मॉनिटर क्या है, कितने प्रकार के होते हैं; कैसे काम करते है (सम्पूर्ण जानकारी)

आज हम इस आर्टिकल में Computer Monitor से सम्बंधित महत्वपूर्ण, ज्ञानवर्धक जानकारियाँ अर्जित करेंगे। जैसे की: हम जानेंगे, Monitor क्या है?  Monitor का मुख्य कार्य क्या है? तथा यह काम कैसे करता है? Monitors कितने प्रकार का होते है? हम यह भी जानेंगे की Monitor में क्या-क्या फीचर्स दिए जाते है। 

इसके साथ-साथ हम जानेंगे की LCD Monitor कैसे कार्य करता है? तथा इसके मुख्य कंपोनेंट्स क्या-क्या है? टीवी और Monitor में क्या अंतर है? और अंत में हम LCD और LED Monitor के बीच क्या अंतर है? इसके बारे में भी जानेंगे। Monitor आजकल लगभग सभी घरों में एक अहम हिस्सा बन गया है। यह एक हस्ता-खेलता परिवार में रोजमर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। परिवार के अलग-अलग सदस्य अलग-अलग उदेश्य के लिए Monitor का इश्तेमाल करना चाहते है। जैसे:

किसी को एंटरटेनमेंट के लिए LCD या LED Monitor चाहिए जिसमे वे यूट्यूब वीडियो या टीवी चैनल के वीडियो को देख सके। तो किसी सदस्य को Computer पर फोटो या वीडियो एडिटिंग करने के लिए एक अच्छा Monitor चाहिए, तो किसी सदस्य को गेमिंग के लिए Monitor चाहिए इत्यादि। इस आधार पर देखा जाए तो Monitor किसी परिवार में या किसी आदमी के लिए जरूरत बन गया है, जो रोजमर्रा के कार्यों में अधिक तेजी से उपयोग किया जा रहा है। आखिर क्यों नहीं? Computer Monitor इंसान के कामों को और अधिक आसान बनाता है, यह दिन-प्रतिदिन के कार्यो को और अच्छे तरीके से मैनेज करने का साधन भी है। 

1964 में, Uniscope 300 मशीन में एक अंतर्निर्मित CRT डिस्प्ले शामिल था, जो एक वास्तविक Computer मॉनीटर नहीं था  लेकिन इसके लगभग 10 वर्ष के बाद 1 मार्च 1973 को ज़ेरॉक्स ऑल्टो Computer पेश किया गया, जिसमें पहला Computer Monitor था। इस मॉनीटर में एक मोनोक्रोम डिस्प्ले और सीआरटी तकनीक शामिल किया गया था। तो चलिए, अब हम सबसे पहले यह जानते हैं कि Monitor क्या है। 

Monitor क्या है?

Monitor Computer का एक आउटपुट डिवाइस है। Monitor सीपीयू के द्वारा भेजा गया ग्रफिकल या विजुअल सिग्नल को रिसीव कर उसे फोटो और वीडियो के रूप में दिखाने का कार्य करता है। Monitor का मुख्य कार्य आपको स्क्रीन पर वैसे विजुअल को दिखाना जिसको आप आसानी से देख कर समझ सकते हैं।  विजुअल, फोटो या सिंबॉल के फॉर्म में होता है। जिसका निमार्ण मूल रूप से डॉट मैट्रिक्स (पिक्सेल्स) से होता है। डॉट-मैट्रिक्स यानी पिक्सेल्स के बारे में हम आगे जानेंगे। 

Monitor Kya Hai photo

Monitor एक फिजिकल हार्डवेयर डिवाइस होता है जो जानकारियों को टेक्स्ट, सिंबल या फोटो के रूप में कन्वर्ट करके दिखाने का कार्य करता है।  इसका मुख्य उद्देश्य केवल Computer से आ रही जानकारियां यानी विजुअल सिग्नल को वास्तविक रूप में दिखाना होता है।  इसीलिए Monitors में शुरू से ही निरंतर बदलाव आते रहे हैं।  पहले ब्लैक एंड वाइट यानी मोनोक्रोम Monitor होते थे फिर उसके बाद ग्रेस्केल Monitor का कंसेप्ट आया और फिर उसके बाद कलर Monitor विकसित किया गया, तब से लेकर अब तक निरंतर कलर Monitor उपयोग में लाया जा रहा है। 

हालांकि, अभी भी Monitor पर निरंतर कार्य किया जा रहा है ताकि उसको और बेहतर से बेहतर बनाया जा सके कलर Monitor में भी कई प्रकार के मॉडल मार्केट में मिल जाते हैं जैसे: LCD, LED, OLED इत्यादि इनके बारे में हम आगे जानेंगे। 

पहले के इलेक्ट्रॉनिक Computer में लाइट बल्ब का पैनल फिट किया जाता था, जहां पर प्रत्येक बल्ब, Computer के अंदर उपस्थित रजिस्टरस के किसी पर्टिकुलर स्टेट को ऑन और ऑफ करके दिखाता था। इसने Computer को संचालित करने वाले इंजीनियरों को मशीन की आंतरिक स्थिति की निगरानी यानि Monitoring करने की अनुमति दी, इसलिए लाइट बल्ब के इस पैनल को आगे चलकर ‘Monitor’ के रूप में जाना जाने लगा। 

1970 के दशक में पहला होम Computer Monitor में सीआरटी यानी कैथोड रे ट्यूब का इश्तेमाल किया गया था, जो विजुअल डिस्प्ले टर्मिनल के लिए कॉमन था। Computer Monitor को फॉर्मर्ली (पहले) Visual Display Units (VDU) या VDT (Visual Display Terminal) के नाम से जाना जाता था लेकिन इस शब्द का इस्तेमाल करना लगभग 1990 के दशक में छोड़ दिया गया। आजकल के जमाने में CRT Monitor का इस्तेमाल होना बिलकुल बंद हो चुका है और इसके जगह पर एल ई डी, एलसीडी इत्यादि जैसे Monitor का इस्तेमाल किया जाता है। 


Monitor का मुख्य कार्य क्या है?

Monitor का मुख्य कार्य Computer से आ रही इलेक्ट्रॉनिक विसुअल सिग्नल को रिसीव करना  और फिर उसे कन्वर्ट कर, स्क्रीन पर वैसे विजुअल को दिखाना जिसको आप आसानी से देख कर समझ सकते हैं। ध्यान दीजिए विजुअल, फोटो या सिंबॉल के फॉर्म में हो सकता है, जो मूल रूप में छोटे-छोटे लाखों पिक्सेल्स से बने होते है। आगे आप जानेंगे की Monitor किन-किन कंपोनेंट से मिलकर बना होता है और उनका मुख्य कार्य क्या-क्या होता है। आइये फ़िलहाल अभी Monitor के प्रकार के बारे में जानते है। 


Monitors कितने प्रकार के होते है?

