💻ROM क्या है; ROM की Full Form; ROM कितने प्रकार की होती है

आज लगभग सभी स्मार्टफोन, कंप्यूटर और लैपटॉप का इस्तेमाल करते ही है, तब आप RAM और ROM के बारे में तो ज़रूर शुने होंगे, ROM प्राथमिक मेमोरी का एक भाग है। जब हम स्मार्टफोन, कंप्यूटर आदि डिवाइस खरीदने जाते है, तब हम उस डिवाइस के ROM के बारे में ज़रूर पूछते है, क्योंकि ROM का कैपेसिटी ज़्यादा होने से स्मार्टफोन में कोई भी बड़े साइज का एप्लिकेशन बहुत ही आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

ROM Kya Hai

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Computer, Smartphone जैसे डिवाइस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा operating system है। RAM, ROM इस ऑपरेटिंग सिस्टम का ही हिस्सा होता है, जिसके बिना इन डिवाइस का कोई महत्व ही नहीं है। तो क्या आप जानते है ROM Kya Hai; ROM का Full Form क्या है; ROM कितने प्रकार के होते है; इसका कार्य यदि नहीं तो यह पोस्ट आप सभी के लिए बहूत उपयोगी होने वाला है।

ROM क्या है

कंप्यूटर मेमोरी का एक मुख्य भाग प्राइमरी मेमोरी है। ROM भी एक प्राइमरी मेमोरी है। ROM Kya Hai के बारे में यदि बताएं तो ROM एक अर्ध प्रबहकिय मेमोरी है यह सारे तथ्य को स्थायि रूप में संचित रखता है, और कंप्यूटर इस्तेमाल करते वक़्त यदि किसी कारणवश विद्युत प्रवाह बंद हो जाए, तब इस मेमोरी में संचित डाटा डिलीट नहीं होता है। इसीलिए ROM को Non-Volatile-Memory भी कहां जाता है। 

ROM के सभी तथ्य को पड़ा तो जा सकता है परन्तु, ROM में किसी भी तरह के डाटा को लिखा नहीं जा सकता। कंप्यूटर मे कार्य करने के लिए जितना भी महत्वपूर्ण डाटा का ज़रूरत होता है, वह इस ROM में ही संचित रहेता है। उदाहरण के तौर पर BIOS यानिकि Basic Input Output System को कंप्यूटर अपने ROM में ही संचित रखता है। क्योंकि BIOS प्रोग्राम ही कंप्यूटर का Basic कार्य संचालन करता है। 


ROM का Full Form

ROM का पूरा नाम Read Only Memory है, यहां तथ्य को सिर्फ पढ़ा जा सकता है और यह मेमोरी Motherboard में स्थित रहेता है। यह एक स्थायी मेमोरी है जहां तथ्य स्थायी रूप से संचित रहेता है। ROM को अपडेट नहीं किया जा सकता क्योंकि डिवाइस की कंपनी द्वारा ही इस मेमोरी को सेट किया जाता है। ROM कंप्यूटर को चालू करने में सहायता करता है।


ROM कितने प्रकार के होते है

ROM क्या है, ROM का पूरा नाम क्या है के विषय जानकारी प्राप्त करने के बाद, अब आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि ROM Kitne Prakar Ka Hota Hai। तब इसके उत्तर में बता दें कि ROM चार प्रकार का होता है MROM, PROM, EPROM, EEPROM। ROM के इन सभी प्रकार के बारे में हमने नीचे बिस्तार से बताया है। 

1) MROM

MROM का फूल फोरम Marked Read Only Memory है, इस Memory में Pre Programmed Data और निर्देश संचित किया जाता है। इस प्रकार के ROM का कीमत बहुत ही ज्यादा महंगा होता है, जिस कारण वर्तमान समय में इस प्रकार के ROM का उपयोग नहीं किया जाता है।

2) PROM

PROM का Full Form “Programmable Read Only Memory” है, यह एक साधारण प्रकार का ROM है। इस ROM को हम सिर्फ एक बार ही Update कर सकते है अर्थात, सिर्फ एक बार ही इसमें हम program डाल सकते है। एकबार डाटा एंटर करने के बाद, इस प्रकार के ROM में कोई भी तथ्य अपडेट नहीं किया जा सकता है। कंप्यूटर, स्मार्टफोन आदि डिवाइस के सृष्टिकर्ता कंपनी पहले एक blank PROM मदरबोर्ड में सेट करता है। 

