Peripheral Device क्या है? परिधीय उपकरण किसे कहते है? इसके प्रकार और विशेषताए

Peripheral Device का इश्तेमाल लगभग सभी कंप्यूटर यूजर करते है। यह कंप्यूटर को चलाने में हमारा मदद करता है और अधिक फंक्शनलिटी को बढ़ता है। क्या आप Internal (आंतरिक) Peripheral Devices के बारे में जानते है? इस आर्टिकल में जानेंगे। साथ में आप Peripheral Devices के मुख्य कार्य क्या-क्या है इनके बारे में भी जानेंगे।  

क्या आपको विभिन्न प्रकार के पेरीफेरल डिवाइस के इतिहास के बारे में पता है? नहीं तो इस आर्टिकल मेंजानेंगे। साथ ही आप Peripheral Device का इस्तेमाल कैसे करते है?  इसके बारे में भी जानेंगे। तो चलिए शुरू करते है। 

क्या आप जानते है, Christopher Latham Sholes (14 Feb 1819 – 17 Feb 1890) एक अमेरिकी आविष्कारक थे जिन्होंने QWERTY Keyboard का आविष्कार किया था। जो की एक Peripheral डिवाइस भी है। साथ ही सन 1953 में, Remington-Rand के द्वारा Univac कंप्यूटर पर उपयोग करने के लिए पहला हाई-स्पीड Printer विकसित किया गया था। इतिहास के बारे में आप निचे जानेंगे।

Peripheral Device क्या है? (परिभाषा)

Peripheral Devices (परिधीय उपकरण) कंप्यूटर के इनपुट और आउटपुट Device होते है, जिसे कंप्यूटर के साथ डायरेक्ट कनेक्ट किया जाता है। उदहारण के लिए: Peripheral Device, Mouse, Printer, Hard Disk, Scanner इत्यादि। ये कंप्यूटर का भाग नहीं होते हुए भी उसका एक Auxiliary (सहायक) होते है, जो कंप्यूटर को एक्स्ट्रा टास्क या फंक्शनलिटी प्रदान करने में मदद करते है। 

क्या कंप्यूटर को चलाने के लिए Peripheral Device जरूरी है? नहीं बिना Peripheral Device के भी कंप्यूटर चल सकता है, यंहा चलने का मतलब कम्प्यूटिंग करना है। Peripheral Device को Auxiliary Device, Input Output Device, या I/O Device भी कहा जाता है। 

उदहारण के लिए, Data Server में कई सारे कम्प्यूटर्स को एक साथ जोड़ कर ऑपरेट किया जाता है, और उनमें एक पर्सोनल कंप्यूटर के तरह Peripheral Devices का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। Peripheral Devices सिर्फ कंप्यूटर के फीचर्स को बढ़ाते है, कंप्यूटर Peripheral Devices पर निर्भर नहीं होते है बल्कि या खुद कंप्यूटर पर निर्भर होते है। 

पहले के Peripheral Devices में कंप्यूटिंग पावर नहीं होते थे। जिससे कंप्यूटिंग से सम्बंधित सभी कार्य कंप्यूटर अकेला पूरा करता था, लेकिन अभी के समय में मॉडर्न Peripheral Devices जैसे: Graphics Card अपने खुद के कंप्यूटिंग पावर के साथ आता है, जिसको हम GPU (Graphics Processing Unit) भी कहते है। एक्स्ट्रा GPU के कारण कंप्यूटर का कार्य कम हो जाता है, और परफॉरमेंस भी बढ़ जाता है।

Peripheral Device कितने प्रकार के होते है?

Peripheral Devices को Installation के आधार पर दो प्रकार में बांटा गया है। पहला: आंतरिक डिवाइस (Internal Device) और दूसरा: बाहरी डिवाइस (External Device).

Internal Device के उदहारण है, Mouse, Keyboard, Microphone, Webcam, Game controller इत्यादि। External Device के उदहारण है, Computer display, Printer, Projector इत्यादि। 

इसके अलावा: Peripheral Devices को Installation के आधार पर तीन प्रकार या भाग में बांटा जाता है, 1. Input Device, 2. Output Device, और 3. Storage Device/ Input/output Device.