मॉनीटर्स अनेकों प्रकार के होते है। सभी के बारे में बताना तो संभव नहीं है, लेकिन फिर भी कुछ प्रसिद्ध मॉनीटर्स के बारे में जानना जरूरी है। जैसे: CRT Monitor (Colour & Monochrom), LCD Monitor (Liquid Crystal Display), TFT (Thin Film Transistor) LCD Monitor, IPS Panels (in-plane switching), Flat Panel Monitor तथा Plasma Screen Monitors इत्यादि।

1. CRT Monitor (Black & White)

इस प्रकार के Monitor में कैथोड रे ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए इससे सीआरटी Monitor कहा जाता है। Computer युग के शुरुआती दिनों में लगभग 1800 ई. से टेलीविजन और Monitor के रूप में कैथोड रे ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता था। 

crt monitor

कैथोड रे टयूब एक प्रकार का वैक्यूम (निवार्त) ट्यूब होता है, जिसके अंदर इलेक्ट्रान गन लगे होते है। इलेक्ट्रान गन का काम इलेक्रॉन किंरणों को उत्पन करना होता है, ताकि इन्ही किरणों को ट्यूब के अंदर पॉलिश की गई फास्पोरस की पतली परत यानी छोटे-छोटे लाखों फॉस्फोरस डॉट्स पर टकराया जाता है, जिससे की स्क्रीन पर चमक उत्पन होता है। 

स्क्रीन पर एक बार में एक से अधिक इलेक्ट्रॉन्स एक साथ टकराते है, जिससे की हमें कुछ इमेज या वीडियो  दिखाई देती है, लेकिन यह इमेज मानव दुवारा समझने योग्य नहीं होती है, क्यूंकि इलेक्ट्रान किरणों को अच्छे से नियंत्रण नहीं किया गया है। इसीलिए इलेक्रॉन किरणों को नियंत्रण करने के लिए, पिक्चर ट्यूब के ऊपर चारों तरफ कपर वायर की वाइंडिंग की जाती है, जिससे की उसमे करंट के प्रवाह से मैग्नेटिक फील्ड उत्पन किया सके। 

एक बात ध्यान दीजिए की इलेक्रॉन किरणों में यह गुण होता है, की जब उसके आस-पास मैग्नेटिक फील्ड उत्त्पन्न किया जाता है, तो वे अपने आस-पास के मैग्नेटिक फील्ड की तरफ विचलित होते है। अब जिधर जितना ज़यादह इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक फील्ड होता है, उधर इलेक्ट्रान किरणे उतना ही ज्यादह विचलित होते है और जिधर कम उधर कम विचलित होते है। इस प्रकार हम इलेक्ट्रान किरणों को कण्ट्रोल करते है। 

लेकिन यँहा पर एक सवाल आता है, की आखिर Monitor को किस प्रकार की मैग्नेटिक फील्ड उत्पन करना होता है? तथा यह Monitor को कैसे मालूम चलता है? तो इसका सरल उत्तर है, की हमें Monitor को इनपुट के रूप में वीडियो सिग्नल को देना होता है, इनपुट सिग्नल सेटेलाइट डिश या CD Player से उत्पन होता है, जिसे Monitor में लगे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के दुवारा रिसीव किया जाता है तथा बाद में मदर बोर्ड यानी इलेक्रॉनिक सर्किट में लगे एम्पलीफायर दुवारा Amplify (बढाकर) उसी प्रकार का मैग्नेटिक फील्ड उत्पन्न किया जाता है, जिस प्रकार वीडियो सिग्नल Monitor को इनपुट में मिल रहा होता है। 

आपने भी अक्सर CRT Monitor पर छोटे-छोटे कीड़े जैसे झिलमिलाते  देखा होगा, यह तब होता है, जब किसी वजह से वीडियो सिग्नल नहीं मिलती है। तो इसीलिए CRT Monitor में एनालॉग सर्किट लगाया जाता है, जिसपर कई सारे कपैसिटर, इंडक्टर, रजिस्टर,डायोड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स इत्यादि लगे होते है जो इन सिग्नल को और अधिक Amplify यानी बूस्ट करते है। इस वजह CRT Monitor को एनालॉग Monitor भी कहा जाता है। और यह सिर्फ एनालॉग वीडियो सिग्नल को ही रिसीव कर सकता है तथा इस प्रकार स्क्रीन पर दिख रहे इमेज या वीडियो भी एनालॉग वीडियो होते है। 

2. CRT Monitor (Colour)

इस प्रकार के Monitor में भी कैथोड रे ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए इसे सीआरटी Monitor कहा जाता है। लेकिन यह ब्लैक एंड वाइट सीआरटी Monitor की तुलना में रंगीन वीडियो को दिखाता है। क्योंकि इसमें तीन प्रकार के अलग-अलग रंग (रेड,ग्रीन, और ब्लू) से फॉस्पोरस की कोटिंग कीया गया होता है। जिसके कारण डिस्प्ले पर रंगीन वीडियो दीखता है। बाकी का लगभग सभी कम्पनोेंट्स और कार्य-विधि सामान रहता है। 

समान्य तौर पर एक पुराने CRT Monitor में वीडियो सिग्नल रिसीव करने के लिए AV या PS2 कनेक्टर लगे होते है, लेकिन किसी-किसी एडवांस CRT Monitor में VGA केबल भी लगे होते है, जो डिजिटल सिग्नल को रिसीव करते है, और फिर उसका एनालॉग आउटपुट में यानि वीडियो को प्रदर्शित करते है। 

CRT Monitor वजन में काफी अधिक होता है, तथा इसके अलावा यह अधिक मात्रा में वोल्टेज और करंट को लेता है, जिससे की हमें लॉस ही लॉस होता है, इसके अलावा इसका वजन काफी अधिक होता है जिसके कारण इसे हम एक जगह से दूसरे जगह आसानी से नहीं ले जा सकते है। तथा इस प्रकार के Monitor में कम रसूलेशन होते है, यानी की ओवरआल कम क्वालिटी की वीडियो प्रदर्शित करता है। 

इसीलिए इन सभी कमियों को पूरा करने के लिए LCD Monitor, LED Monitor का खोज किया गया। तो आईये अब हम इनके बारे में भी जान ही लेते है की ये LCD Monitor क्या है?

