🤔What is Network in Hindi: LAN, MAN, WAN नेटवर्क क्या है (सम्पूर्ण जानकारी)

Network यानी Internet हम सभी के लिए कितना इंपॉर्टेंट है यह बताने की जरूरत नहीं। आजकल हर व्यक्ति Internet पर किसी-न-किसी Computer Network से जुड़ा है। Computer Network या Internet एक जाल के समान है जिसका विस्तार बहुत बड़ा है। आप Computer Network पर जुड़ कर अपने या किसी भी देश या समूह के लोगों से बातचीत कर सकते हैं दूसरे लोगों की जानकारियों और अपनी जानकारियों को भी दूसरों लोगों के साथ आदान प्रदान कर सकते हैं।

network kya hai

Computer Network के माध्यम से आप एक साथ मिलकर कार्य कर सकते हैं किसी कठिन समस्या को हल कर सकते हैं। इस दौर में इंटरनेट का सही इस्तेमाल से आप किसी भी जानकारी को हासिल कर सकते हैं और किसी भी सेवा का लाभ ले सकते हैं। आप इस आर्टिकल में Computer Network के बारे में जानेंगे।

सबसे पहले 1965 में लॉरेंस रॉबर्ट्स ने अलग-अलग जगहों पर दो अलग-अलग कंप्यूटरों को पहली बार एक-दूसरे से जोड़ कर संचार स्थापित किया। फिर ARPANET कंपनी ने लगभग 1960 से 1970 के दशक बड़े पैमाने पर पैकेट स्विचिंग तकनीक का इश्तेमाल करके Computer Network को बनाया जिसे US मिलिट्री और रिसर्च संस्थानों में इश्तेमाल किया जाता था। ARPANET का पूरा नाम  Advanced Research Project Agency Network है। फिर TCP/IP की शुरुआत के बाद, ARPANET तेजी से नेटवर्कों का एक ग्लोबल समूह यानि इंटरनेट बन गया। 

इस आर्टिकल में आप कंप्यूटर नेटवर्क से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को हासिल करेंगे। जैसे कि नेटवर्क क्या है? नेटवर्क के उपकरण कौन-कौन से हैं? उदाहरण के लिए राउटर क्या होता है? हब क्या होता है? स्विच क्या होता है? और मॉडेम  क्या होता है? इत्यादि। इसके अलावा आप नेटवर्क के विभिन्न प्रकार के बारे में जानेंगे। वैसे तो नेटवर्क के बहुत प्रकार हैं पर मैंने आपको LAN (Local Area Network), MAN (Metropolitan Area Network), WAM (Wide  Area Network), PAN, CAN इत्यादि के बारे में सरल भाषा में समझाया है। आप एक अच्छा नेटवर्क के मुख्य घटक और कंप्यूटर नेटवर्क के क्या-क्या लाभ हैं इसके बारे में भी जानकारी हासिल करेंगे अंत में आप कंप्यूटर नेटवर्क से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर जानेंगे। तो आइये शुरू करते है, और सबसे पहले, नेटवर्क क्या है? समझते हैं।

नेटवर्क क्या है?

दो या दो से अधिक Computers को एक साथ इस तरह जोड़े कि उनके बीच में इंफॉर्मेशन का आदान प्रदान किया जा सके, जिसे Computer Network या सिर्फ नेटवर्क कहते है, और जुड़ने की इस प्रक्रिया या तकनीक को नेटवर्किंग कहते हैं।

हमें दो या दो से अधिक कंप्यूटर को किसी न किसी माध्यम से जोड़ना पड़ता है और माध्यम Wired (वायर्ड) और Wireless (वायरलेस) दो प्रकार के हो सकते हैं। Wired का मतलब है की दो कंप्यूटर को जोड़ने के लिए फिजिकल तार का उपयोग किया जाता है। जबकि वायरलेस यानि बेतार का मतलब है कि दो कंप्यूटर को जोड़ने के लिए किसी भी फिजिकल तार का उपयोग नहीं किया जाता अर्थात वे किसी खाश प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल जैसे कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगे जिसे रेडियो तरंग भी कहते है, की मदद से जुड़े होते है।

दो या दो से अधिक कम्प्यूटर्स के बीच में डाटा शेयर करने के लिए Wire Medium में Ethernet Cable, twisted pair cable, Coaxial cable और Fiber Optics Cable में से किसी का भी इस्तेमाल कर सकते है। जबकि Wireless Medium की बात करें तो Electromagnetic wave यानि Radio Wave, Bluetooth, WiFi, Infrared, Satellite में से किसी का भी इस्तेमाल कर सकते है। 

सफलता पूर्वक नेटवर्क स्थापित करने के लिए हमें कुछ जरूरी चीजों को शामिल करना आवश्यक है तभी एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर के बीच में नेटवर्क स्थापित किया जा सकता है। दो कंप्यूटरो के बीच में सफलता पूर्वक नेटवर्क स्थापित करने के लिए कम से कम 3 चीजों या डिवाइसेज का होना आवश्यक है। जिनमें से पहला ट्रांसमीटर, दूसरा रिसीवर और तीसरा कोई मीडियम यानि माध्यम है। यहां हम ट्रांसमीटर को प्रेषक यानी मैसेज भेजने वाला और रिसीवर को प्राप्तकर्ता यानी मैसेज प्राप्त करने वाला भी बोलते हैं। इन 3 चीजों के अलावा हमें कम्युनिकेशन प्रोटोकोल की भी जरूरत पड़ता है। 