निचे हम इनके बारे में अच्छे से डिटेल में समझेंगे, हम इनके उदाहरण भी समझेंगे। Storage Device में हार्ड डिस्क, RAM, Floppy Disk, USB Drive इत्यादि आ जाता है। 

A. कंप्यूटर के Input Device कौन कौन से हैं?

निचे आपको दैनिक जीवन में काम में आने वाले Input Devices के बारे में बताया गया है। 

Input Device सिर्फ और सिर्फ कंप्यूटर या किसी भी अन्य Device जैसे: Smart Watch, Smart TV, Bluetooth, Smart Phone, Embedded Device में इनपुट देने के लिए इस्तेमाल किये जाते है।

1. Mouse: इसे पॉइंटिंग Device भी कहा जाता है। यह सबसे कॉमन इनपुट Device है। लगभग सभी कंप्यूटर यूजर Mouse का इस्तेमाल करते है। इसका ज्यादातर इस्तेमाल नए कंप्यूटर यूजर दुवारा किया जाता है। 

इसके अलावा यह स्पेशल कार्यों जैसे: गेम खेलने में, डिजाइनिंग करने में और भी अन्य कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। Mouse सिर्फ GUI (Graphical User Interface) वाले सॉफ्टवेयर पर कार्य करता है। 

2. Keyboard: यह सबसे कॉमन इनपुट Device है। लगभग सभी कंप्यूटर यूजर Keyboard का इस्तेमाल करते है। इसका इस्तेमाल खासतोर पर टाइपिंग करने और कंप्यूटर को अधिक तेज गति से चलाने के लिए इस्तेमाल करते है। 

Keyboard GUI (Graphical User Interface) वाले सॉफ्टवेयर और CLI (Command Line Interface) वाले सॉफ्टवेयर दोनों पर कार्य करता है। Keyboard के बारे में अधिक जाने। 

3. Touchscreen: आपने अपने स्मार्ट फ़ोन में स्क्रीन डिस्प्ले तो इस्तेमाल किया होगा। वँहा भी वर्चुअल कीबोर्ड में टाइप कर या किसी ऑप्शन को सेलेक्ट कर इनपुट देते है। 

इसके अलावा Touchscreen iPAD या टैबलेट का इस्तेमाल फैशन डिज़ाइन में ड्राइंग या डिज़ाइन के लिए किया जाता है। 

4. Barcode reader: यह एक प्रकार का स्कैनर है, जो की बार कोड को स्कैन करके आपको उसे समझने योग्य विसुअल में कन्वर्ट करता है। आपके फ़ोन में लगा कैमरा भी एक बार कोड स्कैनर हो सकता है। 

5. Image scanner: यह भी एक स्कैनर का प्रकार है, जो इमेज यानि फोटो को स्कैन करने के काम आता है। 

6. Microphone: यह सबसे पुराना और कॉमन रूप  इस्तेमाल किया जाने वाला माइक्रोफोन है। इसके इस्तेमाल से आप अपने आवाज जिसको ऑडियो सिग्नल कहते है, इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल में कन्वर्ट क्र सकते है। तथा पुनः कंप्यूटर या मोबाइल फ़ोन उस सिग्नल को कन्वर्ट कर ऑडियो सिग्नल उत्पन करता है। 

7. Webcam या Camera: Webcam या Camera का इस्तेमाल किसी भी ऑब्जेक्ट (पेड़-पौधा, मानव, जानवर इत्यादि) से रिफ्लेक्ट होकर आ रही विज़िबल प्रकाश को कैद करना तथा उसे डिजिटल/ एनलोग सिग्नल में कन्वर्ट करना होता है। 

चूँकि हम डिस्प्ले में जिस इमेज को देखते है, वह कंप्यूटर में इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के फॉर्म में होता है, जो Webcam या Camera से खींची गयी होती है। 

हालाँकि यह बात अलग है, की वह इमेज हमें डिस्प्ले में नजर इसलिए आता है, क्यूंकि पुनः डिस्प्ले इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को विज़िबल लाइट में कन्वर्ट करता है। इस कारण से डिस्प्ले आउटपुट Device कहा जाता है। 