3. LCD Monitor

आधुनिक युग में यह कहना गलत नहीं है की LCD Monitor ने सीआरटी की जगह ले ली है। प्रारंभ में, LCD Monitor में समय के साथ प्रदर्शन (Time Response) संबंधी समस्याएं थीं, लेकिन अंततः, उन समस्याओं का समाधान कर दिया गया। इसमें प्रकाश की मात्रा जो लिक्विड क्रिस्टल अणुओं से होकर गुजरती है, इलेक्ट्रोड पर अप्लाई की गयी विघुत-आवेश की मात्रा से निर्धारित होती है। आप इसका कार्यविधि यानि LCD Monitor काम कैसे करता है, निचे जान सकते है। 

LCD Monitor

LCD Monitors में इमेज प्रदर्शन करने के लिए पीछे की तरफ से CFL/ CCFL का इश्तेमाल किया जाता है, जिसका पूरा नाम कॉम्पैक्ट क्लोरोफ्लुरोसेंट लैंप होता है। लेकिन अब CFL की जगह LED (Light Emitting Diode) ले लिया है। धीरे-धीरे LCD Monitors में भी कई बदलाव हुए, और इन्हे और बेहतर बनाया गया, जिसके लिए इनके डिस्प्ले पैनल या इनमें सुधार करके अलग-अलग प्रकार के LCD Monitors बनाए गए है, जिनके नाम निचे दिए गए है। 

  1. TFT (Thin Film Transistor) LCD Monitor 
  2. IPS Panels
  3. TN Panels (ट्विस्टेड नेमाटिक पैनल)

4. LED Monitor

LED Monitor मूलरूप से LCD मॉनीटर्स के तरह होता है, लेकिन इसमें एक सबसे बड़ा अंतर यह की, इसमें इमेज प्रदर्शन के लिए पीछे से बैक लाइट में CFL की जगह LED का इश्तेमाल किया जाता है। LED के इश्तेमाल होने से इसका नाम LED Monitor पड़ा है, इसके अलावा इसकी कार्य विधि लगभग बराबर है। आप ऐसा समझ सकते है की यह LCD मॉनीटर्स का अपग्रेडेड मॉडल या वर्शन है। 

LED Monitor

LCD डिस्ले की तरह LED डिस्प्ले को और बेहतर से बेहतर बनाया जा रहा है और इसके और एडवांस यानि अपग्रेडेड मॉडल को बाजार में भी तेजी से लांच किया जा रहा है, उनमे कुछ मॉनीटर्स के नाम निचे दिए गए है। 

हालाँकि, सिर्फ बैक लाइट में  LED लगा देने से Monitor LED नहीं हो जाता है, इसका नाम से लोगो को Confusion हो सकता है। अब सिर्फ LED की मदद से एक इमेज या वीडियो को देखने की कोशिश की जा  रही है, जो अभी रिसर्च का विषय है। आपने लाइव टेलीकास्ट में अक्सर देख ही होगा वँहा पर LED डिप्लसे पैनल  का उपयोग किया जाता है, लेकिन उनका रसोलूशन कम होने के कारण पर्सनल इश्तेमाल के लिए नहीं किया जा सकता है।

  1. OLED (Organic LED)
  2. AMOLED (Active Matrix Organic Light Emitting Diodes)
  3. Quantum Dot or QLED

इसक प्रकार के डिस्प्ले टेक्नोलॉजी का इश्तेमाल से बैक लाइट (रोशनी) को मूलभूत रंगो में कन्वर्ट किया जाता है। और फिर उसके बाद इन मूलभूत रंगो (रेड, ग्रीन और ब्लू) से विज़ुअल को प्रदर्शित किया जाता है। 

5. Touch Screen Monitors

जैसे की इसके नाम  ही लग रहा है की यह Computer के लिए एक इनपुट और आउटपुट डिवाइस है। इस Monitor को हम अपने उंगलियों के सपर्श से ऑपरेट कर सकते है। इसमें किसी प्रकार इनपुट दे सकते है और किसी इमेज या वीडियो को आउटपुट में देख भी सकते है। इस प्रकार के Monitor का ज्यादातर इश्तेमाल इंडस्ट्री में मशीन ऑपरेटिंग के लिए किया जाता है, उसके अलावा इसका इश्तेमाल Business ऑफिस, तथा पर्सनल कार्यों के लिए भी किया जा सकता है। 

Touch Screen Monitor

6. DLP Monitors

DLP का मतलब डिजिटल लाइट प्रोसेसिंग है, जिसे टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स कंपनी के द्वारा विकसित किया गया है। यह एक ऐसी तकनीक है, जिसका उपयोग Monitor से बड़ी स्क्रीन पर इमेज या वीडियो को प्रोजेक्ट करके प्रदर्शन के लिए किया जाता है। डीएलपी विकसित करने से पहले, अधिकांश Computer प्रोजेक्शन सिस्टम ने फीकी और धुंधली विज़ुअल का उत्पादन किया क्योंकि वे एलसीडी तकनीक पर आधारित थीं।

7. Plasma Screen Monitor

प्लाज्मा स्क्रीन एक पतली, फ्लैट-पैनल है और यह एलसीडी और एलईडी टीवी जैसी दीवार पर फिट होने में सक्षम है। एलसीडी डिस्प्ले की तुलना में यह एक हाई ब्राइटनेस स्क्रीन है और सीआरटी डिस्प्ले की तुलना में पतली है। इसका उपयोग या तो डिजिटल Computer इनपुट या एनालॉग वीडियो सिग्नल के मोड प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। 


Monitor में क्या-क्या विशेषतायें होती है (फीचर्स)

किसी Monitor मे एक से अधिक विशेषताएं यानि फीचर्स होते है, जो मॉनीटर्स के कार्य करने की गति को बढ़ाने के साथ-साथ अच्छे इमेज और वीडियो प्रदर्शित करते है | एक बात दिमाग में जरूर दर्ज कर लीजिए की Monitor के Display या Screen Size को Inch या cm (Centimeter) मे मापा जाता है, जबकि किसी इमेज या वीडियो के Resolution को पिक्सेल में मापा जाता है। तथा किसी इमेज या वीडियो फाइल साइज को एमबी या जीबी में मापा जाता है। किसी इमेज में जितने अधिक संख्या में पिक्सेल होते है, उसका फाइल साइज उतना ही अधिक होता है। 

तो चलिए अब हम जानते हैं कि एक अच्छा Monitor में क्या-क्या फीचर हो सकते हैं। किसी भी Monitor या डिस्प्ले को खरीदने से पहले ये सभी फीचर्स एक बार जरूर देखना चाहिए। लेकिन एक बात ध्यान रखिए आप हमेशा वैसा Monitor की तलाश कीजिए जिसमे अधिक फीचर्स कम रुपये में मिलते है, अन्यथा किसी Monitor में जितने अधिक फीचर्स होते है, वह Monitor उतना ही महँगा और एडवांस होता है। Monitor की महत्तवपूर्ण विशेषतायें या फीचर इस प्रकार है: 