कम्युनिकेशन प्रोटोकोल एक सेट ऑफ़ रूल्स होता है जिसकी मदद से दो डिवाइसेज में किसी खास प्रकार का कम्युनिकेशन डेवेलप हो पाता है। अलग-अलग प्रकार की कम्युनिकेशन करने के लिए अलग-अलग प्रकार की कम्युनिकेशन प्रोटोकोल बनाए जाते हैं ताकि कम्युनिकेशन के दौरान किसी भी प्रकार का सिक्योरिटी से संबंधित या अन्य कोई दिक्कत ना हो सके। जैसे कि http, https एक प्रकार की कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल है जो वेब ब्राउज़र और वेब सर्वर के लिए बनी है। 

अलग-अलग उद्देश्य के लिए हमें एक जगह से दूसरे जगह के बीच के कम्प्यूटर्स, यानी अलग-अलग कई सारे कंप्यूटरस को आपस में जोड़ते हैं जिससे कि कंप्यूटरस का एक जाल बन जाता है जिसे हम कंप्यूटरस नेटवर्क या (इंटरनेट) कहते हैं और इस तरह के नेटवर्क क्रिएट करने की तकनीक को कंप्यूटरस नेटवर्किंग भी कहते हैं। कंप्यूटर नेटवर्किंग की मदद से हम उपकरणों, प्रोग्रामों, संदेशों और सूचनाओं को एक ही जगह पर रह कर दूसरे लोगों के साथ भागीदारी कर सकते हैं जिससे कि हमें कई सारे फायदे होते हैं जिनमें से एक समय का बचना और दूसरा एक जगह से बैठे अन्य जगहों की सारी गतिविधियों पर नजर रख पाना बहुत बड़ा फायदा है। आइए अब हम नेटवर्क उपकरण के कुछ उदाहरणों को देखते हैं और उनके बारे में बेसिक जानकारीयां हासिल करते हैं।

नेटवर्क उपकरण के उदाहरण

हम अपने आसपास अक्सर कई सारे नेटवर्क उपकरण को देखते हैं कुछ हमारे घरों या कार्यालय में होते हैं तो कुछ के बारे में हमने सिर्फ नाम सुना होगा। यह सभी नेटवर्कस उपकरण दो या दो से अधिक कंप्यूटर्स के बीच में नेटवर्क स्थापित करने में बहुत मदद करते है इसके अलावा ये नेटवर्क को और सिक्योर और नेटवर्क-सिगनल स्ट्रेंथ को और भी मजबूत बनाते है ताकि भविष्य में हमें किसी भी प्रकार की दिक्कत ना हो। तो आइए कुछ ऐसे ही नेटवर्क उपकरण के बारे में बेसिक जानकारीयां हासिल करते हैं  जिनको अक्सर हम अपने घरों या फिर ऑफिस में देखते या सुनते हैं। 

Router, Hub, Switch, ब्रिज क्या है

Router (राऊटर) क्या होता है?

राऊटर एक प्रकार का नेटवर्क डिवाइस है, जो दो या दो से अधिक कंप्यूटर के बीच में नेटवर्क की रूट (Route) को कंट्रोल करता है। जैसे- रोड पर गाड़ियों को नियंत्रित करने के लिए जो काम ट्रैफिक पुलिस करती है सेम वही काम नेटवर्क कंट्रोल करने के लिए राउटर करता है।

राउटर एक लोकल नेटवर्क को अलग-अलग नेटवर्क में डिवाइड करता है जिससे कि आप एक ही डिवाइस से अलग-अलग डिवाइसेज में एक्सेस कर सकते हैं आपके फोन में हॉटस्पॉट एक राउटर के सामान है आप हॉटस्पॉट के माध्यम से मल्टीपल डिवाइसेज में इंटरनेट एक्सेस करते हैं तो राऊटर मल्टीपल इंटरनेट ट्रैफिक को कंट्रोल करता है। Router क्या होता है इसके बारे मे विस्तार से आप यहा पढ़ सकते है।

HUB (हब) क्या होता है?

चूँकि कंप्यूटर नेटवर्क के अलग-अलग लेयर होते है, जिनमें से फिजिकल लेयर भी एक शामिल है। हब फिजिकल लेयर मैं काम आता है। यह डाटा के किसी एक पैकेट को बिना कोई बदलाव किए एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में आगे भेजने के काम आता है जिसे डाटा पैकेट फॉर्वडिंग बोल सकते है। आमतोर पे जिस Network में Twisted pair केबल का इस्तेमाल होता है उस डिवाइस में प्रयोग की जाती है। पहले की जो मॉडेम आती थी उनमें फिजिकल लेयर के लिए हब का इस्तेमाल किया जाता था आजकल आपको हब देखने को कम ही मिलते होंगे क्यूंकि यह नेटवर्क कार्ड के साथ अटैच होती है।

Switch (स्विच) क्या होता है?

चूँकि कंप्यूटर नेटवर्क के अलग-अलग लेयर होते है, जिनमें से फिजिकल लेयर भी एक शामिल है। हब फिजिकल लेयर मैं काम आता है। यह डाटा के किसी एक पैकेट को बिना कोई बदलाव किए एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में आगे भेजने के काम आता है जिसे डाटा पैकेट फॉर्वडिंग बोल सकते है। आमतोर पर जिस Network में Twisted pair केबल का इस्तेमाल होता है उस डिवाइस में प्रयोग की जाती है। पहले की जो मॉडेम आती थी उनमें फिजिकल लेयर के लिए हब का इस्तेमाल किया जाता था आजकल आपको हब देखने को कम ही मिलते होंगे क्यूंकि यह नेटवर्क कार्ड के साथ अटैच होती है। 

Switch भी एक प्रकार का नेटवर्क डिवाइस है। जो हब के जैसा ही Physical Layer पर  काम करता है। लेकिन Switch हब से ज्यादा Intelligent है, HUB बस Data Packet को forward करता है लेकिन Switch Forwarding के साथ साथ Filter भी करता है, इसलिए इसको Intelligent बोला जाता है। यह नेटवर्क पर डेटा पैकेट प्राप्त करने, संग्रहीत करने और फॉर्वडिंग के लिए पैकेट स्विचिंग तकनीक का उपयोग करता है।

स्विच एक मल्टीपोर्ट ब्रिज भी है जिसे डाटा लिंक लेयर डिवाइस भी कहा जाता है। स्विच डेटा को भेजने से पहले गलतियों को जाँच करता है, और गुण इसे बहुत कुशल बनाता है क्योंकि यह उन पैकेटों को नहीं भेजता है जिनमें त्रुटियाँ हैं और केवल अच्छे पैकेटों को सही पोर्ट के दुवारा आगे भजता है। ध्यान रखिए स्वीच का मतलब डाटा को ऑन और ऑफ करना नहीं है। 

Modem (मॉडेम) क्या होता है? 