8. Game Controller: यह भी एक इनपुट Device है। इसका इस्तेमाल गेम खेलते समय गेमिंग बटनको कण्ट्रोल करने के लिए किया जाता है। इससे गेमिंग परफॉरमेंस अच्छा होता है। इसका ज्यादातर इस्तेमाल गमेरस दुवारा किया जाता है। 

9. Light Pen: लाइट Pen या XP Pen भी एक इनपुट Device होता है। यह एक प्रकार का माउस होता है। इसका अधिकतर इस्तेमाल टीचिंग यानि ऑनलाइन पढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका उपयोग ज्यादातर कम्पनी में या बड़े संस्थाओ में डिजाइनिंग के लिए किया जाता है। 

B. Output Device कौन कौन से है?

निचे आपको दैनिक जीवन में काम में आने वाले Output Devices के बारे में बताया गया है। 

Output Device सिर्फ और सिर्फ कंप्यूटर या किसी भी अन्य Device जैसे: Smart Watch, Smart TV, Bluetooth, Smart Phone में आउट देने के लिए इस्तेमाल किये जाते है।

  1. Computer Display: कंप्यूटर डिस्प्ले को मॉनिटर भी कहा जाता है। जो की मोनित यानि आपको विसुअल सिग्नल दिखाने का कार्य करता है। चूँकि हम डिस्प्ले में जिस इमेज या वीडियो को देखते है, वह कंप्यूटर में इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के फॉर्म में होता है, जो Webcam या Camera से खींची गयी होती है। Computer Display के बारे में और अधिक जानें

हालाँकि यह बात अलग है, की वह इमेज हमें डिस्प्ले में नजर इसलिए आता है, क्यूंकि डिस्प्ले इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को विज़िबल लाइट में कन्वर्ट करता है। इस कारण से डिस्प्ले को आउटपुट Device कहा जाता है।

2. Printer: Printer को आउटपुट Device इसलिए कहा जाता है, क्युकि यह कंप्यूटर में मौजूद डिजिटल फोटो, सिग्नल, डॉक्यूमेंट को फिजिकल डॉक्यूमेंट में कन्वर्ट करता है। और यह बात आपको पता ही है की ज्यादातर डॉक्यूमेंटस जैसे: सिंबल या फोटो को सिर्फ पढ़ा जा सकता है। 

3. Projector: यह भी एक आउटपुट Device है। इसका कार्य किसी समतल सतह पर वर्चुअल इमेज या वीडियो का करना है। इसका इस्तेमाल कंपनी या कॉलेज के दुवारा अपने प्रोजेक्ट, आईडिया को बड़े स्क्रीन पर प्रेजेंट करना होता है। 

एक छोटे Monitor या LED में स्क्रीन का साइज छोटा होने से अधिक दूर बैठे लोगो को दिखाई नहीं देता है, तो इस वजह से इसका इस्तेमाल किया जाता है।

4. Speaker: यह सबसे पुराना और सभी के दुवारा इस्तेमाल किया जाने वाला आउटपुट Device है। इसका मुख्य कार्य साउंड उत्पन करना होता है। यह कंप्यूटर या दूसरे अन्य Device से आ रहे इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को साउंड सिग्नल में कन्वर्ट करना होता है। 

चूँकि मानव के दुवारा उत्पन साउंड वेव को अधिक दूरी पर नहीं सुना जा सकता है। इसलिए एम्पलीफायर और स्पीकर के मदद से सामान ऑडियो वेव या सिग्नल को Amplify कर अधिक दूरी तक भेजा जा सकता है। 

C. Storage Device कौन कौन से है?

निचे आपको दैनिक जीवन में काम में आने वाले Storage Device या Input/ Output Devices के बारे में बताया गया है। 

Input-Output Device जैसे की इसके नाम से लग रहा है, इसका कार्य कंप्यूटर या किसी भी अन्य Device में इनपुट-आउट देने के लिए इस्तेमाल किये जाते है। उदहारण के लिए,

1. Floppy disk drive: यह एक प्रकार का Storage Device है। यह पुराने समय के कंप्यूटर में इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन अभी इसका इस्तेमाल लगभग बंद हो चूका है। 