A. General Feature

1. Display Size: इसे सामान्य Inch या CM (Centimeters) में मापा जाता है। उदहारण के लिए: 32 Inch, 48 Inch, 60 Inch इत्यादि। डिस्प्ले साइज जितना बड़ा होता है, उसका कीमत उतना ही अधिक होता है। 

2. Image Size: इसे मूलरूप से पिक्सेल में मापा जाता है, लेकिन इमेज या वीडियो को Commercially Production के लिए इंच या सेंटी मीटर में भी मापा जाता है। आप ऐसे समझिए की, मानव को आसानी से समझने के लिए, इंच तथा सेंटीमीटर में मापा जाता है तथा, टेक्निकल भाषा में पिक्सेल्स का प्रयोग किया जाता है। 

3. Aspect Ratio: किसी Monitor की डिस्प्ले या इमेज के हॉरिजॉन्टल तथा वर्टिकल साइज के अनुपात को Aspect Ratio कहा जाता है। उदहारण के लिए, यदि किसी इमेज या Monitor की डिस्प्ले साइज हॉरिजॉन्टल में 1920 Px तथा वर्टिकल में 1080 Px (पिक्सेल्स) है, तो इसका मान 1.77 होता है, जोकि 16:9 का अनुपात में होता है। यदि आप ख्याल कीजियेगा, तो यूट्यूब पर फुल स्क्रीन, स्टैण्डर्ड वीडियो अपलोड का अनुपात भी 16:9 होता है, यह लैंडस्केप ओरिएंटेशन के लिए है। 

4. Screen Type/ Panel:  इससे यह मालूम चलता है, की किसी बेसिक डिस्प्ले या Monitor की तुलना में यह कितना अधिक बेहतर है, और मानव आँख के लिए और कितना आरामदायक है। मतलब किस टेक्नोलॉजी का इश्तेमाल किया गया है। उदहारण के लिए: Flat Panel, IPS, AMOLED डिस्प्ले इत्यादि। जितना अच्छा पैनल होता है उसकी कॉस्ट उतना ही जयादा होता है। 

5. Resolution: किसी Monitor का Resolution उसके Horizontal और Vertical Pixel की सख्‍या के गुणनफल के बराबर होता है। किसी Monitor में जितना अधिक रेसोलुशन होता है, उस Monitor का पिक्चर क्वालिटी उतना ही बढ़िया होता है। जैसे एक Monitor का 1080 * 720 रेसोलुशन की  तुलना में दूसरे Monitor का 1920 * 1080 रेसोलुशन अधिक बेहतर इमेज या वीडियो को प्रदर्शित करता है। रेसोलुशन को पिक्सेल्स में काउंट करते है। आपने भी अक्सर सुना होगा की इस Monitor ( 1920 * 1080) में 20 लाख से अधिक पिक्सेल्स है, तो इन पिक्सेल्स संख्या को, किसी Monitor में दिया गया रेसोलुशन को आपस में गुना करके प्राप्त किया जाता है। 

नोट कर लीजिए की किसी भी Monitor का पिक्सेल्स संख्या या रेसोलुशन उसका हार्डवेयर (ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट) पर निर्भर करता है। Graphics Card या GPU क्या होता है इसके बारे में जानने के के लिए यँहा क्लिक करें। 

6. Refresh Rate: इसका मतलब यह है की आपके Monitor पर दिख रही इमेज एक सेकंड में कितने बार रिफ्रेश हुई है। रिफ्रेश करने की यूनिट को हर्ट्ज़ में मापा जाता है। ध्यान दीजिए, हर्ट्ज़  फ्रीक्वेंसी का भी मात्रक है। जो यह बताता है, की कोई पर्टिकुलर कार्य एक सेकंड में कितना बार दुहराया गया है। 

Refresh Rate को Frame Rate, Horizontal Scan Rate और Vertical Scan Rate भी कहा जाता है। एक CRT Monitor में रिफ्रेश रेट कम होता है, यदि आप अपने आँख को बार-बार ब्लिंक करेंगे तो आपको CRT Monitor पर चल रही वीडियो झिलमिलाती नजर आएगी। लेकिन यहीं बात एक LCD या LED Monitor में नहीं होता है, क्यूंकि इनमे रिफ्रेश रेट ज्यादा होता है। 

7. Dot Pitch: किसी डिस्प्ले, Monitor, तथा स्कैनर में डॉट-पिच सबसे बेसिक और अनोखा फीचर है। डॉट पिच, किसी LCD, LED Monitor में दो पिक्सेल की बिच की दूरी होता है तथा CRT Monitor में दो सामान फॉस्फोरस डॉट के बिच की दूरी होता है। जितना कम दुरी होता है, एक्स्ट्रा पिक्सेल लगाने लिए लिए उतना ही ज्यादह जगह बच  जाता है। 

8. Pixels: यह किसी Monitor या इमेज की सबसे छोटी इकाई है। किसी डिस्पले में जितने अधिक पिक्सेल्स संख्या होते है, वह डिस्प्ले उतना ही अधिक क्वालिटी वीडियो तथा इमेज को प्रदर्शित करता है। किसी Monitor की रेसुलेशन पिक्सेसल्स पर ही निर्भर करता है और पिक्सेल्स Monitor में लगे ग्राफ़िक्स कार्ड या ग्राफिकल हार्डवेयर पर निर्भर करता है। 

pixels in Phot

पिक्सेल्स बहुत छोटे-छोटे बिंदु यानी डॉट के रूप में होते है, एक साथ मिलकर इन सभी डॉट्स के खाश अरेंजमेंट से, किसी भी इमेज या टेक्स्ट को प्रदर्शित किया जाता है। मतलब की किसी भी Screen पर दिखने वाली Image, Character या Text, Dot matrix से बने होते है। रंगीन Monitor में एक पिक्सेल तीन छोटे-छोटे पिक्सेल से मिलकर बना होता है, जिसे (RGB) Subpixel कहते है। 

9. Connection Port: कनेक्शन पोर्ट कम्युनिकेशन पोर्ट इनपुट तथा आउटपुट सिग्नल को भेजने तथा रिसीव करने  के लिए लगाया जाता है। जितना मॉडर्न Monitor होता है, उसमे उतना ही एडवांस तथा उच्च डाटा स्पीड वाला कनेक्शन पोर्ट दिए रहते है। 

निचे कुछ कॉमन कनेक्शन पोर्ट के नाम दिए गए है। मुझे विश्वास है, की यदि आप मेरे इस आर्टिकल का रेगुलर पाठक है तो आप इनमे से कुछ पोर्ट के बारे जरूर जानते होंगे। 