मॉडेम दो शब्दों से मिलकर बना है पहला modulate और दूसरा demodulate जिसका अर्थ है electronic signal (इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल) के गुणों जैसे: फ्रीक्वेंसी, आयाम, कला आदि को इस प्रकार बदलना जिससे की सक्सेसफुली नेटवर्क स्थापित करने में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न ना हो। आप में से कुछ लोगों ने पहले के समय में इंटरनेट चलाने के लिए Modem का इस्तेमाल तो किया होगा तो आपको यह बात जरूर पता होना चाहिए की Modem के बिना इंटरनेट चलाना या दो कम्प्यूटर्स को आपस में जोड़ना संभव नहीं है। 

क्योंकि मोडेम एक ऐसा उपकरण है जो कंप्यूटर को टेलीफोन या केबल लाइनों पर डेटा भेजने या प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। कंप्यूटर पर संग्रहीत डेटा डिजिटल होता है जबकि एक टेलीफोन लाइन या केबल तार केवल एनालॉग डेटा को भेज सकता है। कंप्यूटर डिजिटल सिग्नल पर काम करता है और टेलीफोन लाइनें या केबल एनालॉग सिगनल को संचारित करते हैं इसीलिए डिजिटल सिग्नल और एनालॉग सिगनल को कन्वर्ट करना जरूरी है और यही काम मॉडेम करता है। Modem में modulator का मुख्य कार्य डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल में बदलना और demodulator का मुख्य कार्य एनालॉग सिगनल को डिजिटल सिगनल में बदलना है।

Bridge (ब्रिज) क्या होता है?

Bridge डाटा लिंक लेयर पर कार्य करता है। जो एक ही नेटवर्क से निकले दो सब-नेटवर्क (sub-networks) को आपस में जोड़ने के साथ-साथ फिल्टर करने का काम भी करता है। Bridge एक रिपीटर की तरह भी कार्य करता है जो प्रेषक और प्राप्तकर्ता के mac address (मैक एड्रेस) को पढ़कर डाटा को फ़िल्टर करने की कार्यक्षमता को पूरा करता है। इसके पास एक सिंगल इनपुट पोर्ट और सिंगल आउटपुट पोर्ट होता है इसलिए इसे दो पोर्ट नेटवर्क डिवाइस भी बोल सकते हैं। Bridge दो प्रकार का होता है ट्रांसपेरेंट ब्रिज (Transparent Bridges) और सोर्स रूटिंग ब्रिज (Source Routing Bridge). 

Repeater (रिपीटर) क्या होता है?

Repeater एक दो पोर्ट डिवाइस होता है जो फिजिकल लेयर पर काम करता है। इसका काम एक ही प्रकार के सिग्नल को दोबारा से रीजेनरेट करना होता है जब यह सिग्नल कमजोर या फिर करप्ट हो जाती है, इसलिए कि सिग्नल की लेंथ बढ़ जाए और अधिक समय तक सेम नेटवर्क पर सिग्नल ट्रांसमिट किया जा सके। एक खास बात ध्यान में रखना जरूरी है कि रिपीटर सिग्नल को एमप्लीफाई नहीं करता है। जब सिग्नल बहुत कमजोर पड़ जाती है तब रिपीटर पहले वाला सिग्नल को बिट-बाई-बिट (bit by bit) बार-बार कॉपी करता है, जिससे की सिग्नल की स्ट्रैंथ फिर से पहले की तरह हो जाता है। तो अभी तक हमने नेटवर्क डिवाइसेज की कुछ बेसिक जानकारियों के बारे में सीखा, आइये अब हम नेटवर्क के प्रकार को समझते हैं। 

नेटवर्क के प्रकार

नेटवर्क कई प्रकार के होते हैं जैसे PAN, LAN, MAN, WAN इत्यादि। नेटवर्क को जरूरतों, ज्योग्राफिकल क्षेत्र और स्पीड के अनुसार अलग-अलग प्रकार में बांटा गया है। उदाहरण के लिए लोकल नेटवर्क में आपको अच्छी स्पीड मिलती है लेकिन इसे एक बार में कम लोग उपयोग कर सकेंगे। जबकि वाइड नेटवर्क में आपको कम स्पीड मिलती है लेकिन इसे एक बार में अधिक लोग उपयोग कर सकेंगे। वैसे नेटवर्क को हम लोकल नेटवर्क और ग्लोबल नेटवर्क में भी बांट सकते हैं पर यह जायदा उपयोगी नहीं होता है इसलिए हमने नेटवर्क को छः अलग-अलग प्रकार में बॉंटा है जैसे:

  1. LAN (Local Area Network)
  2. MAN (Metropolitan Area Network)
  3. WAN (Wide Area Network)
  4. PAN (Personal Area Network) 
  5. HAN (Home Area Network)
  6. CAN (Campus Area Network)

आइए अब हम नेटवर्क इन सभी प्रकार को और डिटेल में समझने की कोशिश करते हैं आखिर ये नेटवर्क और इसके प्रकार किस तरह हमारे उपयोग में आते है।

PAN, LAN, MAN  WAN और CAN Network क्या है

LAN (Local Area Network) क्या है?