2. USB Drive: यह भी एक Storage Device है। लेकिन यह सेकेंडरी Storage के केटेगरी में आता है। इसे Pen Drive या Flash Drive भी बोलते है। इसका इस्तेमाल एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में फाइल साझा करने के लिए किया जाता है। 

इसके अलावा Pen Drive का इस्तेमाल एक फ़्लैश Device के रूप में भी किया जाता है, जिससे की हम कंप्यूटर में किसी भी प्रकार का सॉफ्टवेयर को इनस्टॉल कर सकते है। 

एक जगह से दूसरे जगह किसी खाश डाटा को ले जाने के लिए यह सबसे छोटा Device है, इस वजह से इसे पोर्टेबल Storage Device भी कहा जाता है। 

3. Hard Disk Drive: HDD यानि की Hard Disk Drive एक प्राइमरी Storage Device है। इसका इस्तेमाल कंप्यूटर या लैपटॉप में डाटा को परमानेंट रूप से स्टोर करने के लिए किया जाता है। 

कंप्यूटर में सभी सिस्टम सॉफ्टवेयर जैसे की विंडोज, लिनक्स और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, मिसोसोफ्ट वर्ड, गूगल क्रोम इत्यादि Hard Disk Drive में स्टोर होते है।  

नोट: Storage Device को इसलिए Input/ Output Deviceकहा जाता है। क्यूंकि ये डाटा को इनपुट के रूप में दर्ज  स्टोर करते है, और फिर कंप्यूटर के कहे अनुसार उसे रेट्रिव यानि याद करके देते है। 

यँहा एक बात ध्यान में रखिए, की किसी चीज को लेने की प्रोसेस को इनपुट तथा देने की प्रोसेस को आउटपुट कहते है। 

4. Smartphone or Tablet Storage Interface: इसे भी एक प्रकार का Storage Device में शामिल किया जा सकता है। आप अपने फ़ोन को मिनी USB या Type C केबल से कनेक्ट कर Storage एक्सेस करने का फाइल परमिशन दे सकते है। 

5. CD/DVD drive: CD/DVD Drive भी एक प्रकार का Storage Device है। यह 1990-2000 के समय बहुत लोक्रप्रिय था। उस समय के कंप्यूटर या लैपटॉप में इसका अधिक इश्तेमाल किया जाता था। लेकिन इसका महत्व होने से अब इसका इस्तेमाल बहुत कम हो चूका है। 


Peripheral Devices के फायदे:

Peripheral Devices के बहुत फ़ायदे है। निचे आपको Peripheral Devices के बारे में बताया गया है। 

  1. Reliability: Peripheral Device बहुत ही रिलाएबल होते है। हम अपने डाटा को इसमें रख कर इसपर भरोसा कर सकते है।
  2. Extra Functionality: एक से अधिक Peripheral Device को कंप्यूटर के साथ जोड़ने से कंप्यूटर की फंक्शनलिटी बढ़ जाता है। 
  3. Storage Device (Portability): इसका इस्तेमाल से बहुत बड़ी डाटा जैसे: वीडियो, ऑडियो, इमेज इत्यादि को छोटे से Device में सुरक्षित रख सकते है। तथा इधर से उधर भी ले जा सकते है। 
  4. Remote Control (Comfort): यह एक इनपुट Peripheral Device है। इसका इस्तेमाल से हम दूर रखकर किसी Device, जैसे: फैन, टीवी, AC इत्यादि को कण्ट्रोल क्र सकते है। 
  5. Digital Camera (Proof):यह एक इनपुट Device है। इसका इस्तेमाल से किसी भी ऑब्जेक्ट की इमेज को इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के रूप में सेव कर सकते है। जिससे की इसे हम बाद प्रूफ के लिए भी दिखा सकते है। 

Peripheral Device का इस्तेमाल कैसे करते है?