  1. HDMI Port (High-Definition Multimedia Interface)
  2. DVI Port (Digital Visual Interface)
  3. VGA Port (Video Graphics Array)
  4. Display Port
  5. USB
  6. Audio Out
  7. Audio In
  8. Headphone या Jack Port
  9. Other Connectivity Features:
  10. Optical Output, Mini AV, LAN, Headphones, Tuner, Bluetooth 5.0 इत्यादि। 

B. Video Features

निचे एक खाश Monitor में उपलब्ध वीडियो फीचर (वीडियो से सम्बंधित) फीचर दिया गया है। 

  1. Brightness: 400 nits
  2. Contrast Ratio: 3000:1 (Dynamic)
  3. Picture Engine: EPIC 2.0 Image Engine
  4. Analog TV Reception: Yes/ No
  5. Digital TV Reception: Yes/ No
  6. View Angle: 170 Degree, 150 Degree
  7. LED Display Type: Direct LED
  8. Refresh Rate: 60 Hz
  9. Supported Video Formats: MPEG, MPG, VOB, DAT, AVI, MP4, MOV, MKV, FLV, ASF, 3PG

C. Audio Features

निचे एक खाश Monitor में उपलब्ध वीडियो फीचर (वीडियो से सम्बंधित) फीचर दिया गया है। आप इनमे से अपने लिए अपने हिसाब से अलग-अलग फीचर्स के चुनाव कर सकते है। लेकिन याद रखिये जितना अधिक फीचर का चुनाव करेंगे, वास् Monitor उतना ही महंगा हो सकता है। 

  1. Number of Speakers: 1, 2
  2. Number of Subwoofers: 1, 2,4
  3. Speaker Type: Box Speakers
  4. Sound Technology: Dolby Audio, Stereo 
  5. Surround Sound: Dolby Audio
  6. Speaker Output RMS: 20 W, 10 W, 15 W
  7. Supported Audio Formats: MP3, M4A, WAV, RM, AC3, FLAC, OGG, AAC

D. Remote Control Features

  1. IR Remote: Yes/ NO
  2. Bluetooth Remote: Yes/ No
  3. Wi Fi (Smart Phone): Yes/ No

E. Power Features

  1. AC Supported: (100 – 300) V
  2. Power Consumption: 0.45 W, 0.23 W (Standby)
  3. DC Supported: Yes/ No

F. Additional Features

  1. Eye Care Technology:  Yes/ No
  2. Service Warranty: 1 Years, 2 Years, 3 Years.

LCD Monitor कैसे कार्य करता है? तथा (इसके मुख्य कंपोनेंट्स)

LCD का पूरा नाम Liquid Crystal Display होता है। इसमें Backlight के लिए CCFL कोल्ड क्लोरो फ्लुरोसेंट लैंप का इश्तेमाल किया जाता है। अलग-अलग प्रकार के Monitor के अलग-अलग कार्य विधि होते है और अलग-अलग कंपोनेंट्स यानी पार्ट्स लगे होते है। इस सेक्शन में हम एक LCD Monitor कैसे कार्य करता है और इसके मुख्य पार्ट्स के नाम क्या है, इसके बारे में जानेगे। 

आगे पढ़ने से पहले यह बात जरूर पता होना चाहिए की Monitor में हम जितने भी इमेज या वीडियो को डिस्प्ले पर देखते है वे सभी प्रकाश-रंगों से मिलकर बने होते है और सभी प्रकाश-रंग मिलियन्स ऑफ़ Pexels से मिलकर बने होते हैं। एक Pexels (पिक्सेल्स) में तीन कलर (RGB) मौजूद रहते हैं जिसको रेड, ग्रीन और ब्लू कलर कहते हैं। फिर इन्हीं तीन कलर से मिलकर मिलियंस ऑफ कलर बनते हैं। तो जाहिर है की जितने अधिक पिसेक्सल होते है उतना है अधिक कलर बनते है यानि प्रकाश रंग (Light Color) बनते है जिसके फलस्वरूप हमें वास्तविक इमेज या वीडियो देखने को मिलता है। 

यह बात तय है की, एक डिस्प्ले में जितना अधिक Pixels होंगे वह डिस्प्ले उतना ही अच्छा और वास्तविक इमेज को प्रदर्शित कर पाएगा।  एक हाई रेजोल्यूशन (HD) इमेज में हमेशा Pixels (पिक्सेल्स) की संख्या अधिक होते है। हालांकि इमेज की क्वालिटी (पिक्सेल्स) की संख्या के अलावा GPU, या Sensor (Hardware) का प्रकार और पिक्सेल्स का साइज पर भी निर्भर करता है। आइये अब हम LCD Monitor काम कैसे करता है, इसके बारे जानते है लेकिन उससे पहले इसके पार्ट्स के बारे में जानना जरूरी है। 

LCD Monitor के पार्ट्स के नाम 

1. Backlight (CCFL):

LCD डिस्प्ले में बैक लाइट कोल्ड कैथोड फ्लुरोसेंट लैम्प का इश्तेमाल किया जाता है, जिसे शार्ट में CCFL कहते है। 

2. Polarised Filter:

डिस्प्ले में इसका काम इधर-उधरबिखरी हुई  (Unpolarized) लाइट को फ़िल्टर कर एक ही एक्सिस में पास कराना होता है, जिसे हम प्रकाश का ध्रुवीकरण कहते है। यह दो प्रकार का होता है 

  1. Verticle Polarized Filter
  2. Horizontal Polarised Filter

Vertical Polarised Filter लाइट वेव को सिर्फ वर्टिकल और Horizontal Polarised Filter, सिर्फ होरिजेंटल Light Wave को आगे की तरफ पास कराता है। 

3. TFT Glass (Thin Film Transistor): 

यह एक ट्रांसपेरेंट ग्लास होता है, जिसपर लाखों ट्रांसिस्टर्स लगे होते है। यँहा ट्रांसिस्टर्स का काम डिस्प्ले में लगे लिक्विड क्रिस्टल पर इलेक्ट्रिकल पोटेंशियल अप्लाई करना होता है। जिससे की लिक्विड क्रिस्टल के मॉलिक्यूल इलेक्ट्रिक पोटेंशियल के दिशा में अलाइन होते है, जिसके फलस्वरूप लाइट आगे की तरफ पास हो जाती है। 

4. Colour Filter:

 इसका मुख्य काम कलर को फ़िल्टर करना होता है, लिक्विड क्रिस्टल से लाइट जिस प्रकार निकलती है, उसी प्रकार कलर फ़िल्टर सब -पिक्सेल को ऑन यानि एक्टिव करता है। 