लोकल एरिया नेटवर्क दो या दो से अधिक कंप्यूटर को आपस में कनेक्ट यानि जोड़ता है यह कम दूरी में जैसे- एक कमरा से दूसरे कमरा या फिर एक ही कमरा में दो या दो से अधिक कंप्यूटर और किसी ग्रुप में भी कनेक्ट करता है जिससे कि डाटा का ट्रांसफर काफी उच्च गति से संभव हो पाता है। इसमें डाटा ट्रांसफर की स्पीड 100 Mbps से लेकर 1000 Mbps के बिच मिलती है। दो कम्प्यूटर्स के बीच में लोकल एरिया नेटवर्क स्थापित करने के लिए आप LAN Cable (लैन केबल) का इस्तेमाल कर सकते हैं। लोकल एरिया नेटवर्क को राउटर की मदद से WLAN नेटवर्क (Wireless Local Area Network) में बदला जाता है। राउटर या हॉटस्पॉट वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क का एक अच्छा उदाहरण है।

LAN Setup Layout

लोकल एरिया नेटवर्क का इस्तेमाल ऑफिस में अधिक रूप से किया जाता है क्योंकि वहां पर अलग-अलग प्रकार की फाइलस को दूसरे लोगों के बीच में साझा करने के लिए एक सरल तरीका है। यह कम खर्चा और अधिक सिक्योरिटी प्रदान करता है। लोकल एरिया नेटवर्क में आप 500-1000 कंप्यूटरस को आपस में कनेक्ट कर सकते हैं।

MAN (Metropolitan Area Network) क्या है?

मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क, लोकल एरिया नेटवर्क के मुकाबले अधिक क्षेत्र को कवर करता है और वाइड एरिया नेटवर्क के मुकाबले कम क्षेत्र को कवर करता है। यह दो या दो से अधिक कंप्यूटर को कनेक्ट करता है जो एक दूसरे से काफी दूर है लेकिन एक ही शहर में या शहर के बगल में है इसलिए इसे मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क कहा जाता है। इसमें नेटवर्क की स्पीड लोकल एरिया नेटवर्क के मुकाबले थोड़ा कम मिलता है।

MAN Setup Layout

मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क की गति को Mbps में मापते हैं जो हमें 10-100 Mbps तक मिलती है। इस प्रकार की नेटवर्क को मैनेज करना बहुत मुश्किल है और यह लोकल नेटवर्क के मुकाबले अधिक लोगों को जोड़ने के लिए उपयोग किया जाता है। जैसे की एक पूरे शहर के कंप्यूटर को Wire/Cable के दुवारा आपस में जोड़ना टेलीफोन कंपनी लाइन और cable TV Network मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क का अच्छा उदाहरण है। यह लोकल एरिया नेटवर्क के मुकाबले अधिक कोस्टली होता है जिससे एक सिंगल ऑर्गेनाइजेशन से मैनेज किया या किया नहीं जा सकता है। कोई बड़ी बिजनेस आर्गेनाइजेशन अपनी खुद की मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क बनाती है जिससे वह अपने बिजनेस के अलग-अलग ब्रांच को आपस में जोड़ सके।

WAN (Wide Area Network) क्या है?

वाइड एरिया नेटवर्क, लोकल एरिया नेटवर्क और मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क के मुकाबले अधिक ज्योग्राफिकल एरिया को कवर करता है जिससे कि अधिक से अधिक मात्रा में कई लाख लोग एक ही प्रकार के नेटवर्क से कनेक्ट हो पाते हैं। वाइड एरिया नेटवर्क को ग्लोबल एरिया नेटवर्क भी कहा जाता है क्योंकि यह किसी एक देश या फिर कई सारे देश के कंप्यूटर को आपस में कनेक्ट करता है इंटरनेट जिसको एक पब्लिक नेटवर्क भी बोलते हैं वाइड एरिया नेटवर्क का एक अच्छा उदाहरण है क्योंकि इसमें ग्लोब के कई सारे कंप्यूटरस और दूसरे डिवाइस को एक साथ कनेक्ट किया गया है। 

वाइड एरिया नेटवर्क में, लोकल एरिया नेटवर्क और मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क के मुकाबले डाटा ट्रांसफर की स्पीड कम होती है, क्योंकि इसमें एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर के बीच की दूरी काफी बढ़ जाती है जिससे कि सिग्नल की स्ट्रेंथ में हानि पहुंचती है। इसमें डाटा ट्रांसफर की स्पीड कुछ Kbps से लेकर 5 Mbps तक मिलती है। WAN के माध्यम से डेटा के प्रसारण के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण ऑप्टिक तार, माइक्रोवेव और Satellite और रेडियो तरंगे हैं। रेडियो तरंगे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव उत्पन्न करती है  जो की  एक वायरलेस इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल है। 

WAN Setup Layout

वाइड एरिया नेटवर्क टेलीफोन लाइनों और रेडियो तरंगों के माध्यम से अन्य LAN से जुड़ने वाले LAN का कनेक्शन हो सकता है और यह एक बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन तक सीमित हो सकता है या जनता के लिए भी अवेलेबल होता है। इसलिए इसे LAN’s of LANs नेटवर्क भी कहा जाता है। वाइड एरिया नेटवर्क की टेक्नोलॉजी जैसे: (SONET, Frame Relay और ATM) बहुत ही कॉन्प्लेक्स और अधिक खर्चीला होता है क्योंकि इससे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ सिक्योरिटी पर भी ध्यान दिया जाता है। कहीं पर किसी भी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न ना हो इसके लिए अलग-अलग सेक्विरित्य लेयर्स का इस्तेमाल भी किया जाता है। इंटरनेट की दुनिया में लोगों की ऑनलाइन प्राइवेसी या पहचान एक महत्वपूर्ण दौलत के समान है। जिसे हर कोई छुपा कर रखने की कोशिश  करता है। 

वाइड एरिया नेटवर्क की सुविधा देने और मैनेज करने वाले कंपनी को आईएसपी (ISP) यानी नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर कहते हैं उदाहरण के लिए एयरटेल और vodafone-idea नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर है। वाइड एरिया नेटवर्क मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं एक पब्लिक नेटवर्क और दूसरा एंटरप्राइज या प्राइवेट नेटवर्क।  क्या आप जानते है? हम  रोजाना इंटरनेट का इस्तेमाल एक पब्लिक नेटवर्क के रूप में करते हैं।

PAN (Personal Area Network) क्या है?