Peripheral Device का इस्तेमाल करना बेहद आसान इसके आपको निचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करने पड़ेंगे:

स्टेप 1) सबसे आप पता कीजिए, की आप किस प्रकार का Peripheral Device का इस्तेमाल करना चाहते है? ऊपर अआप पढ़ उसके प्रकार को जान सकते है। 

स्टेप 2) उसके बाद यदि आपका Device इंटरनल है तो फिर आप अपने लैपटॉप का बैक कवर को खोलिये। आप किसी एक्सपर्ट्स या वीडियो का मदद ले सकते है। 

स्टेप 3) और यदि कंप्यूटर है, तो आपको CPU को खोलना पड़ेगा। 

स्टेप 4) उसके बाद आप रेस्पेक्टिवे स्लॉट को पहचान कर उसमे अटैच कर दीजिये। लेकिन यदि वह Device एक्सटर्नल Device है। 

स्टेप 5) तो आप अपने लैपटॉप या कंप्यूटर में उस कनेक्शन पोर्ट या इंटरफ़ेस को खोजिय जिसमें आपका Device का केबल या पोर्ट फिट होता है। 

स्टेप 6) उसके बाद आप उसमे अटैच कर लीजिए। लेकिन एक बात ध्यान दीजिएगा की पहले आप जाँच पड़ताल कर लीजिए की वह Device आपके सिस्टम Requirement जैसे: प्रोटोकॉल, वर्शन के अनुसार मैच होता है या नहीं। 


Peripheral Device से सम्बंधित आपके सवालों के जवाब 

1. 5 प्रकार के Input Device कौन कौन से हैं? (नाम बताये)

1. Mouse
2. Keyboard
3. Microphone
4. Scanner
5. Camera

2. 5 प्रकार के Output Devices कौन कौन से हैं? (नाम बताये)

1. Monitor
2. Speaker
3. Projector
4. Printer
5. Graphics card

3. 3 प्रकार के Storage Devices कौन कौन से हैं? 

1. Hard Disk
2. PEN Drive
3. SSD (Solid State Drive)

4. Peripheral या Auxiliary Device का मतलब क्या होता है?

Peripheral या Auxiliary Device का सरल मतलब होता है, की आपके कंप्यूटर या लैपटॉप में एक्स्ट्रा फंक्शनलिटी को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले Device। उदहारण के लिए: प्रिंटर, एक्स्ट्रा मॉनिटर, सेकेंडरी Storage इत्यादि। 

5. क्या बिना Peripheral Device के कंप्यूटर ऑपरेट हो सकता है?

हाँ हो सकता है। क्यूंकि कंप्यूटर का मूल कार्य कंप्यूटिंग यानी गणना करना होता है और यह कार्य प्रोसेसर करता है। और यह बात आपको भी पता होगा की, कंप्यूटर के पास अपना खुद का प्रोसेसर रहता है। जिसे कंप्यूटर का दिमाग भी कहते है। प्रोसेसर के बारे में और अधिक जाने। 

6. Peripheral Device को और किन नामों से जानते है?

Peripheral Device को Auxiliary Device, I/O device, Input-Output Device भी कहा जाता है। 

7. Peripheral का हिंदी में मतलब क्या होता है?

Peripheral का हिंदी में मतलब “परिधि” होता है। लेकिन कंप्यूटर की दुनिया में इसका मतलब कुछ और है। वैसे Device जो कंप्यूटर का मूल पार्ट नहीं है, और उसमे कंप्यूटर के तरह कोई भी कंप्यूटिंग पावर नहीं होता है। मतलब की वैसे Device जो खुद अकेला नहीं ऑपरेट हो सकते है, उनको ऑपरेट करने के लिए कंप्यूटर का जरूरी होता है।


निष्कर्ष

आज आपने इस आर्टिकल की Peripheral Device के बारे में जानकारी हासिल किया। जैसे की आपने जाना की Peripheral Device क्या होता है? Peripheral Device कितने प्रकार के होते है? Peripheral Devices तीन प्रकार के होते है। पहला: इनपुट, दूसरा, आउटपुट तथा तीसरा: इनपुट-आउटपुट या Storage Device इत्यादि। 

आपने फिर जाना की Peripheral Device के फायदे के बारे में जाना जैसे: Reliability, Extra Functionality इत्यादि। तथा अंत में आपने फिर Peripheral Device का इस्तेमाल कैसे करते है? इसके बारे में जाना। 

उम्मीद है की Peripheral Device के बारे में यह आर्टिकल आपको बहुत इन्फोर्मटिव लगी होगी। किसी भी प्रकार के सुझाव और शिकायत के लिए निचे कमेंट करें हम आपका रिप्लाई जरूर देंगे।

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