5. LC (Liquid Crystal): 

यह एक प्रकार का मटेरियल है। सामान्य रूप में मटेरियल की चार अवस्थाएँ होती है: 1. सॉलिड, लिक्विड, गैस और प्लाज्मा। लेकिन लिक्विड क्रिस्टल सॉलिड और लिक्विड दोनों के बिच का अवस्था होता है। इसके मॉलिक्यूल का अरेंजमेंट, क्रिस्टल यानि सॉलिड की तरह ही होता है। लेकिन इनके मॉलिक्यूल 90 डिग्री तक मूड सकते है। 

इस वजह से Liquid Crystal का मुख्य कार्य किसी Voltage पर खाश समय में लाइट को आगे की तरफ पास कराना होता है। और यह कार्य इसमें उपस्थित मॉलिक्यूल करते है। जब इसपर इलेक्ट्रिकल पोटेंशियल अप्लाई किया जाता है तो इसके मॉलिक्यूल अलाइन होकर 90 डिग्री तक मूड सकते है। इसीलिए इसे ट्विस्टेड नुमातिक भी कहा जाता है। 


LCD Monitor काम कैसे करता है? 

lcd monitor kaise kaam karta hai
  1. जैसे ही हम डिस्प्ले को ऑन करते है, तो लाइट सबसे पहले CCFL से एमिट होती है यानि निकलती है और सबसे पहले Vertical Polarised Filter (पोलरिज़्ड फ़िल्टर) में प्रवेश करती है। Polarized फ़िल्टर लाइट को एक ही एक्सिस (Vertical or Horizontal) में पास कराता है। यँहा डिस्प्ले को लाइट देने का काम CCFL करता है जिसका पूरा नाम, कोल्ड कैथोड फ्लुरोसेंट लैम्प होता है। 
  2. जैसे कि मैंने पहले ही बता दिया है Polarised Filter दो प्रकार का होता है एक Vertical और दूसरा Horizontal Polarised Filter.  Vertical Polarised Filter लाइट वेव को सिर्फ वर्टिकल और Horizontal Polarised Filter, सिर्फ होरिजेंटल Light Wave को आगे की तरफ पास कराता है। 
  3. उसके बाद फ़िल्टर की हुई लाइट TFT (Thin Film Transistor) Glass में जाती है। जँहा पर हरेक पिक्सेल्स के लिए ट्रांजिस्टर लगे होते है। यंही पर लाइट की ब्राइटनेस या कॉन्ट्रास्ट को कण्ट्रोल किया जाता है। 
  4. उसके बाद लाइट LC (लिक्विड क्रिस्टल ) में जाती है। लिक्विड क्रिस्टल एक ऐसा मटेरियल है, जो सॉलिड और लिक्विड के बिच का अवस्था होता है, इसके मॉलिक्यूल ट्विस्टेड नुमाटिक यानी 90 डिग्री तक मुड़ सकते है, जब इसपर इलेक्ट्रिकल सिग्नल के दुवारा इलेक्ट्रिक पोटेंशियल अप्लाई किया जाता है। उसके बाद फिर यह किसी खाश एक्सिस पर आ रही लाइट को आगे की तरफ पास करता है, जो Colour Filter में उपस्थित  Sub Pixel को ऑन करता है। लाइट जिस प्रकार लिक्विड क्रिस्टल से निकलती है, उसी प्रकार पिक्सेल ऑन यानी एक्टिव होते है। यँहा Sub Pixel का मतलब कोई एक कलर रेड, ग्रीन या ब्लू होता है। 
  5. उसके बाद लाइट कलर फ़िल्टर से निकलकर हॉरिजॉन्टल पोलरिज़्ड फ़िल्टर में जाती है, और पुनः एक नार्मल ग्लॉस में प्रवेश करती है, जो डिस्प्ले में सबसे बाहर होता है। तो इस तरह हम डिस्प्ले में प्रकाश रंगो को कण्ट्रोल करके किसी भी इमेज को देखते है।

एक बात ध्यान दीजिए की डिस्प्ले में सबसे महतवपूर्ण पार्ट TFT Glass का होता है। TFT Glass पर इलेक्ट्रिक पोटेंशियल अप्लाई करके, डिस्प्ले में अलग-अलग इमेज या कलर को देखा जाता है। इसीलिए डिस्प्ले में लगा मदरबोर्ड जिस प्रकार का इलेक्ट्रिक सिग्नल भेजता है, डिस्प्ले उस सिग्नल को रिसीव कर, उसी प्रकार का इमेज को दिखाता है। 


LCD और LED Monitor के बीच क्या अंतर है?

वैसे तो LCD और LED Monitor के बीच में ज्यादा अंतर नहीं है बनावट में लगभग यह दोनों समान होते हैं लेकिन इनमे दिए दये फीचर के आधार पर दोनों में अंतर किया जा सकता है। जैसे एलसीडी Monitor में ऊर्जा की खपत ज्यादा होती है जबकि एलईडी Monitor में ऊर्जा की खपत कम होती है। तो आइये निचे दिए गए टेबल में अलग-अलग फीचर्स या टर्म्स के आधार पर दोनों में अंतर को समझते हैं। 

Terms/ फीचर्स
 
LCD MonitorLED Monitor
Full Form इसका पूरा नाम लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले है।इसका पूरा नाम लाइट एमिटिंग डायोड है। 
Technologyयह एक CRT की तुलना में एक नई टेक्नोलॉजी पर विकसित है।  यह LCD Monitor का टेक्नोलॉजी इश्तेमाल करता है। इनमे बैक लाइट में अंतर होता है। 
Backlightयह मुख्य रूप से फ्लोरोसेंट लैंप का उपयोग करता है। यह LED (लाइट एमिटिंग डायोड) का उपयोग करता है। 
Energyएल ई डी की तुलना में एलसीडी ज्यादा ऊर्जा की खपत करता हैं और यह आकार में मोटा भी होता है। जिससे इसका वजन अधिक होता है। एल ई डी अधिक ऊर्जा की बचत करता है और यह एलसीडी की तुलना में आकार में बहुत पतला होता है। जिससे इसका वजन कम होता है। 
Resolutionइसका रेजोल्यूशन कम है।इसका रेजोल्यूशन अधिक होता है।
Contrast Ratioइसका कंट्रास्ट अनुपात ज्यादा है।
इसका कंट्रास्ट अनुपात कम होता है। 
Switching TimeLCD का स्विचिंग समय धीमा  यानी कम होता हैLED Monitor का स्विचिंग समय तेज होता है। 
Display AreaLCD Monitor में डिस्प्ले क्षेत्र बड़ा होता है। LED Monitor में डिस्प्ले क्षेत्र कम होता है। 

Monitor और TV (टेलीविज़न) में क्या अंतर है?