ज्योग्राफिकल क्षेत्र और दूरी के अनुसार पर्सनल एरिया नेटवर्क सबसे छोटा नेटवर्क है जो किसी इंडिविजुअल यानि एक वयक्ति के पर्सनल काम के उपयोग में लाया जाता है। पर्सनल एरिया नेटवर्क का इस्तेमाल सिर्फ इंटरनेट चलाना ही नहीं बल्कि इसके अलावा एक पर्सनल कंप्यूटर पर काम करने के लिए यानी कि कुछ जरूरी फाइल्स या डाटा को शेयर करने के लिए कम्प्यूटर्स पेरीफेरल डिवाइसेज के साथ नेटवर्क स्थापित किया जाता है। 

PAN Setup Layout

आसान भाषा में पर्सनल एरिया नेटवर्क की मदद से हम अपने कंप्यूटर से किसी भी फ़ोन, वायर्ड या वायरलेस प्रिंटर, और ब्लूटूथ स्पीकर आदि को कनेक्ट करते हैं। पर्सनल एरिया नेटवर्क की रेंज 5 मीटर तक होती है और उसकी स्पीड आपके कर्रेंट नेटवर्क स्पीड के अनुसार तय होती है। वायरलेस ब्लूटूथ को अपने मोबाइल फोन या फिर कंप्यूटर से कनेक्ट कर गाना बजाना या फिर माउस और कीबोर्ड का प्रयोग कर कंप्यूटर चलाना, पर्सनल एरिया नेटवर्क का सबसे अच्छा उदाहरण है।

HAN (Home Area Network) क्या है?

होम एरिया नेटवर्क जैसा की इसके नाम से मालूम चल रहा है कि यह एक ही घर में दो या दो से अधिक कंप्यूटरस को आपस में में जोड़ता है। होम एरिया नेटवर्क को आप एक प्रकार की लोकल एरिया नेटवर्क भी बोल सकते हो यदि इससे सिर्फ किसी एक परिवार के घर के उपयोग में लाया जाता है। 

अगर आपके घर में एक से अधिक कंप्यूटर्स, मोबाइल्स और प्रिंटर्स है तब आप अपने घर के अलग-अलग सदस्यों को होम एरिया नेटवर्क में जोड़ सकते हैं जिससे की एक ही नेटवर्क का इस्तेमाल से आपके घर के सभी मेंबर घर के सभी कंप्यूटर और प्रिंटर्स पर एक साथ काम कर सकेंगे।  

हालांकि इस प्रकार नेटवर्क को मैनेज, घर का कोई एक सदस्य जो घर का मालिक भी हो कर सकता है। एक ही घर में किसी एक कंप्यूटर के फाइल्स को दूसरे कंप्यूटर पर शेयर करना और फिर दूसरे-तीसरे कंप्यूटर के फाइल्स को एक ही कॉमन प्रिंटर से प्रिंट करना होम एरिया नेटवर्क का सबसे अच्छा उदाहरण है।

CAN (Campus Area Network) क्या है?

केंपस एरिया नेटवर्क मुख्य रूप से कॉलेज कैंपस या अन्य शैक्षिक केंपस में इस्तेमाल किया जाता है। यह एक प्रकार से लोकल एरिया नेटवर्क के समान है हालाँकि Campus Area Network लोकल एरिया नेटवर्क के मुकाबले अधिक बड़ा होता है इसमें लगभग 2000-3000 कंप्यूटरस को आपस में कनेक्ट किया जाता है। जो किसी विशेष ज्योग्राफिकल एरिया में कॉलेज यूनिवर्सिटी या अन्य संस्थानों के लिए उपयोग होता है।  कॉलेज ऑफिस या इ-लाइब्रेरी से किसी भी प्रकार का फाइल ट्रांसफर करना केंपस एरिया नेटवर्क का सबसे अच्छा उदाहरण है। आपको मैं एक बात बता दूं की केंपस एरिया नेटवर्क को कॉरपोरेट एरिया नेटवर्क भी कहा जाता है। तो यँहा तक आपने नेटवर्क के छः प्रकार के बारे में जाना अब नेटवर्क के मुख्य घटक को समझते हैं जिससे कि हमें इसी प्रकार का समस्या उत्पन्न ना हो सके।


अच्छे नेटवर्क के मुख्य घटक

1. Performance

परफॉर्मेंस एक अच्छा नेटवर्क का मुख्य घटक है मतलब की किसी नेटवर्क की परफॉर्मेंस जितनी अच्छी होगी वह नेटवर्क उतना ही बेहतर और एफिशिएंट माना जाता है। परफॉर्मेंस data ट्रांसफर की स्पीड को मापता है परफॉर्मेंस को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में किसी मैसेज को भेज कर और रिसीव करके पता लगाया जाता है कि वह मैसेज एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में ट्रांसफर होने में कितना समय लेता है और फिर वापस रिसीव होने में कितना समय लेता है। 

एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में मैसेज ट्रांसफर होने में लगा समय को ट्रांसफर टाइम कहते हैं जबकि उसी मैसेज को रिसीव होने में लगा समय को रिस्पांस (Response) टाइम कहते हैं।  किस नेटवर्क की परफॉर्मेंस उसके सिगनल स्ट्रैंथ, माध्यम, फ्रीक्वेंसी आदि कई सारे फैक्टर्स पर निर्भर करता है। आप इस लिंक का इस्तेमाल करके अपने नेटवर्क की परफॉर्मेंस को चेक कर सकते हैं। नेटवर्क स्पीड चेक करें। 

2. Reliability

रिलायबिलिटी का सरल मतलब है भरोसेमंद होना। यह सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है कि हम जिस नेटवर्क का प्रयोग करते हैं वह नेटवर्क कितना भरोसेमंद है क्योंकि अगर आप कोई खास मैसेज को दूसरे कंप्यूटर पर भेजते हैं और बीच में वह मैसेज बदल कर प्राप्तकर्ता को दूसरा अन्य मैसेज मिलता है जिससे कि प्राप्त करता और प्रेषक के बिच गलत इनफॉरमेशन साझा हो जाता है  जो बाद में कई सारे प्रॉब्लम्स को क्रिएट कर सकता है। इसके अलावा जिस कंप्यूटर के बीच में इंफॉर्मेशन का साझा किया जा रहा है वह कंप्यूटर कभी खराब नहीं होना चाहिए क्योंकि अगर कंप्यूटर खराब हो गया तो फिर इंफॉर्मेशन साझा नहीं हो सकता जिसे हम टेक्निकल भाषा में uptime और down time भी बोलते हैं आमतौर पर क्लाउड सर्विसेज 99.9% uptime देती है। 

3. Security

सिक्योरिटी एक अच्छा नेटवर्क का महत्वपूर्ण और मुख्य घटक है। जिसे कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए। सिक्योरिटी का सरल मतलब है की आप नेटवर्किंग की दुनिया में कितना safe हो। क्या आप ऐसा चाहते हैं? यदि व्हाट्सएप पर किसी दोस्त से बातचीत करने के दौरान जब आप किसी पर्सनल मैसेज को दूसरे दोस्त के पास भेज रहे हैं उस समय बीच से कोई तीसरा व्यक्ति आपके सभी मैसेज को पढ़े सके, बिल्कुल नहीं आपकी तरह मैं भी या नहीं चाहूंगा की दो लोगों के बीच चल रही किसी बातचीत को तीसरा अन्य व्यक्ति पढ़ सके और इसे ही हम सिक्योरिटी बोलते हैं। 

व्हाट्सएप आपको End to End इंट इंक्रिप्शन प्रदान करता है जिससे कि आपके सभी मैसेजेस और किसी भी प्रकार के डाटा सिक्योर होते हैं। इसके अलावा आप जितने नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं वे सभी नेटवर्क Hack नहीं होना चाहिए।  तो देखा आपने कैसे एक अच्छा नेटवर्क के लिए तीन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए। अब हम कंप्यूटर नेटवर्क के लाभ के बारे में जानेंगे।


कंप्यूटर नेटवर्क के क्या लाभ है? (Advantages of Network)

Computer Networks के अनेकों को लाभ हैं हालाँकि इसके कई हानियाँ भी है, पर मैं आपको सिर्फ लाभ के बारे में बताऊंगा।

  • डाटा शेयरिंग: कंप्यूटर नेटवर्क दो और दो से अधिक उपयोगकर्ताओं के बीच डेटा और सूचनाओं का आदान-प्रदान करने में सहायता करता है। जिसे डाटा शेयरिंग कहते है। 
  • फ़ाइल सर्वर: अनेकों फाइल्स और फ़ोल्डर्स को एक केंद्रीय नोड पर संग्रहीत किया जा सकता है जिसे आपस में एक जगह बैठे FTP (File Transfer Protocol) के जरिये प्रत्येक उपयोगकर्ता को प्रदान किया जा सकता है और साझा भी कराया जा सकता है।  जो सर्वर तकनीक फाइल शेयरिंग के इस कार्य को पूरा करता है, उसे फ़ाइल सर्वर कहते है। 
  • इंटरनेट: सूचनाओं और जानकारियों को एक्स्प्लोर करने के लिए एक साथ अन्नंत लोगों को कंप्यूटर नेटवर्क्स से जोड़ा जा सकता है जिसे हम इंटरनेट के नाम से जानते है। 
  • Work Collaboration: एक ही समस्या को हल करने के लिए एक बार में एक से अधिक लोग कंप्यूटर नेटवर्क पर जुड़ कर अपना-अपना योगदान दे सकते है। जिसे Work Collaboration कहते है। 
  • डाटा रिकवरी: किसी एक कंप्यूटर नेटवर्क के समूह से अगर किसी प्रकार के फाइल्स या फ़ोल्डर्स को डिलीट या सिस्टम क्रैश हो जाने से सेम फाइल्स या फ़ोल्डर्स को अन्य कंप्यूटर नेटवर्क समूह से वापस रिकवर किया जा सकता है। जिसे डाटा रिकवरी कहते है। 
  • पोर्टेबिलिटी और Flexibility: कंप्यूटर नेटवर्क काफी फ्लेक्सिबल और पोर्टेबल है, एक कंप्यूटर को आप कोई अन्य कार्य करने के लिए और दूसरे कंप्यूटर को दूसरा अन्य कार्य के लिए बना सकते है। उदहारण के लिए, एक कंप्यूटर को सर्वर और दूसरे को क्लाइंट के लिए यूजर इंटरफ़ेस के तैयार कर सकते है। आप वायरलेस कंप्यूटर नेटवर्क पर जुड़कर अपने कंप्यूटर को एक जगह से दूसरे जगह ले जा सकते है, जिसे पोर्टेबिलिटी और Flexibility भी कहते है। 
  • फाइल प्रोटेक्शन: कंप्यूटर नेटवर्क्स में सेक्विरित्य का विशेष ध्यान रखा जाता है, यानी किसी को कोई गुप्त फाइल्स भेजते समय उसमे पासवर्ड लगा सकते है, जिससे की वही वयक्ति उस फाइल को खोल सकता है, जिसे पासवर्ड पता हो। जिसे फाइल प्रोटेक्शन कहते है। 
  • वर्क इन ग्रुप: कंप्यूटर नेटवर्क आपको महंगे सॉफ़्टवेयर और डेटाबेस जैसे- माया, फोटोशॉप, SQL आदि  को ग्रुप के सदस्य के बीच साझा करने की भी अनुमति देता है, ताकि एक ही सॉफ्टवेयर में सभी सदस्य काम कर सके इससे रुपये की बचत  होती है। जिसे वर्क इन ग्रुप भी कहा जा सकता है। 
  • SaaS या क्लाउड सेवायें: यह स्टोरेज कैपेसिटी को बूस्ट करता है। आप अपने  कंप्यूटर में अधिक स्टोरेज नहीं होने के कारण दूसरे कंप्यूटर पर उपलब्ध स्टोरेज की मदद ले सकते है, जैसे: Google Drive, Drop Box और आप दूसरे कंप्यूटर पर नेटवर्क की मदद से हैवी सॉफ्टवेयर भी चला सकते है। जैसे: क्लाउड में वीडियो मिक्सिंग और फोटो एडिटिंग करना इत्यादि। जिसे SaaS (Storage as a Service) यानि क्लाउड सेवायें भी कहते है। अगर आपने यहां तक आर्टिकल पढ़ लिया है तो फिर FAQ’s को पढ़ना ना भूलें क्योंकि इसमें मैंने महत्वपूर्ण जानकारियों को शामिल किया है।