इस प्रकार के ROM में बहूत सारे छोटे छोटे Fuse रहेते है। जहां प्रोग्रामिंग के ज़रिए संकेत यानि कमांड को एंटर किया जाता है। ROM में एक बार एंटर किया गया तथ्य को लिखा, या फिर परिवर्तन नहीं किया जा सकता है इसे सिर्फ पढ़ा जा सकता है। PROM में तथ्य संचित रखने के लिए PROM Burner का उपयोग किया जाता है। CRT Monitor में इस प्रकार के ROM का इस्तेमाल होता है। 

ध्यान दें – “ROM में instruction संचित करते समय यदि कोई गलती हो जाए, तब उसे सुधारना असम्भव है। क्योंकी PROM में एकबार संचित किए गए तथ्य को दुबारा अपडेट नहीं किया जा सकता।”

3) EPROM

EPROM का (Full Form )पूरा नाम Erasable and Programmable Read Only Memory है। इसका नाम से ही पता चलता है कि इस प्रकार के ROM में तथ्य को Erase और Programmed दोनों ही किया जा सकता है। अर्थात, यहां हम तथ्य को erase कर सकते है और दुबारा तथ्य को programmed भी कर सकते है।

इस प्रकार के ROM में अतिरिक्त बिजली की जरूरत होती है। EPROM से किसी तथ्य को मिटाने के लिए अर्थात, चिप को खाली करने के लिए लगभग 30 minute तक इस चिप को Ultraviolet Ray अर्थात, पराबैंगनी किरण से गुजरना पड़ता है। जिस कारण इसे Ultraviolet EPROM भी कहा जाता है।

यहां Updation करते वक़्त अर्थात, EPROM चिप में कोई नया तथ्य एंटर करते समय या फिर Programming के समय चिप में एक charge डाला जाता है जो 10 साल तक एकदम सुरक्षित रूप से chip के अंदर ही स्थित रहेता है। Quartz Crystal Window के जरिए Ultraviolet Light पास करने के द्वारा आसानी से इस charge को erase किया जा सकता है। PCO, Computer TV tuner में EPROM का उपयोग किया जाता है। 

4) EEPROM

EEPROM की Full Form Electrically Erasable Programmable Read Only Memory। प्रचलित सभी प्रकार के ROM में technology संबंधित बदलाव के कारण EEPROM का प्रचलन शुरू हुआ। इस प्रकार के ROM में हम डाटा को बस 4 से 10 millisecond के अंदर ही अपडेट कर सकते है। EEPROM में हम 10 से 15 हजार बार तथ्य को Erase और प्रोग्राम कर सकते है, नया तथ्य को एंटर कर सकते है। 

आपके जानकारी के लिए बता दें कि EEPROM में एक प्रोग्राम के द्वारा तथ्य संग्रह किया जाता है, जिसे EEPROM Program Burner कहां जाता है। इस प्रकार के ROM में डेटा परिवर्तन यानी अपडेट करने के लिए उच्च विद्युत संकेत की जरूरत होती है। PROM और EPROM के तुलना में यह ROM बहूत ही उच्च क्षमता संपन्न और अच्छा है जिस कारण ROM का यह प्रारूप बहुत ही महंगा होता है।

ध्यान दें – “EEPROM में संचित डाटा या फिर डाटा के किसी भी हिस्से को erase करने के लिए इस प्रकार के ROM को कंप्यूटर से बाहर निकालने का जरूरत नहीं होता है।”

“आमतौर पर, ROM में स्थित तथ्य को erase नहीं किया जा सकता है। परन्तु, EPROM और EEPROM सिर्फ इन दोनों प्रकार के ROM में स्थित तथ्य को update किया जा सकता है।”