टीवी और Monitor में ओवरऑल बनावट के बेसिस पर उतना ज्यादा अंतर नहीं होता है लेकिन हम इनमें दिए गए फीचर के आधार पर दोनों में अंतर कर सकते हैं किसी-किसी फीचर के मामले में टीवी हमारे लिए सबसे अच्छा ऑप्शन होता है जबकि किसी किसी के मामले में Monitor खरीदने का ऑप्शन सही होता है। तो आइए नीचे दिए गए टेबल में फीचर के आधार पर हम Monitor और टेलीविजन में अंतर को समझते हैं। 

फीचर्सMonitorTV (टेलीविजन)
Screen Sizeजब भी स्क्रीन साइज के बात आता है तो लोग हमेशा बड़ा Screen Size लेने की कोशिश करते हैं। नॉर्मली एक बड़ा साइज का Monitor कम खर्च में मिल जाता है। जबकि उसी साइज का टीवी लेने के लिए आपको जायदा रूपये खर्च करने पड़ सकते है। हलाँकि स्क्रीन साइज के अलावा रेसोलुशन, पिक्सेल्स आदि भी निर्भर करता है। 
Connection Portइसमें मल्टीप्ल इनपुट-आउटपुट कनेक्शन पोर्ट दिए जाते है। जैसे: VGA Port, HDMI Port, PS2 Port, इत्यादि। क्यूंकि Monitor को गेमिंग, वीडियो प्रोडक्शन  कामों  भी इश्तेमाल किया जाता। है जबकि इसमें मल्टीप्ल इनपुट-आउटपुट कनेक्शन पोर्ट नहीं मिलते है, जब तक की आप एक महँगे टीवी को नहीं खरीदते है। क्यूंकि टीवी सिर्फ मनोरंजन यानि कॉमन विसुअल देखने के लिए इश्तेमाल किया जाता है। 
Screen ResolutionMonitor में पिक्सेल्स की संख्या अधिक होते है जो सामन्य: 21:9 and 32:9 Aspect Ratios के साथ QHD में 2560×1440 pixels होते है। जबकि एक सामान्य टीवी में पिक्सेल्स की संख्या कम होते है, जैसे: CRT टीवी (कैथोड रे ट्यूब) हालाँकि बाजार में अभी के समय में LED, LCD TV, UHD, तथा 4K, Screen Resolution तक मिलते है।  
HDR (High Dynamic Range)यह HDR (हाई डायनामिक रेंज) को अच्छे से सपोर्ट नहीं करता है। इसमें ब्राइटनेस तथा वाइब्रेंट कलर नहीं देखने को मिलते है, इसलिए इसे दूर से नहीं देखा जाता है। चूँकि  इसे बनाया ही इसी काम  के लिए गया है, की हम इसके बिलकुल नजदीक रहकर काम  सके।  जबकि यदि आप एक HD, UHD, तथा 4K टीवी खरीदते है तो उसमे HDR का सपोर्ट मिलता है, जिससे की आप दूर रहकर भी विसुअल को देख सकते है और मनोरंजन का आनंद ले सकते है। हालाँकि इसके लिए हार्डवेयर यानि GPU भी जिम्मेदार होता है। आप हमारे इस आर्टिकल में GPU के बारे में और अधिक जानकारी ले सकते है। 
Applicationयह बात तो आपको भी पता होगा की Monitor का इश्तेमाल Computer साथ किया जाता है। Monitor Computer का एक आउटपुट फिजिकल डिवाइस है। जबकि टीवी का इश्तेमाल सैटेलाइट डिश या सेटअप बॉक्स के साथ किया जाता है, और यह वीडियो सिग्नल को रिसीव कर उसका ऑउटपुर डिस्प्ले पर प्रदर्शित करता है। 
Useइसका इश्तेमाल ज्यादातर अध्ययन, रिसर्च के लिए किया जाता है। तथा ऑफिस और कार्यालओं में इसका इश्तेमाल ऑफिस कार्यो को पूरा करने के लिए भी किया जाता है। जबकि इसका इश्तेमाल मनोरंजन के लिए किया जाता है। अब तो ऐसे भी टीवी मार्किट में मिलते है  ,जिसमे आप मनोरंजन के साथ-साथ यूट्यूब वीडियोस भी देख सकते।

Monitor Connector के प्रकार

Monitor में डाटा कम्युनिकेशन के उद्देश्य से इश्तेमाल किये जाने वाले कनेक्टर या पोर्ट के प्रकार निचे दिया गया है। इस प्रकार के कनेक्टर को केन्नेक्शन या कम्युनिकेशन पोर्ट भी कहा जाता है। 

  1. HDMI Port (High-Definition Multimedia Interface)
  2. DVI Port (Digital Visual Interface)
  3. VGA Port (Video Graphics Array)
  4. Display Port
  5. USB Port (Universal Serial Bus)
  6. USB-C Type Port
  7. Thunderbolt

Monitor से सम्बंधित आपके सवाल और हमारे जवाब:

1. सबसे पहले Monitor कब बना था?

Uniscope 300 मशीन के लगभग 10 वर्ष के बाद 1 मार्च 1973 को ज़ेरॉक्स ऑल्टो Computer पेश किया गया, जिसमें पहला Computer Monitor था। इस मॉनीटर में एक मोनोक्रोम डिस्प्ले और सीआरटी तकनीक शामिल किया गया था। 

2. Monitors कितने प्रकार का होते है?

मॉनीटर्स अनेकों प्रकार  है, सभी के नाम बताना तो संभव नहीं है, कुछ प्रसिद्ध मॉनीटर्स के नाम निचे दिए गए है। 
CRT Monitor (Colour & Monochrom)
LCD Monitor (Liquid Crystal Display)
TFT (Thin Film Transistor) LCD Monitor 
IPS Panels (in-plane switching)
TN Panels (ट्विस्टेड नेमाटिक पैनल)
LED Monitor (Light Emitting Diode)
OLED (Organic LED)
AMOLED (Active Matrix Organic Light Emitting Diodes)
Quantum Dot or QLED
Touch Screen Monitors
DLP Monitors (Digital Light Projecting) तथा
Plasma Screen Monitors इत्यादि। 

3. Monitor के कुछ कॉमन फीचर के नाम बताएं 

Monitor में कॉमन फीचर के नाम निचे दिए गए है। 
Display Size
Aspect Ratio:
Screen Type/ Panel
Resolution
Resolution
Refresh Rate
Dot Pitch
Pixels No.
Connection Port इत्यादि कॉमन फीचर है। जितना अधिक फीचर्स होते है, उतना ही अधिक दाम होते है। 