LAN, MAN, WAN नेटवर्क से संबधित FAQ

1. सबसे पहले नेटवर्क किसने बनाया? 

1965 में लॉरेंस रॉबर्ट्स ने अलग-अलग जगहों पर दो अलग-अलग कंप्यूटरों को पहली बार एक-दूसरे से जोड़ कर ‘बात’ किया।

2. सबसे पहले नेटवर्क किस कंपनी ने बड़े पैमाने पर बनाया? 

सबसे पहले नेटवर्क ARPANET कंपनी ने 1960 से 1970 के समय बनाया। ARPANET का पूरा नाम  Advanced Research Project Agency Network है। उस समय ARPANET को रिसर्च संस्थान, उद्योग पति और US मिलिट्री डिफेन्स में इश्तेमाल किया जाता था। उस समय यह नेटवर्क पैकेट सस्विचिंग तकनीक का इश्तेमाल करती थी फिर TCP/IP की शुरुआत के बाद, ARPANET तेजी से नेटवर्कों का एक ग्लोबल इंटरकनेक्टेड नेटवर्क, यानी इंटरनेट बन गया।

3. Server (सर्वर) क्या होता है?

सर्वर एक खाश प्रकार का कंप्यूटर प्रोग्राम  होता है जिसे कंप्यूटर पर ही डेप्लॉय (Deploy) किया जाता है, Client जब किसी खाश प्रकार का सेवा के लिए अनुरोध करता है, तब सर्वर उस सेवा को पूरा करता है इसीलिए इसे सेवा प्रदान करने वाला यानि सर्वर कहा जाता है। इंटरनेट पर वेबसाइट या वेब पेज को देखने के लिए Apache (अपाची) वेब सर्वर का इश्तेमाल किया जाता है जो सर्वर का एक अच्छा उदहारण है।

4. कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल क्या होता है?

नेटवर्किंग की दुनिया में कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल एक सेट ऑफ़ रूल्स होता है, जो दो या दो से अधिक कंप्यूटरस के बिच में किसी खाश प्रकार के कम्युनिकेशन या सेवा का लाभ लेने के लिए बनाया जाता है। यह मजबूत सेक्विरित्य बनाये रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

एक खाश सेवा के लिए क्लाइंट और सर्वर तभी आपस में कम्युनिकेशन कर पाएंगे जब दोनों एकसमान प्रोटोकॉल का इश्तेमाल करते हो, असमान प्रोटोकॉल से कम्युनिकेशन नहीं होता है। उदहारण के लिए: वेब ब्राउज़र (क्लाइंट) और apache वेब सर्वर के बिच कम्युनिकेशन के लिए मुख्य http, https प्रोटोकॉल का इश्तेमाल होता है।

  • 5. http और https क्या है? और इनमें क्या अंतर है?
  • http और https एक प्रकार के कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल है, Http का पूरा नाम: Hypertext Transfer Protocol और https का पूरा नाम Hypertext Transfer Protocol Secure है। Http की तुलना में https अधिक सिक्योर होता है, क्यूंकि https कम्युनिकेशन को अधिक Secure करता है। इसके लिए ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी का उपयोग करके कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल एन्क्रिप्ट (Encrypt) किया गया है। 

    6. रोजाना उपयोग में आने वाले महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल के नाम बातये-

    रोजाना उपयोग में आने वाले महत्वपूर्ण कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल के नाम इस प्रकार है-
    1. FTP & FTPS: File transfer protocol & File transfer protocol Secure
    2. TCP/ IP: Transmission Control Protocol/ Internet Protocol
    3. UDP: User Datagram Protocol
    4. DNS: Domain Name System
    5. HTTP & HTTPS:  Hypertext Transfer Protocol & Hypertext Transfer Protocol Secure
    6. IMAP: Internet Message Access Protocol
    7. RDP: Remote Desktop Protocol
    8. SMTP: Simple Mail Transfer Protocol 
    9. SNMP: Simple Network Management Protocol 
    10. SSH:  Secure Shell
    11. Telnet
    12. VNC: Virtual Network Computing
    इन सभी प्रोटोकॉलस को डिटेल में यहाँ से जानकारी प्राप्त करे। 