ROM के कार्य

ROM के कार्य के विषय में हमने नीचे बर्णना किया है, जैसे –

  1. कंप्यूटर को चालू करने की प्रक्रिया यानी Booting के लिए आवश्यक सभी Program BIOS को नियंत्रण करना ROM का मुख्य कार्य है।
  1. ROM सभी Input और Output Device जैसे Keyboard, Mouse, Monitor, Printer आदि को नियंत्रण करने का कार्य करता है।
  1. ऑपरेटिंग सिस्टम और Software के Instruction को ROM स्टोर करके रखता है।
  1. कंप्यूटर, स्मार्टफोन आदि डिवाइस में File, Document, Application, Videos को स्थायी रूप से संचित रखने में ROM सहायता करता है।
  1. ROM संचित तथ्य, Firmware और Program को RAM में ट्रांसफर करने का काम करता है ताकि RAM अपना कार्य अर्थात, CPU को तथ्य प्रेरण संपन्न कर पाए।

ROM कैसे काम करता है

इस पोस्ट के माध्यम से इससे पहले आपने ROM के कार्य के बारे में जानकारी प्राप्त किया है। अब सवाल आता है कि ROM Kaise Kam Karta Hai। तो चलिए ROM का कार्यप्रक्रिया के बारे में जान लेते है। Computer बहूत सारे कॉम्पोनेंट का समग्र में गठित एक डिवाइस है, जिस कंपोनेंट के बिना कंप्यूटर कोई कार्य नहीं कर सकता है। इन सारे कंपोनेंट यानि डिवाइस के बिना कंप्यूटर सिर्फ एक निर्जीव बस्तु है। कंप्यूटर सिस्टम को सहायता करने वाला सभी डिवाइस को Hardware कहते है, जैसे CPU, Monitor, Keyboard, Mouse आदि। 

कंप्यूटर कुछ निर्देश यानि प्रोग्राम समूह के आधार पर कार्य करता है, जिसे Software कहते है। आप सभी ज़रूर जानते है कि कंप्यूटर डिवाइस यूजर के द्वारा जो इनपुट प्राप्त करता है, उस इनपुट को CPU द्वारा प्रोसेस करने के बाद, कंप्यूटर एक निर्धारित आउटपुट यूजर को प्रदान करता है, जिस प्रक्रिया को BIOS यानी Basic Input Output System कहेते हैं।  इनपुट और आउटपुट कंपोनेंट के बिना कंप्यूटर का कोई अस्तित्व ही नहीं है। 

BIOS कंप्यूटर का मुख्य हिस्सा है जो कंप्यूटर को start करने में यानि Booting में सहायता करता है और साथ ही डिवाइस से जुड़े सभी कंपोनेंट के विषय में कंप्यूटर को जानकारी प्रदान करता है। BIOS के निर्माण के समय ही इसे ROM Chip में स्टोर किया जाता है अर्थात, BIOS ROM में स्थित रहेता है। ROM Chip में Column और Row का grid रहेता है। ROM इस grid को कनेक्ट करने के लिए Diode का इस्तेमाल करता है।

जैसे, डायोड का value अगर 0 हो तब grid कनेक्ट नहीं होता है। अगर, डायोड का value 1 हो तब grid कनेक्ट हो जाता है, इसे बहूत सावधानी से set किया जाता है। कंप्यूटर चालू करने के लिए जब हम Switch On करते है तब, ROM में स्थित BIOS से मेमोरी RAM में ट्रांसफर होता है और RAM CPU को निर्देश प्रदान करता है, ऐसे ही कंप्यूटर स्टार्ट हो जाता है। ROM में फर्मवेयर भी स्थित रहेता है जिसके आधार पर ROM तथा कंप्यूटर अपना सारा कार्य अर्थात, फाइल, डॉक्यूमेंट, एप्लिकेशन, मल्टीमीडिया आदि स्थायी रूप से संचित रखता है। 


ROM और RAM में क्या अंतर है 

अब तक इस पोस्ट के माध्यम से आप ROM के बारे में तो जान ही गए हैं और साथ ही RAM के विषय में भी आप थोड़ा सा जानकारी प्राप्त कर चुके है। ROM और RAM दोनों ही प्राइमरी मेमोरी है।

ROM में तथ्य को सिर्फ पढ़ा जा सकता है। दूसरी तरफ, RAM कंप्यूटर का सिस्टम सॉफ्टवेयर को प्रोसेस करता है, यहां तथ्य को लिखा और पढ़ा जा सकता है। ऐसे ही RAM और ROM में बहूत सारे अंतर है जिसके बारे में हमने नीचे बताया है।