4. Monitor में Aspect Ratio का मतलब क्या है?

किसी Monitor की डिस्प्ले या इमेज के हॉरिजॉन्टल तथा वर्टिकल साइज के अनुपात को Aspect Ratio कहा जाता है। उदहारण के लिए, यदि किसी इमेज या Monitor की डिस्प्ले साइज हॉरिजॉन्टल में 1920 Px तथा वर्टिकल में 1080 Px (पिक्सेल्स) है, तो इसका मान 1.77 होता है, जोकि 16:9 का अनुपात में होता है।

5. Monitor में Resolution का मतलब क्या है?

किसी Monitor का Resolution उसके Horizontal और Vertical Pixel की सख्‍या के गुणनफल के बराबर होता है। किसी Monitor में जितना अधिक रेसोलुशन होता है, उस Monitor का पिक्चर क्वालिटी उतना ही बढ़िया होता है।

6. Monitor में Refresh Rate का मतलब क्या है?

इसका मतलब यह है की आपके Monitor पर दिख रही इमेज एक सेकंड में कितने बार रिफ्रेश हुई है। रिफ्रेश करने की यूनिट को हर्ट्ज़ में मापा जाता है। ध्यान दीजिए, हर्ट्ज़  फ्रीक्वेंसी का भी मात्रक है। 

7. Pixels क्या होता है?

यह किसी Monitor या इमेज की सबसे छोटी इकाई है। किसी इमेज में जितने अधिक पिक्सेल्स संख्या होते है, वह इमेज उतना ही अधिक क्वालिटी वाला होता है। पिक्सेल्स Monitor में लगे ग्राफ़िक्स कार्ड या ग्राफिकल प्रोसेसिंग यूनिट पर निर्भर करता है। 

8. LCD तथा LED Monitor में क्या अंतर है?

LED तथा LCD Monitor के बीच में ज्यादा अंतर नहीं है बनावट में लगभग यह दोनों समान होते हैं। फर्क यह है की, LED Monitor में Backlight के लिए LED  (Light Emitting Diode) का इश्तेमाल किया जाता है, जबकि LCD Monitor में Backlight के लिए CFL/ CCFL () का इश्तेमाल किया जाता है। 

9. Monitor और TV (टेलीविज़न) में क्या अंतर है?

टीवी और Monitor में ओवरऑल बनावट के बेसिस पर ज्यादा अंतर नहीं होता है लेकिन हम इनमें दिए गए फीचर के आधार पर दोनों में अंतर कर सकते हैं किसी-किसी फीचर के मामले में टीवी हमारे लिए सबसे अच्छा ऑप्शन होता है जबकि किसी-किसी के मामले में Monitor खरीदने का ऑप्शन सही होता है। इनमे डिटेल अंतर आप ऊपर जान सकते है।

10. OLED मॉनिटर क्या है? और यह LED से कैसे बेहतर है?

OLED मॉनिटर का पूरा नाम Organic Light Emitting Diode होता है। यह LED मॉनिटर से इसलिए बेहतर है क्यूंकि इसमें आर्गेनिक मटेरियल का इश्तेमाल किया जाता है। जिससे ब्लैक कलर के लिए बिना ब्लैक कलर को उप्तन्न किये हुए यह सीधे पिक्सेल्स को ऑफ कर देता है। जिससे जंहा हमें ब्लैक कलर की जरूरत पड़ती है, तो वह पर वास्तविक ब्लैक कलर मिल जाता है। जिसके फलसवरूप हमें काफी वास्तविक तथा उच्च कंट्रास्ट इमेज देखने को मिलता है।


निष्कर्ष:

आज आपने इस आर्टिकल में कम्प्यूटर Monitor से सम्बंधित महत्वपूर्ण ज्ञान को अर्जित किया। आपने एक-एक कर लगभग Monitor से सम्बंधित सभी टॉपिक को समझा। आपने सबसे पहले जाना की, Monitor क्या होता है? 

Monitor Computer का एक आउटपुट डिवाइस होता है। Monitor सीपीयू के द्वारा भेजा गया ग्रफिकल या विजुअल सिग्नल को रिसीव कर उसे फोटो और वीडियो के रूप में दिखाने का कार्य करता है। 

आपने फिर जाना की Monitor का मुख्य कार्य क्या है? Monitor का मुख्य कार्य Computer से आ रही इलेक्ट्रॉनिक विसुअल सिग्नल को रिसीव करना और फिर उसे कन्वर्ट कर, स्क्रीन पर वैसे विजुअल को दिखाना जिसको आप आसानी से देख कर समझ सकते हैं। आपने फिर जाना की Monitors अनेकों प्रकार के होते है? जिनमे से CRT Monitor, LCD Monitor, LED Monitor, Plasma Screen Monitors तथा DLP Monitor प्रसिद्ध है। 

आपने फिर Monitor में दिए जाने वाले फीचर्स के बारे में जाना जैसे: Display Size, Pixels, Resolution, Refresh Rate, Image Size, Aspect Ratio, Screen Type/ Panel, Resolution इत्यादि Monitor के जेनेरल यानि समान्य फीचर के अंतर्गत आते है। तथा इन सभी फीचर्स के अलावा Video Feature, Audio Features, Remote Control Features, Power Features और Eye Care Protection फीचर भी दिए जाते। है। लेकिन ध्यान दीजिये जितना अधिक फीचर होता है, उसका दाम उतना ही अधिक होता है। 

फिर हमने जान की LCD Monitor कैसे कार्य करता है? तथा इसके मुख्य कंपोनेंट्स में Backlight (CCFL), Polarised Filter, TFT Glass (Thin Film Transistor), Colour Filter, और LC (Liquid Crystal) के नाम शामिल है। हमने फिर जाना की टीवी और Monitor में क्या अंतर है? और अंत में फिर हमने  LCD और LED Monitor के बीच अलग-अलग फीचर के आधार पर दोनों में अंतर को समझा जैसे: की LCD Monitor ज्यादा एनर्जी की खपत करती है जबकि LED Monitor कम ऊर्जा की खपत करती है। मैं उम्मीद करता हूँ, की आपको यह आर्टिकल बहुत ही इंफॉर्मेटिव लगी होगी। अगर आपको किसी तरह सुझाव, या शिकायत हो तो निचे कमेंट जरूर कीजिए हम आपके कमेंट का रिप्लाई जरूर देंगे। 

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मुझे टेक्नोलॉजी के बारे में पढ़ना और लिखना बहुत अच्छा लगता है। इंटरनेट टेक्नोलॉजी के बारे में लोगों के साथ जानकारी शेयर करके मुझे खुशी महसूस होती है। इसके अलावा फोटोग्राफी करना मेरी हॉबी है। मैंने एक इंजीनियर के रूप में शिक्षा ली है और पेशे से अब मैं एक पार्ट-टाइम Professional Blogger हूँ।

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