    7. Ethernet Cable क्या है?

    Ethernet Cable एक प्रकार की डाटा ट्रांसफर केबल है, जो दो या  कंप्यूटर को पर्सनल नेटवर्क या  नेटवर्क से जोड़कर उनके बिच कम्युनिकेशन स्थापित करने के काम आता है। एक ईथरनेट केबल को RJ45 कनेक्टर में जोड़ा जाता है और आप एक Ethernet Cable से केवल दो कंप्यूटर को जोड़ सकते है। यंहा जाने की Ethernet Cable से कैसे दो कंप्यूटर को आपस में कनेक्ट करके फाइल शेयर कर सकते है।


    निष्कर्ष:

    आपने इस आर्टिकल में कंप्यूटर नेटवर्क के बारे में सीखा कि दो या दो से अधिक कंप्यूटर को एक साथ इस तरह जोड़े कि उनके बीच में इंफॉर्मेशन का आदान प्रदान किया जा सके, जिसे नेटवर्क या कंप्यूटर नेटवर्क कहते है। आपने फिर कंप्यूटर नेटवर्क उपकरणों के बारे में जाना जैसे कि राऊटर एक प्रकार का नेटवर्क डिवाइस है, जो दो या दो से अधिक कंप्यूटरस के बीच में रूट (Route) को कंट्रोल करता है, हब फिजिकल लेयर डाटा के किसी एक पैकेट को बिना कोई बदलाव किए एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में आगे भेजता है, Switch हब से ज्यादा Intelligent है, स्विच एक मल्टीपोर्ट ब्रिज है जिसे डाटा लिंक लेयर डिवाइस भी कहा जाता है।

    मॉडेम दो शब्दों से मिलकर बना है पहला modulate और दूसरा demodulate, Modem में modulator का मुख्य कार्य डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल में बदलना और demodulator का कार्य एनालॉग सिगनल को डिजिटल सिगनल में बदलना है। Bridge सब-नेटवर्क (sub-networks) को आपस में जोड़ने के साथ-साथ फिल्टर करता है और Repeater (रिपीटर) का काम एक ही प्रकार के सिग्नल को दोबारा से रीजेनरेट करना होता है।

    आपने फिर Network के प्रकार के बारे में जाना। वैसे Network कई प्रकार के होते है, लेकिन मैंने आपको छः प्रकार के Network के बारे में बताया: जो इस प्रकार है: 1. LAN लोकल एरिया नेटवर्क दो या दो से अधिक कंप्यूटर को आपस में जोड़ता है यह कम दूरी जैसे- एक कमरा से दूसरे कमरा या फिर एक ही कमरा में दो या दो से अधिक कंप्यूटर को कनेक्ट करता है। 2. MAN मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क, लोकल एरिया नेटवर्क के मुकाबले अधिक क्षेत्र को कवर करता है। मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क की गति 10-100 Mbps तक मिलती है। 3. WAN वाइड एरिया नेटवर्क, लोकल एरिया नेटवर्क और मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क के मुकाबले अधिक ज्योग्राफिकल एरिया को कवर करती है जिससे कि अधिक मात्रा में कई लाख लोग कनेक्ट हो पाते हैं। 4. PAN पर्सनल एरिया नेटवर्क, दूरी के अनुसार सबसे छोटी नेटवर्क है जो किसी इंडिविजुअल यानि एक वयक्ति के पर्सनल काम के उपयोग में लाया जाता है। 5.HAN होम एरिया नेटवर्क एक ही घर में दो या दो से अधिक कंप्यूटरस को आपस में में जोड़ता है। 6. CAN केंपस एरिया नेटवर्क मुख्य रूप से कॉलेज कैंपस या अन्य शैक्षिक केंपस में इस्तेमाल किया जाता है।  

    आपने फिर जाना की एक अच्छा नेटवर्क के तीन महत्वपूर्ण घटक: 1. Performance, 2. Reliability, और 3. Security है। Computer Networks के अनेकों लाभ हैं जैसे: डाटा शेयरिंग, अनेकों फाइल्स और फ़ोल्डर्स को एक केंद्रीय नोड पर संग्रहीत किया जा सकता है, इंटरनेट: सूचनाओं और जानकारियों को एक्स्प्लोर करने के लिए, डाटा रिकवरी, पोर्टेबिलिटी और Flexibility और फाइल प्रोटेक्शन: वही वयक्ति उस फाइल को खोल सकता है, जिसे पासवर्ड पता हो,  तथा क्लाउड सेवायें इत्यादि। आपने फिर नेटवर्क से जुडी महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर जाना जैसे: सबसे पहले 1965 में लॉरेंस रॉबर्ट्स ने दो कंप्यूटर के बिच नेटवर्क बनाया, सबसे पहले ARPANET ने बड़े पैमाने पर Network बनाया, सर्वर एक खाश प्रकार का कंप्यूटर प्रोग्राम होता है, कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल एक सेट ऑफ़ रूल्स होता है और फिर अंत में सामान्य कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल के नाम के बारे में जाना जैसे: FTP & FTPS: File transfer protocol & File transfer protocol Secure, TCP/ IP: Transmission Control Protocol/ Internet Protocol, UDP: User Datagram Protocol इत्यादि। उम्मीद करता हूँ की इस आर्टिकल से आज आपने बहुत कुछ नया सीखा। 

    आप काम के अन्य पोस्ट:-

    मुझे टेक्नोलॉजी के बारे में पढ़ना और लिखना बहुत अच्छा लगता है। इंटरनेट टेक्नोलॉजी के बारे में लोगों के साथ जानकारी शेयर करके मुझे खुशी महसूस होती है। इसके अलावा फोटोग्राफी करना मेरी हॉबी है। मैंने एक इंजीनियर के रूप में शिक्षा ली है और पेशे से अब मैं एक पार्ट-टाइम Professional Blogger हूँ।

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