बिषयROMRAM
Volatile Memory/Non Volatile MemoryROM में तथ्य permanently अर्थात, स्थायी रूप से संचित रहेता है। यदि किसी कारणवश विद्युत संजोग बंद हो जाए तब भी ROM में संचित सभी डाटा सुरक्षित तरीके से संचित रहेता है। इस कारण ROM को Non Volatile Memory बोलते है।RAM में तथ्य temporarily अर्थात, अस्थायी रूप से संचित रहेता है। यदि किसी कारणवश विद्युत संजोग बंद हो जाए तब RAM में संचित सभी डाटा नष्ट हो जाता है। इस कारण RAM को Volatile Memory कहेते है।
सम्पूर्ण नाम    2. ROM का सम्पूर्ण नाम है Read Only Memory।2. RAM का सम्पूर्ण नाम है Random Access Memory। 
कार्य3. ROM कंप्यूटर, स्मार्टफोन जैसे डिवाइस में डॉक्यूमेंट, फाइल, एप्लिकेशन आदि स्थायी रूप से संचित रखने में सहायता करता है।3.  RAM कंप्यूटर, स्मार्टफोन का सिस्टम सॉफ्टवेयर को प्रोसेस करवाने में सहायता करता है।
आकार    4.  ROM का आकार RAM के तुलना में बड़ा होता है।    4.  RAM का आकार ROM के तुलना में छोटा होता है।
संचित तथ्य का आकार  5. ROM का डाटा स्टोर कैपेसिटी कई Megabyte है।  5. RAM तथ्य को Gigabyte के रूप में संचित रखता है। RAM में संचित तथ्य का आकार आमतौर पर, 1GB से लेकर 8GB व उससे भी ज़्यादा होता है।
 तथ्य ग्रहण गति  6. RAM के तुलना में ROM का तथ्य ग्रहण गति बहूत कम होता है।
  6. ROM के तुलना में RAM का तथ्य ग्रहण गति बहूत ज़्यादा है। इस मेमोरी की गति को MHZ, GHZ के द्वारा नापा जाता है।
कॉस्ट7. RAM के तुलना में ROM का कीमत कम है। 7. ROM के तुलना में RAM का कीमत ज़्यादा है।
प्रकार  8. ROM चार प्रकार का होता है जैसे, MROM, PROM, EPROM, EEPROM।  8. RAM दोनों प्रकार का होता है जैसे, Static RAM, Dynamic RAM।

ROM से जुड़े कुछ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल जवाब

1) ROM का पूरा नाम क्या है?

ROM का पूरा नाम Random Access Memory है।

2) Operating System क्या है?

ऑपरेटिंग सिस्टम एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है, जो कंप्यूटर को निर्देश प्रदान करता है और कंप्यूटर उस निर्देश व प्रोग्राम के आधार पर कार्य संपन्न करता है।

3) Booting क्या है?

Computer को चालू करने की प्रक्रिया को ही Booting बोलते है। अर्थात, कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के सहायता से जिस प्रक्रिया के तहत स्टार्ट होता है उसे Booting कहते है। 

4) ROM कितने प्रकार का होता है?

ROM चार प्रकार का होता है MROM, PROM, EPROM, EEPROM।

5) ROM के विशेषताएं?

i) ROM प्राथमिक मेमोरी का एक भाग है।
ii) यहां तथ्य permanently store रहेता है।
iii) इस मेमोरी में तथ्य को सिर्फ पढ़ा जा सकता है।

सारांश

आज के इस पोस्ट पर हमने ROM क्या है; इसके प्रकार के बारे में पूरे विस्तार में बताया है। हमें उम्मीद है आज के ईस ब्लॉग पोस्ट को पढ़कर आप जरूर जान गए होंगे कि ROM क्या है, इसका क्या कार्य है।

यदि इस पोस्ट को पढ़कर आपके मन में ROM से संबंधित कोई सवाल है, तो आप बेझिझक नीचे कमेंट बॉक्स पर कमेंट करके हमें पूछ सकते हैं। अगर आपको लगे की यह पोस्ट आप सभी के लिए उपयोगी है, तब आप हमारे ब्लॉग के और भी कई पोस्ट को पढ़ सकते हैं।

आपके काम के अन्य पोस्ट :-

में LogicalDost.in पर Content Writer हूं। मुझे Banking, Finance और Computer के विषय में पोस्ट लिखना पसंद है और इसी के साथ मुझे Books पढ़ना बहुत अच्छा लगता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here