मिटने वाला यानि, किसी मेमोरी में दर्ज किया हुवा डाटा रेटरीव हो जाता है। जब इलेक्ट्रिक पावर सप्लाई को बंद कर दिया जाये। 

4. DRAM Cache क्या है?

यह एक Volatile Memory का प्रकार होता है। यह मेमोरी की एक छोटी मात्रा है जिसका उपयोग डेटा के अस्थायी भंडारण के रूप में किया जाता है। यह सभी एसएसडी में उपलब्ध नहीं है। चूंकि यह अस्थिर है, इसलिए इसे जानकारी बनाए रखने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है।

5. क्या SSD बेहतर होता है Gaming के लिए?

हाँ SSD गेमिंग के लिए बेहतर है, लेकिन इसका कीमत अधिक है। 

6. SSD या HDD में कौन ज़्यादा बेहतर हैं?

इसमें कोई शक नहीं है की किसी भी प्रकार का SSD, Speed के तुलना में HDD से अधिक बेहतर है। लेकिन कीमत के मामले में बेहतर है। 

7. Connection, Communication Port तथा Slot क्या है? क्या ये अलग-अलग है?

नहीं, ये सभी एक ही चीज का अलग-अलग नाम है। 

8. तीन प्रकार के SSD के नाम बताये, जो M.2 Form Factor को सपोर्ट करता है। 

1. M.2 NVMe SSD
2. M.2 PCIe SSD और
3. M.2 SATA SSD इत्यादि।

9. SSD और HDD में अंतर क्या है?

इसमें डाटा स्टोर करने के लिए DRAM Flash Memory का इश्तेमाल किया जाता है, तथा यह अधिक फ़ास्ट होता है। जबकि HDD में डाटा स्टोर करने के लिए Magnetic Disk का इश्तेमाल किया जाता है, जो रोटेट करता रहता है तथा यह स्लो होता है।

10. NVMe Protocol का क्या मतलब है?

इसका पूरा नाम  Nonvolatile Memory Express होता है। यह लेटेस्ट प्रोटोकॉल है। यह M.2, PCIe फॉर्म फैक्टर वाले डिवाइस में कार्य करता है।

निष्कर्ष: 

इस आर्टिकल में आपने SSD के सबंध में लगभग सभी टॉपिक पर जानकारियाँ हासिल किया। आपने सबसे पहले जाना की SSD क्या है: SSD एक सॉलिड स्टेट स्टोरेज डिवाइस होता है, जो डाटा को परसिस्टेंट यानी परमानेंट रूप से स्टोर करने के लिए बहुत सारे Integrated (समावेशित) चिपों के समायोजन से बना होता है। फिर आपने समझा की SSD के दुनिया में इश्तेमाल होने वाले टेक्नीकल शब्द क्या है? जैसे: Interface, Protocol, Form Factor, LAN & Data BUS, Version, Interface Switch तथा BIOS के बारे में जाना। 

आपने फिर SSD के प्रकार के बारे में जाना की मार्किट में SSD के अनेकों प्रकार है, जैसे: SATA SSD SATA का पूरा नाम Serial Advanced Technology Attachment है। यह AHCI प्रोटोकॉल का इश्तेमाल करता है तथा यह SATA LAN का इश्तेमाल करता है। M.2 SATA SSD यह M.2 फॉर्म फैक्टर या स्लॉट का इश्तेमाल करता है। फिर

mSATA SSD: यह SATA का छोटा वर्शन है। M.2 PCIe SSD InterFace: यह PCIe Interface को सपोर्ट करता है तथा इसका Form Factor M.2 होता है। तथा फिर M.2 NVMe SSD इसमें भी डाटा ट्रांसफर स्पीड को बढ़ाने के लिए SATA SSD तथा M.2 PCIe SSD से नया टेक्नोलॉजी का इश्तेमाल किया गया है।उसके बाद हमने फिर जाना की, आपके लैपटॉप में कौन सा SSD लगेगा उसके चेक करने के लिए पहला तरीका: (खुद से चेक कीजिए) तथा दूसरा तरीका (SAMSUNG SSD Checker) के बारे में बताया। 

आपने फिर कंप्यूटर में SSD के फायदे) और Disadvantages of SSD यानी SSD के हानियां  बारे में जाना। और सबसे अंत में हमने  SSD vs HDD यानी SSD और HDD में अंतर को समझा। उम्मीद करता हु की यह आर्टिकल आपको बेहद पसंस आया होगा, और यदि आपको किसी भी तरह का सुझाव या शिकायत है, तो निचे कमेंट कीजिए, हम उसका रिप्लाई जरूर देंगे। 

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मुझे टेक्नोलॉजी के बारे में पढ़ना और लिखना बहुत अच्छा लगता है। इंटरनेट टेक्नोलॉजी के बारे में लोगों के साथ जानकारी शेयर करके मुझे खुशी महसूस होती है। इसके अलावा फोटोग्राफी करना मेरी हॉबी है। मैंने एक इंजीनियर के रूप में शिक्षा ली है और पेशे से अब मैं एक पार्ट-टाइम Professional Blogger हूँ।

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